नासिक कुंभ 2027 की तैयारियों के बीच 1800 पेड़ों का काटने का मुद्दा कोर्ट तक पहुंच गया है. तपोवन में साधुग्राम का निर्माण करने के लिए पेड़ काटने के प्रस्ताव पर स्थानीय लोग और पर्यावरणविद् विरोध कर रहे हैं. फिलहाल इस पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है. अब सवाल है कि पेड़ काटने पर क्या कहता है कानून? अलग-अलग राज्यों के नियम क्या हैं? उल्लंघन पर भरपाई और सज़ा का क्या प्रावधान है?
नासिक में 2027 के कुम्भ मेले की तैयारी के नाम पर 1800 पेड़ों की कटाई पर विवाद खड़ा हो गया है. तपोवन में साधुग्राम का निर्माण करने के लिए पेड़ काटने के प्रस्ताव पर स्थानीय लोग और पर्यावरणविद् विरोध कर रहे हैं. फिलहाल बॉम्बे हाई कोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है. भारत में पेड़ों की कटाई सिर्फ़ पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि क़ानूनी और सामाजिक ज़िम्मेदारी से भी जुड़ा विषय है. तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण, सड़क चौड़ीकरण, औद्योगिक विकास और धार्मिक, सांस्कृतिक परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे हैं. हाल के वर्षों में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और न्यायालयों ने कई मामलों में दख़ल देकर पेड़ों की अनियंत्रित कटाई पर रोक भी लगाई है. आइए इसी बहाने जानते हैं पेड़ काटने से जुड़े प्रमुख क़ानून क्या हैं? अलग-अलग राज्यों के नियम क्या हैं? उल्लंघन पर भरपाई और सज़ा का क्या प्रावधान है? .
हाल के समय में पेड़ कटाई को लेकर कई मामले चर्चा में रहे. सड़क चौड़ीकरण, नेशनल हाइवे का एक्सटेंशन, फ्लाईओवर, मेट्रो, रेलवे लाइन डबलिंग के लिए पेड़ों को काटने की परमिशन कोर्ट से मांगी गई है. कुछ पेड़ ऐसे हैं, जिन्हें काटने की सख्त मनाही है. अगर आपने नियमों की अनदेखी की तो आपको जेल तक हो सकती है.





