हाईकोर्ट बोला- पीने का पानी ही सुरक्षित नहीं.. ये बेहद गंभीर स्थिति, शहर की छवि को नुकसान
इंदौर में दूषित पानी से 17 लोगों की मौत के मामले में कांग्रेस नेताओं ने आज भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा और पूरे क्षेत्र में बेरिकेडिंग कर दी गई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।भागीरथपुरा में दूषित पानी से 17 मौतों के मामले में कांग्रेस नेताओं ने पीड़ितों से मुलाकात की। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। जीतू पटवारी ने इसे हत्या बताते हुए एक करोड़ मुआवजे की मांग की।
कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवारों के घर-घर जाकर उनसे मुलाकात कर रहा है। इस दल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, अमित पटेल, रीना बौरासी सेठिया, चिंटू चौकसे और विपिन वानखेड़े शामिल हैं।पत्रकारों से बातचीत में जीतू पटवारी ने कहा कि यह महज हादसा नहीं, बल्कि हत्याएं हैं। उन्होंने मांग की कि प्रत्येक पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। पटवारी ने आरोप लगाया कि अब तक की गई कार्रवाई सिर्फ लीपापोती है।
भागीरथपुरा में जहरीले पानी से मौतें और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने के बाद प्रभावित इलाके में गतिविधियां तेज हैं. भागीरथपुरा में हाल ही में कांग्रेस के सज्जन वर्मा के नेतृत्व में पहुंचे कांग्रेसियों और बीजेपी कार्यकर्ताओं की तीखी झड़प हुई थी. ऐसे में जब मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पहुंचे तो भारी पुलिस फोर्स तैनात किया गया. जगह-जगह बैरीकेडिंग की गई. दोनों नेताओं ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की.
पीड़ितों को राहत के नाम पर लीपापोती का आरोप
भागीरथपुरा राजनीति का केंद्र बन चुका है. मंगलवार को कांग्रेस के उमंग सिंघर और जीतू पटवारी के साथ कई कांग्रेसी भागीरथपुरा पहुंचे. कांग्रेस नेताओं ने मृतकों के परिजनों से चर्चा की. इस दौरान जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर पीड़ितों के साथ राहत के नाम पर लीपापोती करने के आरोप लगाते हुए प्रति पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की.
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल पहुंचा भागीरथपुरा
जीतू पटवारी ने इंदौर जिला प्रशासन और राज्य शासन से पीड़ितों से मिलने का समय मांगा था. मंगलवार को निर्धारित समय के अनुसार नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, उषा नायडू, जीतू पटवारी के अलावा अमित पटेल, सचिन यादव, रीना बोरासी, चिंटू चौकसे, विपिन वानखेड़े, शोभा ओझा समेत कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल में शामिल लोग भारी पुलिस बल की मौजूदगी में भागीरथपुरा पहुंचे, जहां उन्होंने पीड़ित परिजनों से चर्चा की.
उमंग सिंघार ने पूछे सरकार से सवाल
उमंग सिंगार ने आरोप लगाते हुए कहा “राज्य सरकार ने प्रशासनिक रूप से अस्पताल में भी पुलिस लगा रखी है. यह बात समझ से परे है कि इस मामले में सरकार को इतना डर क्यों है, उन्होंने सवाल उठाया की क्या यह सरकार की असंवेदनशीलता है या फिर नाकामी है, क्योंकि जिस तरीके से घटना घटी है. उसमें सरकार ने पूरी तरह असंवेदनशीलता का परिचय दिया. उन्होंने कहा मैं सरकार में शामिल लोगों से पूछना चाहता हूं कि आपके यहां भी भागीरथपुरा से पानी पहुंचता है, जिस पर संज्ञान लेने की जरूरत है, क्योंकि सबको यही प्रयास करना चाहिए कि इंदौर स्वच्छ कैसे बने.
विपक्ष की आवाज को दबा रही है सरकार
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने आरोप लगाते हुए कहा “पंचायत की बैठक में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं लेकिन भागीरथपुरा में लोगों की मौत की कीमत सरकार ने महज दो लाख तय कर रखी है. कांग्रेस इसका विरोध कर रही है तो विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है.” जब कांग्रस प्रतिनिधिमंडल पीड़ितों से मिल रहा था, उस समय लोगों ने नगर निगम प्रशासन के प्रति रोष प्रकट किया. लोगों का कहना है कि दो साल से दूषित पानी की शिकायत की जा रही है. लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.
इंदौर अब दूषित पानी के कारण देश में चर्चित’
इधर, मामले की सुनवाई मंगलवार (6 जनवरी) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस घटना से इंदौर शहर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा है। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर अब दूषित पेयजल के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।
पूरे इंदौर के पानी की गुणवत्ता पर सवाल- कोर्ट
कोर्ट ने कहा, यदि पीने का पानी ही सुरक्षित नहीं है, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। यह समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर के जल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को सुनना जरूरी बताया है।
मुख्य सचिव को उपस्थित होने के निर्देश
हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई में राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन वर्चुअली उपस्थित हों। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को तय की गई है।
गौरतलब है कि दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। वर्तमान में 110 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। कुल 421 मरीज अब तक अस्पताल में भर्ती किए गए, जिनमें से 311 को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। 15 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में भर्ती हैं। वहीं, उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर किया गया है।
याचिकाकर्ता ने कहा- सप्लाई हो रहा पानी दूषित
पिछली सुनवाई पर 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम इंदौर को निर्देश दिया था कि नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इस पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी है कि प्रभावित क्षेत्र में अब भी जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह दूषित है, न कि स्वच्छ और पीने योग्य।
पहले ही शिकायतें सुन लेते तो ये नौबत नहीं आती
अन्य याचिकाकर्ताओं में यह मुद्दा भी उठाया कि इस घटना से पहले ही स्थानीय निवासियों की ओर से कई शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रशासन ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया। अगर समय रहते इन शिकायतों पर संज्ञान लिया गया होता और उचित रोकथाम के कदम उठाए गए होते तो यह घटना ही नहीं होती।
3 साल पहले मेयर के प्रस्ताव पर नहीं मिला फंड

सीनियर काउंसिल ने यह भी कोर्ट को बताया कि 2022 में मेयर द्वारा पीने के पानी की आपूर्ति के लिए नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन फंड जारी न होने के कारण यह काम अब तक नहीं हो पाया।
प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट पर नहीं लिया एक्शन
पिटीसनर्स की ओर से यह भी दलील दी गई कि साल 2017-18 में इंदौर के अलग-अलग इलाकों से पानी के 60 सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 59 सैंपल पीने योग्य नहीं पाए गए। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पिटीशनर्स ने यह भी तर्क दिया कि इस मामले में संबंधित अफसर केवल नागरिक (सिविल) जिम्मेदारी के ही नहीं, बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी के भी दोषी हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस पूरे मामले की जांच के लिए हाईलेवर कमेटी बनाने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने कहा- सरकार एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करे
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में अपना जवाब दाखिल करें और एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है।
हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी मुद्दों को 7 कैटेगरी में बांटा है…
प्रभावित लोगों के लिए तत्काल और आपात निर्देश।
रोकथाम और सुधारात्मक उपाय।
जिम्मेदारी तय करना।
अनुशासनात्मक कार्रवाई।
मुआवजा।
स्थानीय निकायों को निर्देश।
जन-जागरूकता और पारदर्शिता।
इन अफसरों पर हुई कार्रवाई
दिलीप यादव, निगम आयुक्त को हटाया।
जिम्मेदारी- गंदे पानी की शिकायतों को अनदेखा किया। पाइपलाइन की टेंडर प्रक्रिया पर नजर नहीं रखी।
रोहित सिसोनिया, अपर आयुक्त-सस्पेंड
जिम्मेदारी- अगस्त में टेंडर हुए थे, उन्हें रोक कर रखा। शिकायतों की अनदेखी की।
संजीव श्रीवास्तव, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री-सस्पेंड
जिम्मेदारी- गंदे पानी की लोगों की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की।
शुभम श्रीवास्तव, उपयंत्री (जोन-4) -सस्पेंड
जिम्मेदारी- दूषित जल का निराकरण करना था, लेकिन नहीं किया।
योगेश जोशी, सहायक यंत्री-सस्पेंड
जिम्मेदारी – हेल्पलाइन पर आने वाली जल शिकायतों के अनुसार लीकेज की मरम्मत समय पर नहीं की।
शालिग्राम शितोले: जोनल अधिकारी- (जोन-4)-सस्पेंड
साफ-सफाई से लेकर लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध करान की जिम्मेदारी।





