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*महाराष्ट्र में मजदूर आंदोलनों के मजबूत स्तंभ बाबा आढाव का निधन, छह दशकों तक मजदूरों के लिए किया संघर्ष*

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पुणे. महाराष्ट्र के पुणे से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. बाबासाहेब पांडुरंग आढाव का सोमवार रात निधन हो गया. उन्होंने 95 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. बाबा आढाव ने अपना पूरा जीवन समाज के दबे-कुचले लोगों के लिए लगा दिया. वे दलितों, आदिवासियों और मजदूरों के अधिकारों की बहुत बुलंद आवाज थे. उनके जाने से सामाजिक जगत में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है. उन्होंने कहा कि बाबा आढाव को समाज सेवा के लिए हमेशा याद किया जाएगा. बाबा आढाव छह दशकों से ज्यादा समय तक संघर्ष करते रहे. वे महाराष्ट्र में मजदूर आंदोलनों के एक मजबूत स्तंभ माने जाते थे.बाबासाहेब पांडुरंग आढाव, जिन्हें बाबा आढाव के नाम से जाना जाता था, महाराष्ट्र के सामाजिक और मज़दूर आंदोलनों के एक स्तंभ माने जाते थे. वे ‘हमाल पंचायत’ की स्थापना के पीछे की ताकत थे, जो एक मजदूर संघ है. हृदय के अचानक काम करना बंद करने से बाबा आढाव का निधन हो गया.

12 दिन से अस्पताल में भर्ती

बाबा आढाव की 12 दिन पहले ज्यादा तबीयत खराब हो गई थी. इसके बाद उन्हें पुणे के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने उनके सहयोगी नितिन पवार के हवाले से लिखा है कि अस्पताल में भर्ती के दौरान, बाबा आढाव को लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था. लेकिन रात 8.25 बजे कार्डियक अरेस्ट की वजह से उनका निधन हो गया.

इलाज के दौरान हार्ट अटैक: सहयोगी नितिन पवार ने बताया कि उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी. इसके बाद उन्हें एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. वहां लगभग दो हफ्ते से उनका इलाज चल रहा था. डॉक्टर्स ने उन्हें एडवांस मेडिकल सपोर्ट पर रखा था. तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. सोमवार रात करीब 8.25 बजे उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया. इसके बाद उनका निधन हो गया. उनके परिवार में दो बेटे असीम और अंबर हैं.

हमाल पंचायत और सामाजिक संघर्ष: बाबा आढाव को ‘हमाल पंचायत’ की स्थापना के लिए जाना जाता है. यह एक प्रमुख मजदूर संघ है. उन्होंने कुली और रिक्शा चालकों को संगठित किया. उन्होंने कंस्ट्रक्शन वर्कर को इंसाफ दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया. जातिगत भेदभाव के खिलाफ भी उन्होंने बड़ी लड़ाई लड़ी. उन्होंने ‘एक गांव एक पनवाथा’ जैसा क्रांतिकारी आंदोलन चलाया. इसका मकसद समाज में समानता लाना था. वे सच की खोज करने वाली विचारधारा के पक्के समर्थक थे.

पीएम मोदी, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, एनसीपी नेता शरद पवार और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस समेत कई लोगों ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, “सामाजिक न्याय के मजबूत स्तंभ और महान श्रमिक नेता बाबा आढाव जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद और एक अपूरणीय क्षति है. वंचितों, शोषितों और मजदूरों के अधिकारों के लिए उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया. पुणे से उठी उनकी संघर्ष की ज्योति ने देश भर में मशाल बन कर सामाजिक न्याय की राह को रोशन किया. इस दुःख की घड़ी में उनके शोकाकुल परिवारजनों और असंख्य साथियों को अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करता हूं.”

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक्स ‘पोस्ट’ में लिखा, “वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता बाबा अधव के निधन की खबर बहुत दुखद है। उन्होंने लगातार वंचित और असंगठित तबके के लोगों के हक के लिए लड़ाई लड़ी। उन्होंने उनके लिए सहारा बनकर काम किया। उन्होंने कुली, रिक्शा चालक, कंस्ट्रक्शन वर्कर को इंसाफ दिलाने के लिए एक संगठन बनाया। उन्होंने कुली पंचायत, एक गांव-एक पानी की टंकी जैसी कई पहल कीं। सामाजिक बुराइयों के खिलाफ उनकी लड़ाई हमेशा याद रखी जाएगी। महाराष्ट्र में हमेशा से सामाजिक कार्यकर्ता की एक महान परंपरा रही है। उस परंपरा की एक अहम शख्सियत आज हमसे दूर हो गई।

सीएम फडणवीस ने आगे लिखा, “उन्हें हमेशा याद किया जाएगा, उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे। मैं उन्हें दिल से श्रद्धांजलि देता हूं। हम उनके रिश्तेदारों और फैंस के दुख में शामिल हैं। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा, “महाराष्ट्र के सामाजिक और मजदूर आंदोलन के एक स्तंभ, वंचितों और हाशिए पर पड़े लोगों को न्याय दिलाने के लिए अपनी जिंदगी समर्पित करने वाले एक अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ता, सत्य की खोज करने वाली विचारधारा के एक निष्ठावान अनुयायी और मजदूर वर्ग के नेता डॉ. बाबा अधव के दुखद निधन से महाराष्ट्र के सामाजिक समानता आंदोलन को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है।

हमाल पंचायत के जरिए उन्होंने न सिर्फ राज्य के हमालों और मजदूरों को संगठित किया, बल्कि उन्हें आत्म-सम्मान का एहसास भी दिलाया। उन्होंने आगे लिखा, “जातिगत भेदभाव के खिलाफ लड़ने के लिए उन्होंने ‘एक गांव एक पनवाथा’ क्रांतिकारी आंदोलन का नेतृत्व किया और समाज में समानता स्थापित करने की कोशिश की। नब्बे पार करने के बाद भी उनकी याद महाराष्ट्र के लोगों के मन में डॉ. बाबा अधव के काम के रूप में रहेगी, जिन्होंने अपनी आखिरी सांस तक सामाजिक न्याय और मजदूर वर्ग के अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से आवाज उठाई। भावभीनी श्रद्धांजलि।”

Ramswaroop Mantri

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