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*टेलीकॉम कंपनियों पर ग्राहकों को परेशान करने पर चलाया हंटर, लगा 150 करोड़ का जुर्माना*

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दूरसंचार नियामक ट्राई ने स्‍पैम कॉल पर रोक न लगाने को लेकर टेलीकॉम कंपनियों पर 150 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. ट्राई के इस एक्‍शन को कंपनियों ने चुनौती दी है

दूरसंचार नियामक ट्राई ने फर्जी कॉल और संदेशों को रोकने में विफल रहने के कारण दूरसंचार कंपनियों पर 150 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. साल 2020 से शुरू होने वाले तीन वर्षों के लिए लगाए गए इस जुर्माने को दूरसंचार ऑपरेटर्स ने चुनौती दी थी. सूत्र ने बताया कि ग्राहकों की शिकायतों को गलत तरीके से बंद करने और फर्जी कॉल करने वाले दूरसंचार कनेक्शनों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई नहीं करने के लिए दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर 150 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय जुर्माना लगाया गया है.

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) उन दूरसंचार परिचालकों पर जुर्माना लगाता है, जो वित्तीय दंड से जुड़े नियमों का पालन करने में विफल रहते हैं. ये नियम एक दूरसंचार परिचालक के लिए प्रत्येक लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र में प्रति माह 50 लाख रुपये तक के वित्तीय दंड का प्रावधान करते हैं. गौरतलब है कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं पर वित्तीय दंड इसलिए नहीं लगाया जाता है कि किसी ने उनके नेटवर्क के माध्यम से स्पैम भेजा है, बल्कि इसलिए लगाया जाता है क्योंकि वे नियमों के अनुसार स्पैमर्स के खिलाफ उचित कार्रवाई करने में विफल रहते हैं.

21 लाख स्‍पैमर्स के कनेक्‍शन काटे
सूत्र के अनुसार, स्पैम को नियंत्रित करने के लिए उपभोक्ता शिकायतों पर कार्रवाई करना महत्वपूर्ण है. इसमें ट्राई ने पाया कि कई मामलों में सेवा प्रदाताओं ने ग्राहकों की शिकायतों को गलत तरीके से बंद कर दिया. ट्राई ने पिछले एक साल में 21 लाख से अधिक ‘स्पैमर्स’ के कनेक्शन काट दिए हैं और एक लाख से अधिक संस्थाओं को काली सूची में डाल दिया है. नियामक ने एक डीएनडी ऐप पेश किया है, जो उपयोगकर्ताओं को केवल 4-6 क्लिक में शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है. जहां पंजीकृत दूरसंचार विपणनकर्ता सख्त नियमों के अधीन हैं, वहीं अब ज्यादातर स्पैम 10 अंकों के मोबाइल नंबरों से अपंजीकृत व्यक्ति भेजते हैं.

स्‍पैम से कैसे होता है नुकसान
स्‍पैम कॉल ज्‍यादातर ग्राहकों के साथ फर्जीवाड़े के लिए इस्‍तेमाल की जाती है. इसमें फेक केवाईसी अपडेट, लॉटरी जीतने, लोन ऑफर, बैंक अलर्ट के नाम पर ओटीपी, बैंक डिटेल्‍स, यूपीआई पिन आदि पर निगाह रहती है. स्‍पैमर्स इन सभी तरीकों से ग्राहकों के पैसे चोरी करने की कोशिश करते हैं. साल 2025 में पहले 5 महीनों में स्‍पैम के जरिये 7 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है. अनुमान है कि 2025 में पूरे साल के दौरान करीब 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. अगर साइबर फ्रॉड के सारे आंकड़े देखें तो अभी तक लाखों करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है.

निजी जानकारी पर हमला
स्‍पैमर्स न सिर्फ कॉल के जरिये आपके पैसे चुराते हैं, बल्कि पर्सनल जानकारियां भी चुरा लेते हैं. इन पर्सनल इन्‍फो में नंबर, लोकेशन, बैंक की डिटेल आदि चुराते हैं. डाटा लीक होने पर आपके साथ धोखाधड़ी होने का खतरा और बढ़ जाता है. स्‍पैम कॉल सिर्फ डिटेल और धोखाधड़ी के लिए ही नहीं आती है, बल्कि बार-बार कॉल आने से मानसिक तनाव भी बढ़ता है. आलम ये है कि देश के 60 फीसदी से भी ज्‍यादा मोबाइल यूजर्स स्‍पैम कॉल की वजह से परेशान रहते हैं. इससे धोखाधड़ी का जोखिम तो बढ़ता ही है, सुरक्षा का जोखिम भी पैदा होता है. ट्राई ने इस पर खूब सख्‍ती की है, लेकिन आज भी देश में स्‍पैम का जोखिम दुनिया के अन्‍य देशों के मुकाबले बढ़ा हुआ है.

Ramswaroop Mantri

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