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सोनभद्र में भयावह हादसा: परिजन चिथड़ों में अपनों को तलाशते रहे,15 बताई जा रही मलबे में दबे मजदूरों की संख्या

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सोनभद्र के ओबरा क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी स्थित मेसर्स श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स की पत्थर खदान में चट्टान धंसकने से मलबे के नीचे दबे 6 और शव सोमवार को निकाले गए। इनमें दो सगे भाइयों के शव भी शामिल हैं। हादसे में मरने वालों की संख्या अब सात हो गई है। दूसरी तरफ राहत-बचाव कार्य जारी है। प्रशासन का कहना है कि जब तक यह तय न हो जाए कि खदान में और कोई नहीं फंसा है तब तक बचाव अभियान जारी रहेगा।हादसा इतना भयावह था कि शव देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। मजदूरों के शरीर के चिथड़े उड़ गए थे। शव इतने क्षत-विक्षत थे कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल रहा। काफी देर तक परिजन चिथड़ों में अपनों को तलाशते रहे। 

शनिवार की दोपहर बाद खदान में ड्रिलिंग के दौरान चट्टान गिरने से मजदूर मलबे में दब गए थे। इनकी संख्या 15 बताई जा रही है। हादसे के बाद पुलिस-प्रशासन की निगरानी में एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें पिछले 48 घंटे से राहत कार्य में जुटी हुई हैं। सोमवार की सुबह पांच बजे तक चार शव मलबे से निकाले गए, जबकि शाम करीब आठ बजे दो शव और मिले।

Sonbhadra Mining Accident number of workers buried under the debris is said to be 15

घायल मजदूर को लेकर जाते हुए।

खदान के मलबे से निकाले गए पनारी गांव के करमसार टोला निवासी इंद्रजीत यादव (32) और संतोष यादव (30) सगे भाई थे। कोन के पिपरखाड़ गांव के परसवा निवासी रविंद्र उर्फ नानक और पनारी के खड़री टोला निवासी रामखेलावन (40), ग्राम परसोई के टोला जकहवा निवासी गुलाब उर्फ मुंशी की भी मौत हो गई। छठवें शव की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है। दूसरी तरफ,  जिले के प्रभारी मंत्री रवींद्र जायसवाल पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर परिजनों से शोक संवेदना व्यक्त की  और कहा कि हादसे में मृत सभी मजदूरों के परिजनों को 20.55 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

Sonbhadra Mining Accident number of workers buried under the debris is said to be 15

इंद्रजीत, संतोष, राजू और रविंद्र उर्फ गगन की फाइल फोटो व मौके पर रोते- बिलखते परिजन

छह अफसरों की टीम को नजर नहीं आई खदान की गहराई
जिस खदान में हादसा हुआ, उसकी स्थिति की जांच के लिए पिछले वर्ष छह अफसरों की टीम ने दौरा किया था। खान सुरक्षा, यूपीपीसीबी, खनन और प्रशासन की संयुक्त टीम ने एक-एक बिंदु की जांच के बाद जो रिपोर्ट सौंपी थी, उसमें सुरक्षा उपकरणों का उपयोग और बेंच बनाकर खनन का दावा करते हुए संचालकों को क्लीन चिट दे दी गई थी।

Sonbhadra Mining Accident number of workers buried under the debris is said to be 15

पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मौजूद मृतकों के परिजन व पुलिस

हादसा इतना भयावह था कि शव देखने वालों के रोंगटे खड़े हो गए। मजदूरों के शरीर के चिथड़े उड़ गए थे। शव इतने क्षत-विक्षत थे कि उनकी पहचान करना भी मुश्किल रहा। काफी देर तक परिजन चिथड़ों में अपनों को तलाशते रहे। किसी की पहचान हाथ में बंधे कलावा और गोदना से हुई तो किसी को उसके कपड़ों से पहचाना गया। अलग-थलग पड़े शरीर के अंगों को सहेजकर किसी तरह पोस्टमॉर्टम कराया गया। फिर कपड़े में लपेटकर अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंपा गया।

Ramswaroop Mantri

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