भारत ने 2025 को अलविदा कहकर नई उम्मीदों और सपनों के साथ साल 2026 का जोरदार स्वागत किया है. घड़ी की सुई जैसे ही 12 पर पहुंची, कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरा देश जश्न में डूब गया. दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों में इमारतों को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया था. दिल्ली में कड़ाके की ठंड के बावजूद इंडिया गेट और कनॉट प्लेस पर युवाओं का जोश हाई रहा, वहीं मुंबई के मरीन ड्राइव पर हजारों लोगों ने आतिशबाजियों के बीच एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी. मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भी नए साल की पहली सुबह दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं. सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस प्रशासन भी चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद नजर आया.
भारत समेत दुनियाभर में नए साल 2026 का ग्रैंड वेलकम हुआ है. हिंदुस्तान में रात के 12 बजते ही नए साल का जश्न शुरू हो गया. लोगों ने खुलकर इस नए साल का वेलकम किया है. उत्तराखंड समेत मनाली में बड़ी संख्या में नए साल का जश्न मनाने टूरिस्ट पहुंचे हैं. यहां बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा देखा जा सकता है.कर्नाटक के बेंगलुरु के एमजी रोड पर न्यू ईयर मनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हुए.
दुनियाभर में सबसे पहले किरिबाती के किरीटीमाटी द्वीप और न्यूजीलैंड में नए साल का आगाज हुआ. न्यूजीलैंड के चैथम आइलैंड में नए साल का आगाज पर जश्न देखने को मिला.
चीन में नए साल का स्वागत
चीन में भी नए साल का आगाज हो चुका है. काउंटडाउन क्लॉक के कांटे जैसे ही 12 पर आए, पूरे देश में जश्न का मनाने लगे. सिंगापुर में नए साल का जश्न शुरू हो गया है. यहां आतिशबाजियों से नववर्ष का स्वागत किया. लोगों ने सड़कों पर निकलकर नए साल का जश्न मनाया.
साउथ कोरिया और नॉर्थ कोरिया में भी लोग नए साल का जश्न मनाने सड़कों पर निकल आए. यहां रात के 12 बजे सबसे बड़ी घंटी पर न्यू ईयर वेलकम किया गया.
जापान में पारंपरिक अंदाज में नए साल का स्वागत
जापान में नए साल का आगाज देखने को मिला. लोगों ने उत्साहपूर्वक नए साल का स्वागत किया. यहां नए साल का स्वागत घंटियां बजाकर करते हैं. यह एक पारंपरिक तरीका है. यहां 31 दिसंबर को ओमिसाका कहते हैं. यहां बौद्ध परंपरा के अनुसार मंदिरों में घंटियां बजाई जाती है. ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में हॉर्बर ब्रिज पर आतिशबाजी के साथ जश्न मनाया गया.
नया साल कब मनाया जाता है?
जब धरती अपने गोलार्ध का एक पूरा चक्कर काट लेती है, तो उस दिन से ही नया साल मनाया जाता है. 46वीं ईसा पूर्व जूलियस सीजर ने जूलियन कैलेंडर लागू किया था. इस कैलेंडर के तहत साल की लंबाई तय की गई थी. लीप ईयर की व्यवस्था भी लागू की गई. साथ ही 1 जनवरी को न्यूर ईयर का दिवस का घोषित किया गया. इसी के साथ सदियों पहले 1 जनवरी से नया साल मनाने की परंपरा शुरू हुई.





