डा.सिद्धार्थ
परिनिर्वाण दिवस ( 6 दिसंबर) पर इस महान व्यक्तित्व को सादर नमन
निम्न बातों के लिए आपके प्रति आभार बाबा साहेब-
आभार बाबा साहेब, आप ने मुझे वह संवेदना और विश्वदृष्टि दी कि मैं इंसान बनने की यात्रा कम से कम शुरू तो कर सकूं।
आभार बाबा साहेब आप ने भारत की सबसे बड़ी बीमारी (वर्ण-जाति) की पहचान कराई। इस बीमारी ने हर भारतीय को कैसे अपना शिकार बना रखा है, इसे महसूस करने और समझने की कूबत दी। इस बीमारी से मुक्त हुए बिना कोई भारतीय न तो इंसान की तरह सोच सकता है, न सभी इंसानों को अपना भाई-बंधु समझ सकता है, इसका अहसास कराया।
आभार बाबा साहेब आप ने यह सिखाया कि वर्ण-जाति के श्रेणीक्रम (ब्राह्मणवाद) का खात्मा भारतीयों के इंसान बनने के लिए जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी पितृसत्ता का खात्मा है। जीवन के सभी क्षेत्रों में स्त्री-पुरुष समता की संवेदना और चेतना के बिना भारतीय इंसान नहीं बन सकते हैं। एक दूसरे को बंधु नहीं स्वीकार कर सकते हैं। इसमें स्त्री-पुरुष के बीच की बंधुता भी शामिल है।
आभार बाबा साहेब आपने यह सिखाया कि लोकतंत्र ही इंसानी यात्रा का मार्ग है। हर स्तर पर लोकतंत्र की स्थापना ही वह तरीका है, जिससे मानव जाति अपनी सबसे उन्नत मंजिलों को प्राप्त कर सकती है और हर व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के पूर्ण विकास का अवसर प्राप्त हो सकता है। बिना किसी नस्ल, वर्ण-जाति, लिंग, धर्म, भाषा और क्षेत्र के भेदभाव के।
आभार बाबा साहेब आपने दोस्त-दुश्मन की साफ-साफ पहचान कराई- ब्रिटिश साम्राज्यवाद, ब्राह्मणवाद और पूंजीवाद के रूप में। ब्रिटिश साम्राज्यवाद तो चला गया, लेकिन ब्राह्मणवाद और पूंजीवाद आज भी भारतीय जनता का खून चूस रहे हैं।
आभार बाबा साहेब आपने पूरा जोर लगाकर संविधान सभा को एक ऐसे संविधान को स्वीकार करने के लिए तैयार किया, जिसका मूल प्रस्थान सबके लिए न्याय, समता, स्वतंत्रता और बंधुता है। इसमें राजनीतिक न्याय के साथ सामाजिक और आर्थिक न्याय भी शामिल है। इस संविधान ने वर्ण-जाति, लिंग और धर्म आधारित सभी भेदभावों के खात्मे की घोषणा की। सबसे बड़ी घोषणा यह कि बिना की तरह अंतर के सभी भारतीय समान है। कानून के सामने सभी बराबर हैं। सभी संविधान और कानून से शासित हैं। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। इस संविधान ने वर्चस्व और अधीनता के सभी रिश्तों के खात्मे की घोषणा की।
आभार बाबा साहेब आपने अपनी जीवन की पहली पार्टी लेबर पार्टी बनाकर और मजदूरों के पक्ष में लंबे संघर्ष चलाकर यह अहसास दिलाया कि किसी संवेदनशील और चेतना संपन्न इंसान की पहली प्रतिबद्धता मेहनतकशों के प्रति होनी चाहिए। आप ने भारत के मेहनतकशों को साफ बताया कि भारत में आपके दो दुश्मन हैं- ब्राह्मणवाद और पूंजीवाद। आप ने मजदूरों को उनकी मुक्ति के लिए कम्युनिस्ट घोषणा-पत्र जरूर पढ़ने की सलाह दी।
आभार बाबा साहेब आप वह पहले व्यक्ति थे, जिसने यह अहसास दिलाया कि यह देश दलितों लिए यातनागृह है, हॉरर ऑफ चैम्बर है। जिन्होंने इस देश के दलितों को मानवीय गरिमा और उनके मानवाधिकारों के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी। आपने दलितों की उनकी मुक्ति का दार्शनिक, वैचारिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मार्ग दिखा दिया। आपने उन्हें उन संवैधानिक और कानूनी अधिकारों से लैस कर दिया, जिनका इस्तेमाल करके वे अपनी मुक्ति हासिल कर रहे हैं और कुछ हद तक कर लिए हैं। इस देश के सबसे बड़े मेहनतकश समाज और दबे-कुचले दलितों के भीतर वह साहस भर दिया कि वे किसी भी दर्शन, विचार और संगठन को चुनौती दे सकें। किसी व्यक्तित्व को ललकार सकें।
आभार बाबा साहेब आपने से साफ शब्दों में कहा कि हिंदू धर्म कोई धर्म नहीं, बहुसंख्यक पिछड़े, दलितों और महिलाओं पर वर्चस्व की एक सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था है। इसमें धर्म का कोई बुनियादी तत्व नहीं। इस धर्म के ईश्वर पर, इसके धर्मस्थान (मंदिर) और इसके धर्मग्रंथ (वेद) पर सिर्फ ब्राह्मणों-द्विजों का एकाधिकार है। आप ने इसी आधार पर कहा कि हिंदू धर्म ब्राह्मण-द्विजों का धर्म तो हो सकता है, लेकिन वह गैर-ब्राह्मणों और महिलाओं का धर्म किसी भी अर्थ में नहीं।
आभार बाबा साहेब आपने तथाकथित महान हिंदू धर्म ग्रंथों-वेद, गीता, स्मृतियों, पुराणों, दुर्गा सप्तशती आदि की सच्चाई के रेशे-रेशे से परिचित कराया। आपने बताया कि यह धर्मग्रंथ किसी अर्थ में धर्मग्रंथ नहीं है। ये वर्ण-जाति और पितृसत्ता को कायम रखने उपकरण हैं। ये ब्राह्मण-द्विजों और मर्दों के वर्चस्व और गैर-ब्राह्मणों- महिलाओं की अधीनता के सिद्धांतों का पुलिंदा हैं। ये गैर-ब्राह्मणों और महिलाओं पर ब्राह्मणों-द्विजों और मर्दों के वर्चस्व को कायम रखने के लिए हिंसा की वकालत करते हैं। हिंसा का सिद्धांत स्थापित करते हैं। इनके इसी चरित्र को देखते हुए आप ने कहा कि इन धर्मग्रंथों को डाइनामाइट से उड़ा देना चाहिए।
आभार बाबा साहेब आपने साफ निर्देश दिया कि हिंदू राष्ट्र इस देश और इस देश के बहुसंख्यक लोगों के लिए एक भयानक आपदा होगी। आपने हिंदू धर्म को एक फासीवादी धर्म कहा। आपने मार्ग निर्देश किया कि किसी कीमत पर हिंदू राष्ट्र की स्थापना को रोका जाना चाहिए। आप ने हिंदू राष्ट्र को समता, स्वतंत्रता, बंधुता और लोकतंत्र के खिलाफ कहा। आपने जोर देकर किसी भी कीमत पर इसे रोकने की बात की, ‘किसी भी कीमत पर’।
आभार बाबा साहेब आपने अपनी दूरदृष्टि से यह चेतावनी दी थी कि यदि राजनीतिक लोकतंत्र को कायम रखना है, तो सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र भी कायम करना पड़ेगा। नहीं तो सामाजिक और आर्थिक गैर-बराबरी राजनीतिक लोकतंत्र को निगल जाएगा। दुर्योग से यह आज घटित हो चुका है। हम सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र नहीं कायम कर पाए। आज राजनीतिक लोकतंत्र बुरी तरह संकटग्रस्त हो गया है। सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र कायम करने में हमारी असफलता राजनीतिक लोकतंत्र करीब-करीब निगल चुकी है।
आभार बाबा साहेब आपने भारतीय इतिहास को देखने की मूलगामी दृष्टि दी। आपने रेखांकित किया कि भारतीय इतिहास का मूल संघर्ष ब्राह्मणवादी व्यवस्था-वैचारिकी और समण व्यवस्था और वैचारिक के बीच का संघर्ष का रहा है। आपने बुद्ध , कबीर और जोतीराव फुले को अपना गुरू और मार्गदर्शक घोषित करके यह चिन्हित किया कि इन तीनों का दर्शन, विचार, एजेंडा और व्यक्तित्व ही भारत के तीन युगों की प्रगतिशील-उन्नत विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। यही तीनों भारत के सबसे उन्नत-प्रगतिशील मूल्यों के वाहक हैं।
आभार बाबा साहेब आपने दर्शन, चिंतन, विचार, एजेंडे और संघर्ष के उन्नत शिखरों को छूकर यह दिखा दिया कि यदि किसी व्यक्ति में संकल्प शक्ति है तो वह कठिन से कठिन सामाजिक और आर्थिक हालातों के बीच से निकलकर भी उन्नति के शिखरों को छू सकता है, अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास कर सकता है।
आभार बाबा साहेब आपने यह अपने आचरण से स्थापित किया कि जीवन का उद्देश्य सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर नाम कमाना, पद पाना और धन कमाना नहीं है, बल्कि पूरी मानव जाति के लिए न्याय, समता, स्वतंत्रता, बंधुता और सबसे के लिए साझी आर्थिक-भौतिक समृद्धि हासिल करने के लिए काम करना और संघर्ष करना है।
आभार बाबा साहेब आपने यह रेखांकित किया कि महान व्यक्ति वह नहीं होता है, जो अपनी क्षमताओं और ज्ञान की इस्तेमाल अपनी सिर्फ अपनी व्यक्तिगत उन्नति के लिए करता है और अन्याय का पक्ष-पोषण करता है। महान व्यक्ति वह होता है, जो अपनी शिक्षा-दीक्षा, ज्ञान-विज्ञान, पढ़ाई-लिखाई, डिग्री, क्षमता-संभावना का इस्तेमाल पूरी मानव जाति की उन्नति, विशेषक अन्याय, अत्याचार और शोषण-उत्पीड़न के शिकार लोगों के लिए करता है। आपने जीवन-भर यही किया। आपने सिर्फ कहा नहीं, करके दिखा दिया।
आभार बाबा साहेब आपने मार्क्स की तरह यह कहा कि दर्शन-चिंतन उद्देश्य सृष्टि के रहस्यों की व्याख्या करना नहीं, बल्कि गैर-बराबरी, अन्याय, अत्याचार और शोषण-उत्पीड़न पर टिकी दुनिया को बदलना है, उसे न्यायपूर्ण दुनिया बनाना है। सिर्फ व्याख्या नही, बदलना और उस बदलने में लगना सबसे महत्वपूर्ण काम है। आपने बुद्ध और मार्क्स को इसी तरह के व्यक्तित्व को रूप में देखा। दोनों में यह समानता जोर देकर रेखांकित की।
बाबा साहेब आप के इस देश, दुनिया और मेरे ऊपर अनगिनत ऋण हैं। किस-किस के लिए आभार प्रकट करूं। आपके जीवन और संघर्षों से प्रेरणा लेकर रत्ती भर उस सपने के पूरा करने की दिशा में कुछ कर सका, जो सपना भारत के लिए आप ने देखा था, यही आपके ऋणों से कुछ हद तक मुक्त होने का रास्ता है।
परिनिर्वाण दिवस आपको सादर नमन बाबा साहेब!
(डॉ. सिद्धार्थ लेखक और पत्रकार हैं।)





