भोपाल. मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सड़क की गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. नगरीय विकास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सरकार को देशभर में किरकिरी का सामना करना पड़ा है. वीडियो में मंत्री प्रतिमा बागरी सतना जिले की एक सड़क की गुणवत्ता को पैर से कुरेदकर दिखाती नजर आती हैं. यह दृश्य सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण को लेकर तीखा हमला बोला. अब इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया, जब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कैबिनेट बैठक के दौरान मंत्री प्रतिमा बागरी से सख्त नाराज़गी जाहिर की. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर उनके औचक निरीक्षण पर सवाल खड़े किए.मध्य प्रदेश में घटिया सड़क के वायरल वीडियो ने सरकार को मुश्किल में डाल दिया है. नगरीय विकास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के औचक निरीक्षण पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नाराज़ बताए जा रहे हैं. दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि सड़क पहले ही अमानक घोषित हो चुकी थी. मामले ने सरकार की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
यह नाराज़गी केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रशासनिक प्रक्रिया और विभागीय जांच से जुड़ा बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है. न्यूज़ 18 इंडिया के पास मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि जिस सड़क का वीडियो वायरल हुआ, वह पहले ही पीडब्ल्यूडी की जांच में अमानक घोषित हो चुकी थी. इतना ही नहीं, सड़क को दोबारा मानकों के अनुसार बनाने के निर्देश भी जारी किए जा चुके थे. ऐसे में मुख्यमंत्री का यह सवाल अहम हो जाता है कि जब सड़क पहले से अमानक घोषित थी, तो मंत्री वहां औचक निरीक्षण करने क्यों पहुंचीं. इस घटना ने सरकार की आंतरिक समन्वय प्रणाली, मंत्रियों की भूमिका और प्रशासनिक अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कैबिनेट बैठक में क्यों नाराज़ हुए मुख्यमंत्री
मंत्रालय से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रतिमा बागरी से सीधे सवाल किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस सड़क को विभाग पहले ही अमानक घोषित कर चुका था, उस पर इस तरह सार्वजनिक प्रदर्शन की क्या जरूरत थी. सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री का मानना है कि वायरल वीडियो से सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा है और यह संदेश गया कि मध्य प्रदेश में सड़कें बेहद खराब हैं. उन्हाेंने सीधा सवाल पूछा कि आप बिना जानकारी के वहां क्यों गईं?
प्रतिमा बागरी के भाई और बहनोई के गांजा तस्करी के आरोप में पकड़े गए
यह पहला मौका नहीं है जब मंत्री प्रतिमा बागरी विवादों में आई हों. इससे पहले उनके भाई और बहनोई के गांजा तस्करी के आरोप में पकड़े जाने के बाद वह सुर्खियों में रही थीं. उस मामले में भी विपक्ष ने सरकार को घेरा था. अब सड़क विवाद ने एक बार फिर उनके राजनीतिक कद और सरकार के भीतर उनकी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस मामले में उन्होंने आरोपी को अपना भाई मानने से इनकार कर दिया था. उनका कहना था कि राखी बांधने से कोई भाई नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि वे सबको राखी बांधती है ऐसे तो सब उनके भाई हुए. इस मामले में कांग्रेस का कहना था कि आधार कार्ड से सब साफ हो रहा है, मंत्री अपना और अपने भाई का आधार कार्ड सार्वजनिक करें.
कांग्रेस को मिला सरकार पर हमला करने का मौका
इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को जमकर घेरा है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे भ्रष्टाचार और दलित महिला मंत्री के अपमान से जोड़ा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में भ्रष्टाचार को लेकर अंदरूनी खींचतान है और जो मंत्री सच्चाई सामने लाता है, उसे डांट दिया जाता है.
क्या कहता है यह पूरा विवाद
यह मामला केवल एक सड़क या वीडियो तक सीमित नहीं है. यह सरकार की आंतरिक कार्यप्रणाली, जवाबदेही और सार्वजनिक छवि से जुड़ा हुआ है. सवाल यह भी है कि क्या मंत्रियों को विभागीय जानकारी के बिना इस तरह सार्वजनिक निरीक्षण करना चाहिए. साथ ही यह भी कि जब जांच पहले ही हो चुकी थी, तो वीडियो के जरिए संदेश देने की जरूरत क्यों पड़ी.





