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*‘तालिबानी विदेश मंत्री की भारत यात्रा का सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) द्वारा विरोध’*

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सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) तालिबान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा का कड़ा विरोध करती है। पार्टी का मानना है कि तालिबान जैसी कट्टरपंथी, स्त्री-विरोधी और अमानवीय विचारधारा का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी भी व्यक्ति का भारत में स्वागत करना न केवल इस देश की सभ्य, लोकतांत्रिक और समानतामूलक परंपरा के विपरीत है, बल्कि यह भारतीय विदेश नीति के नैतिक मूल्यों पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

यह बेहद आपत्तिजनक है कि तालिबानी विदेश मंत्री के भारत आगमन के क्रम में कई विवादित घटनाएँ सामने आईं — जिनमें भारत सरकार द्वारा आधिकारिक स्तर पर उन्हें प्रोटोकॉल और सुरक्षा मुहैया कराना, कुछ निजी और सरकारी संगठनों द्वारा उनके साथ औपचारिक बैठकों का आयोजन, और मीडिया के प्रश्नों से उन्हें बचाने की कोशिशें शामिल हैं। सबसे अधिक चिंताजनक यह है कि इन घटनाओं पर भारत सरकार ने अब तक कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है। इस चुप्पी से यह आभास होता है कि सरकार तालिबान शासन के साथ संबंध सामान्य करने की दिशा में अग्रसर है, जो भारत की लोकतांत्रिक और मानवीय परंपरा के लिए शर्मनाक है।

तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में जिस प्रकार महिलाओं के अधिकारों को कुचल दिया है, उन्हें शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक जीवन और यहाँ तक कि स्वतंत्र आवाजाही से वंचित किया है — वह आधुनिक मानव सभ्यता के लिए कलंक है। ऐसी ताक़तों से संवाद या सहयोग का कोई औचित्य नहीं है, जब तक वे मानवाधिकारों, विशेषकर महिलाओं की बराबरी, शिक्षा और स्वतंत्रता के सिद्धांतों को स्वीकार नहीं करते। और फिर यदि भारत नस्ल के आधार पर दक्षिण अफ्रीका में भेदभाव की रंगभेद नीति के खिलाफ था, तो उसे अफगानिस्तान में लिंग के आधार पर भेदभाव का समर्थन क्यों करना चाहिए?

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) यह मानती है कि किसी भी राष्ट्र के साथ संबंध समानता, न्याय और प्रगतिशील मूल्यों पर आधारित होने चाहिए — न कि अवसरवादी या सामरिक कारणों से। भारत सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि हमारा संविधान और विदेश नीति का आधार “शांति, लोकतंत्र और मानव गरिमा” है। तालिबान जैसे शासन से हाथ मिलाना इन आदर्शों के साथ विश्वासघात है।पार्टी यह भी रेखांकित करना चाहती है कि अफ़ग़ानिस्तान की असली जनता — महिलाएँ, छात्र, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता — आज भी दमन के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। भारत को उनके साथ एकजुटता दिखानी चाहिए, न कि उनके उत्पीड़कों के साथ मंच साझा करना चाहिए।

सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) हर तरह की धार्मिक या सांस्कृतिक कट्टरपंथी सोच का विरोध करती है, चाहे वह किसी धर्म, देश या सत्ता से जुड़ी हो। पार्टी महिलाओं की समानता, स्वतंत्रता और न्याय के पक्ष में खड़ी है और यह मानती है कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और विकास तभी संभव है जब सभी देशों में लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और लैंगिक समानता को सशक्त किया जाए।

बसंत हेतमसरिया 

राष्ट्रीय प्रवक्ता, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)

मो. 9934443337

Ramswaroop Mantri

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