अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरक्षण को लेकर OBC-EWS उम्मीदवारों को झटका*

Share

भोपाल से आई एक अहम खबर में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरक्षण को लेकर बड़ा और साफ फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर किसी उम्मीदवार ने भर्ती प्रक्रिया के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ लिया है, तो वह बाद में खुद को जनरल कैटेगरी में शामिल करने की मांग नहीं कर सकता.

यह फैसला पुलिस कांस्टेबल भर्ती से जुड़े एक मामले में आया है. OBC और EWS वर्ग से ताल्लुक रखने वाली तीन महिला उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. उनका कहना था कि उनके कुल अंक जनरल कैटेगरी की कट-ऑफ से ज्यादा हैं, इसलिए उन्हें अनारक्षित यानी जनरल कोटे में चयनित किया जाए.

दरअसल, इन तीनों महिलाओं ने लिखित परीक्षा OBC और EWS श्रेणी के तहत दी थी. लिखित परीक्षा में उनके अंक जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों से कम थे, लेकिन फिजिकल फिटनेस टेस्ट में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया. इसी वजह से उनके कुल अंक जनरल कैटेगरी की कट-ऑफ से ऊपर चले गए. इसके बावजूद फाइनल मेरिट लिस्ट में उनका नाम नहीं आया.

इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मेरिट लिस्ट को चुनौती देते हुए खुद को जनरल कैटेगरी में चयनित करने की मांग की. इस मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में जस्टिस दीपक खोत ने की.

सोमवार को कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए साफ कहा कि यह याचिका बिना किसी ठोस आधार के दायर की गई है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कुल अंकों को इस मामले में आधार नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि अगर याचिकाकर्ताओं ने पहले चरण यानी लिखित परीक्षा में आरक्षण का लाभ नहीं लिया होता, तो वे दूसरे चरण यानी फिजिकल प्रोफिशिएंसी टेस्ट तक पहुंच ही नहीं पातीं.

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण का लाभ एक बार लेने के बाद उम्मीदवार कैटेगरी बदलने की मांग नहीं कर सकता. यह फैसला भविष्य की भर्तियों के लिए भी एक अहम मिसाल माना जा रहा है.

Ramswaroop Mantri

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें