-सुसंस्कृति परिहार
इन दिनों भाजपा का ग्राफ निरंतर समूचे देश में गिरता जा रहा है असम से शुरू हुआ भाजपा विरोध उत्तराखंड से होता हुआ मध्यप्रदेश पहुंच गया है। जबकि मध्यप्रदेश में पिछले 2003 से भाजपा का शासन रहा है। प्रदेशाध्यक्ष के फैसले से कभी कोई नाराज़ नहीं दिखा। यहां तक कि जब 2018 में कांग्रेस सरकार बनी तब अल्प समय बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने विजयी कांग्रेस मंत्रीमंडलीय साथियों और विधायकों के साथ कमलनाथ की सत्ता को गिराया था ।उसके बाद चुनाव में कांग्रेस के विजयी उम्मीदवार को ही भाजपा ने टिकिट दिया था। तब भी भाजपा के अनुशासित आज्ञाकारी सदस्यों ने कहीं विरोध दर्ज़ नहीं कराया था।इसी तरह गत चुनाव में शिवराज सिंह मुख्यमंत्री के दावे की जगह डाॅ मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया तब भी इन आज्ञाकारी कार्यकर्ताओं ने कोई चूं चपाट नहीं की।

इसके बरक्स इस बार बिहार चुनाव में भाजपाई उम्मीदवारों की जो फजीहत उनके कार्यकर्ता और घटक दल के लोग कर रहे हैं।वह भी ये स्पष्ट करता है कि निश्चित तौर पर अब मोदी शाह को कमज़ोर होते देख कार्यकर्ताओं में विरोध की क्षमता विकसित होती जा रही है।
ये स्थिति मध्यप्रदेश के गढ़ इंदौर में पिछले दिनों सामने आई है।ज्ञात हुआ है कि मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की राज्यस्तरीय और इंदौर शहर की इकाइयों की नयी कार्यकारिणी की घोषणा के बाद खाती समुदाय के भाजपाई लोगों ने सत्तारूढ़ दल के स्थानीय कार्यालय में उग्र विरोध प्रदर्शन किया।
भारतीय जनता पार्टी के इंदौर शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के खिलाफ मंगलवार को जमकर हंगामा हुआ। नई नगर कार्यकारिणी की घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय पर प्रदर्शन किया, पोस्टर फाड़े और मिश्रा के नेमप्लेट पर कालिख पोती. विरोध तब भड़का जब पार्टी ने एक हिस्ट्रीशीटर की पत्नी स्वाति काशिद को पदाधिकारी बनाया गया।
खाती समाज के लोगों ने भी भाजपा कार्यालय के बाहर पुतला जलाया. प्रदर्शन के बाद 28 से अधिक भाजपा पदाधिकारियों ने इस्तीफा देने की बात कही है . नगर अध्यक्ष मिश्रा ने विरोध को कांग्रेस समर्थित षड्यंत्र बताया, जबकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी का प्रमाण कहा।
वास्तविक स्थिति यह है कि भाजपा कार्यकारिणी की घोषणा के तुरंत बाद, नाराज भाजपा कार्यकर्ता और खाती समाज के लोग भाजपा कार्यालय पहुंचे। ये पूर्व विधायक जीतू जिराती के समर्थक बताए जा रहे हैं। उन्होंने नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और “सुमित मिश्रा गुंडा है” के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने मिश्रा के केबिन के बाहर लगी नेमप्लेट और गेट पर कालिख पोत दी। इतना ही नहीं, कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर में भी सुमित मिश्रा के चेहरे पर कालिख पोती गई और बाद में पोस्टर फाड़ दिया गया।
खाती समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा उनके समाज की लगातार उपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा, “हमारे नेता जीतू जिराती को पार्टी व्यक्तिगत रूप से निशाना बना रही है। हम जीतू पटवारी (कांग्रेस) को नजरअंदाज कर जीतू जिराती के कहने पर भाजपा को वोट देते आए हैं, लेकिन उनके समर्थकों को ही पदाधिकारी नहीं बनाया जा रहा है।
ये घटनाएं बता रहीं कि भाजपा की बुनियाद हिल रही है जबकि यहां से प्रदेश सरकार में मंत्री कद्दावर नेता कैलाश विजय वर्गीय जैसे दमदार नेता भी हैं जिनका इंदौर में जबरदस्त दबदबा माना जाता है।





