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*RSS की सुरक्षा पर सरकार कितना करती है खर्च पूछने वाले RTI activist ललन किशोर सिंह की जिंदगी आफत में*

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भारत की जनता बीजेपी प्रधानमंत्री के अनुसार 80 करोड़ 5 किलो महीने के राशन पर निर्भर है और बाकि बची 20 प्रतिशत जनता उसे भारत की बीजेपी सरकार ने धर्म और सम्प्रदायिकता में उलझा रखा है।बीजेपी सरकार के खिलाफ अगर कोई आवाज उठाता है तोउस पर राज द्रोह या यूएपीए लगा दिया जाता है और न्याय मिलना में देरी या यूँ कहे भारत की अदालतों के जज अब जज नहीं बीजेपी समर्थक है जैसा की पिछले दिनों हुआ सेवानिवृत के बाद जजों के बीजेपी सदस्य बन कुछ जज सांसद बन गए कुछ बीजेपी आका के प्रिय अब भारत की जनता न्याय के लिए किस का दरवाजा खटखटाये।2014 के बाद जब से केंद्र में बीजेपी सत्तारूढ़ हुई है भारत की आर्थिक स्थिति बुरी तरह चरमा गई अब आरएसएस प्रमुख को ही ले लें यह वह संगठन है जिसका भारत में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है फिर भी बीजेपी सरकार संघ प्रमुख पर हजारों करोड़ सालाना खर्च कर रही है आखिर क्यों ?एक आदमी की सुरक्षा पर हजारों करोड़ खर्च करने की बजाये क्यों नहीं बीजेपी सरकार और सारा पैसा भारत की 80 प्रतिशत आबादी में बाँट देती और 5 किलो महीने राशन वाली लाइन से बाहर कर भारत की उन्नति के सहयोग करती।

तमाम उम्र ट्रेड यूनियनों का हिस्सा रहे 64 वर्षीय ललन किशोर सिंह ने जून 2021 से यह जानने की कोशिश शुरू की कि सरकार संघ को सुरक्षा मुहैय्या करने में कितना ख़र्च कर रही है. सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 24(4) के तहत सिंह को जानकारी देने से इनकार कर दिया गया. सिंह ने आरोप लगाया कि इसके बाद, यातायात पुलिस ने उनसे पूछताछ शुरू कर दी, उन्हें कार्यालय बुलाया और लंबे समय तक इंतज़ार कराया.

2024 में, सिंह ने बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में एक रिट याचिका दायर की, जिसमें बताया गया कि कैसे, समाचार रिपोर्टों के अनुसार, सीआईएसएफ 2015 से भागवत और नागपुर स्थित संघ मुख्यालय को जेड-प्लस सुरक्षा दे रही है. उन्होंने अदालत को बताया, ‘लगभग डेढ़ सौ सुरक्षाकर्मी इसमें लगे हुए हैं,’ उन्होंने एक अन्य समाचार रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 58 कर्मी एशिया के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी को 40 लाख रुपए प्रति माह से ज़्यादा की लागत से जेड-प्लस सुरक्षा दे रहे हैं. इसके आधार पर, सिंह ने गणना की कि सरकार संघ की सुरक्षा में हर महीने लगभग 1.25 करोड़ रुपए ख़र्च कर रही होगी. इसका मतलब पिछले एक दशक में 150 करोड़ रुपए ख़र्च हुए होंगे. सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फ़रवरी 2023 के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें अंबानी को ख़ुद ख़र्च वहन करने का निर्देश दिया गया था. उन्होंने तर्क दिया कि क्या इसका मतलब यह नहीं था कि आरएसएस को भी अपनी सुरक्षा का ख़र्च वहन करना होगा? सिंह ने मुझसे कहा, ‘यह जनता का पैसा है. इसका इस्तेमाल जनहित में होना चाहिए.’

जब मैंने कुमार से पूछा कि आरएसएस एक अपंजीकृत संस्था क्यों बनी हुई है, तो उन्होंने कहा, ‘इसके लिए पंजीकृत होना कहां ज़रूरी है? क्या कोई क़ानूनी बाध्यता है? नहीं.’ यह संगठन सिर्फ़ वित्तीय जांच से ही नहीं बचता. चूंकि इसका पंजीकरण नहीं है, इसलिए इसे सदस्यता रिकॉर्ड रखने की ज़रूरत नहीं है. संघ कानूनी तौर पर अनुबंध नहीं कर सकता, संपत्ति का मालिक नहीं हो सकता या कर-कटौती योग्य दान प्राप्त नहीं कर सकता, लेकिन ये सारे काम वह अपने संबद्ध ट्रस्टों और अग्रणी या फ्रंट संगठनों के ज़रिए करता है इस ख़ामी ने इसे गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की आरएसएस सदस्यता को छिपाने का मौका दिया.

संघ प्रमुख पर सुरक्षा पर हजारों करोड़ खर्च करने की बजाये क्यों नहीं बीजेपी सरकार  सारा पैसा भारत की 80 प्रतिशत आबादी में बाँट देती

केंद्र ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की सुरक्षा बढ़ाई; Z+ सिक्योरिटी अब ए एस एल में तब्दील, आईबी की इस रिपोर्ट के बाद अचानक फैसला 

भारत की जनता बीजेपी प्रधानमंत्री के अनुसार 80 करोड़ 5 किलो महीने के राशन पर निर्भर है और बाकि बची 20 प्रतिशत जनता उसे भारत की बीजेपी सरकार ने धर्म और सम्प्रदायिकता में उलझा रखा है।बीजेपी सरकार के खिलाफ अगर कोई आवाज उठाता है तोउस पर राज द्रोह या यूएपीए लगा दिया जाता है और न्याय मिलना में देरी या यूँ कहे भारत की अदालतों के जज अब जज नहीं बीजेपी समर्थक है जैसा की पिछले दिनों हुआ सेवानिवृत के बाद जजों के बीजेपी सदस्य बन कुछ जज सांसद बन गए कुछ बीजेपी आका के प्रिय अब भारत की जनता न्याय के लिए किस का दरवाजा खटखटाये।

2014 के बाद जब से केंद्र में बीजेपी सत्तारूढ़ हुई है भारत की आर्थिक स्थिति बुरी तरह चरमा गई अब आरएसएस प्रमुख को ही ले लें यह वह संगठन है जिसका भारत में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है फिर भी बीजेपी सरकार संघ प्रमुख पर हजारों करोड़ सालाना खर्च कर रही है आखिर क्यों ?एक आदमी की सुरक्षा पर हजारों करोड़ खर्च करने की बजाये क्यों नहीं बीजेपी सरकार और सारा पैसा भारत की 80 प्रतिशत आबादी में बाँट देती और 5 किलो महीने राशन वाली लाइन से बाहर कर भारत की उन्नति के सहयोग करती।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत (RSS chief)की सुरक्षा बढ़ाई गई है। भागवत की सुरक्षा अब और मजबूत कर दी गई है। मोहन भागवत को पहले से ही Z+ सिक्योरिटी मिली हुई थी। लेकिन केंद्र ने भागवत की Z+ सिक्योरिटी अब ए एस एल में तब्दील कर दी है। जिसके बाद अब मोहन भागवत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बाद सबसे तगड़े सुरक्षा घेरे में रहेंगे।
आईबी की इस रिपोर्ट के बाद अचानक फैसला
रिपोर्ट्स के अनुसार, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की थ्रेट रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार ने मोहन भागवत की सुरक्षा बढ़ाए जाए जाने का फैसला लिया। आईबी ने अपनी रिपोर्ट में मोहन भागवत पर खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया था। मोहन भागवत को ए एस एल सिक्योरिटी मिलने के बाद अब उनकी सुरक्षा बेहद सख्त रहेगी। भागवत का सुरक्षा घेरा परिंदा भी नहीं तोड़ पाएगा।
मोहन भागवत को एस ए एल सिक्योरिटी मिलने के बाद क्या होगा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहन भागवत की सुरक्षा सीआईएसएफ जवानों के द्वारा की जाती है। मौजूदा समय में भागवत की सुरक्षा में 58 कमांडो क्लॉक वाइज तैनात रहते हैं। वहीं अब नई सिक्योरिटी के बाद सीआईएसएफ कमांडो भागवत के आसपास और ज्यादा एक्टिव हो जाएंगे साथ ही सुरक्षा कर्मियों की तादाद बढ़ जाएगी। अब सीआईएसएफ टीम उस स्थान पर पहले से ही मौजूद रहेगी जहां मोहन भागवत को जाना होगा।बताया जाता है कि, जिस शख्स को एस ए एल स्तर की सुरक्षा मिलती है उसकी सुरक्षा के संबंध में जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य और अन्य विभागों जैसी स्थानीय एजेंसियों की भागीदारी अनिवार्य हो जाती है। जानकारी के अनुसार, इसमें बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा होता है। इसके अलावा साथ ही चॉपर यात्रा की अनुमति केवल विशेष रूप से डिजाइन किए गए हेलीकॉप्टरों में ही दी जाती है। जिसके लिए अलग तरह का प्रोटोकॉल होता है।
कैसे तय होती है सिक्योरिटी की कैटेगरी?
भारत में विशेष सुरक्षा कैटेगरी में X,Y,Y+,Z और Z+ की सिक्योरिटी शामिल की गई है। खुफिया ब्यूरो की ओर से सुरक्षा संबंधी खतरे को भांपने के बाद सिक्योरिटी की कैटेगरी तय की जाती है। यानि अगर खतरा बहुत बड़ा है तो फिर ऐसे में Z या Z+ की सिक्योरिटी दी जाती है। सुरक्षा की इन पांचों कैटेगरी में Z+ भारत में सर्वोच्च कैटेगरी की सिक्योरिटी है। इस सिक्योरिटी में किसी व्यक्ति को 10+ एनएसजी कमांडो + सीआईएसएफ़ और सीआरपीएफ़ व पुलिस कर्मियों सहित 50 से ज्यादा कर्मियों की सुरक्षा प्रदान की जाती है।

Z+ सुरक्षा में प्रत्येक कमांडो मार्शल आर्ट और निहत्थे युद्ध का विशेषज्ञ होता है और सुरक्षा परिष्कृत आधुनिक हथियारों और आधुनिक संचार उपकरणों से लैस होता है। देश में X,Y,Y+,Z और Z+ की सिक्योरिटी पाने वालों में कई वीवीआईपी, वीआईपी, नेता, एक्टर, उद्धोगपति समेत तमाम दिग्गज हाई-प्रोफाइल हस्तियां शामिल हैं। एनएसजी और वीवीआईपी, वीआईपी, राजनेताओं, हाई-प्रोफाइल हस्तियों एनएसजी और सीआईएसएफ का इस्तेमाल केवल वीवीआईपी और वीआईपी लोगों की सुरक्षा में सबसे ज्यादा किया जाता है। इन लोगों की सुरक्षा पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं।

Ramswaroop Mantri

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