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*बीना रिफाइनरी की सुरक्षा से खिलवाड़: निजी कंपनियों ने बेस कैंप, प्लांट्स और अस्थाई आवास बना लिए* 

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बीना। मध्य प्रदेश की बीना रिफाइनरी (बीपीसीएल) एक महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाई है। जो देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन हाल के वर्षों में यहां सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

रिफाइनरी के चारों ओर 5 किलोमीटर का नो डेवलपमेंट जोन

2009 में जारी शासन के आदेश के अनुसार, रिफाइनरी के चारों ओर 5 किलोमीटर का नो डेवलपमेंट जोन है, जिसमें 1 किलोमीटर का क्षेत्र पूरी तरह प्रतिबंधित  घोषित किया गया है। यह जोन एक्ट 1923 के तहत सुरक्षित रखा गया है ताकि रिफाइनरी से जुड़े जोखिमों से आसपास की आबादी को बचाया जा सके। लेकिन हकीकत में यह नियम कागजों तक सीमित नजर आते हैं।

निजी कंपनियों ने बेस कैंप, प्लांट्स और अस्थाई आवास बना लिए

 जानकारी के अनुसार, रिफाइनरी की बाउंड्री वॉल से महज चंद मीटर दूर निजी कंपनियों ने बेस कैंप, प्लांट्स और अस्थाई आवास बना लिए हैं। ये निर्माण बिना किसी अनुमति के हो रहे हैं, जो विस्तार परियोजना के नाम पर हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों को छोटी-मोटी झोपड़ी बनाने पर भी सुरक्षा का हवाला देकर रोका जाता है, जबकि बड़ी कंपनियों को खुली छूट मिल रही है। इससे न केवल सुरक्षा खतरे में है, बल्कि सामाजिक असमानता भी उजागर हो रही है।

एसडीएम ने जानकारी मिलने पर सख्त कार्रवाई की कही बात

कई शिकायतें रिफाइनरी प्रबंधन, जिला प्रशासन और शासन स्तर तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन ठोस कदम नहीं उठे। रिफाइनरी के PRO का कहना है कि “नो डेवलपमेंट जोन में कोई अनुमति नहीं मांगी गई, न दी गई।” वहीं, एसडीएम विजय डहरिया ने कहा कि 1 किमी निषेध क्षेत्र में प्लांट्स की जानकारी BPCL से नहीं मिली, मिलेगी तो सख्त कार्रवाई होगी। यह मुद्दा न केवल बीना बल्कि पूरे देश की औद्योगिक सुरक्षा नीतियों पर सवाल उठाता है। अगर समय रहते कार्रवाई न हुई, तो बड़ा हादसा हो सकता है।

Ramswaroop Mantri

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