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*भाई दूज: क्यों माना जाता है यमुना में भाई-बहन के साथ स्नान का विशेष महत्व?*

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दिवाली के दो दिन बाद भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. दिवाली के पांच दिनों के पर्व की समाप्ति भाई दूज के साथ होती है. इस त्यौहार को भाऊ बीज, भैया दूज भात्र द्वितीया, भाई द्वितीया और भतरु द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है. भाई दूज पर बहनें अपने भाई को तिलक लगाती हैं. कलावा बांधती हैं और आरती उतारती हैं. भाई अपनी बहनों को गिफ्ट देते हैं. इस दिन बहनें सुबह उठकर स्नान करने के बाद व्रत रखती हैं.

ब्रजमंडल में भाई दूज के दिन यमुना में भाई-बहन के साथ स्नान का विशेष महत्व है. इस शुभ तिथि के दिन भाई बहन यमुना नदी में स्नान करते हैं. ब्रजमंडल में इस दिन यमुना में स्नान करके के इस पवित्र पर्व को मनाया जाता है.

ब्रजमंडल में भाई दूज के दिन यमुना में भाई-बहन के साथ स्नान का विशेष महत्व है. इस शुभ तिथि के दिन भाई बहन यमुना नदी में स्नान करते हैं. ब्रजमंडल में इस दिन यमुना में स्नान करके के इस पवित्र पर्व को मनाया जाता है. आइए जानते हैं कि इस दिन यमुना नदी में स्नान करने का विशेष महत्व क्या है?
भाई दूज शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर 2025, को रात 08 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 23 अक्टूबर 2025, को रात 10 बजकर 46 मिनट पर होगा. ऐसे में 23 अक्टूबर को भाई दूज का त्योहार मनाया जाएगा. इस दिन तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 13 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त 03 बजकर 28 मिनट तक रहेगा.

भाई दूज को यम द्वितिया भी कहते हैं
भाई दूज को यम द्वितिया भी कहते हैं. इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के पास मिलने आए थे. यमुना ने यमराज का तिलक लगाकर स्वागत किया और प्रेम पूर्वक उनको खाना खिलाया था. भाई दूज से जुड़ी एक प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार यमराज अपनी बहन यमुना से लंबे समय बाद मिलने जाते हैं. यमुना जी भाई यमराज को अचानक देखकर बहुत खुश होती हैं. वो यमराज का खूब आदर सत्कार करती हैं.

भाई दूज पर यमुना में स्नान का महत्व
यमुना जी की सेवा से यमराज प्रसन्न होते हैं और उनसे कहते हैं कि वो कोई वर मांग लें. तब यमुना जी वरदान में अपने भाई से सभी प्राणियों को अपने भय से मुक्त करने का वचन मांगा. यमराज ने इस वरदान को देना असंभव बताया और यमुना जी से कहा कि वो कोई दूसरा वर मांग लें. इस यमुना जी ने अपने भाई से कहा कि वो उनको ये वरदान दें कि इस शुभ दिन पर जो भाई-बहन यमुना में स्नान करके इस पर्व को मनाएंगे, उनको अकाल मृत्यु का डर नहीं सताएगा. इस पर प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना ये वरदान दे दिया. तब से यमुना में स्नान करके भाई दूज मनाने की परंपरा चली आ रही है.

Ramswaroop Mantri

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