धार की भोजशाला में हर बार बसंत पंचमी पर बड़ा उत्सव महाराजा भोज स्मृति बसंतोत्सव समिति द्वारा मनाया जाता है। सरकारी आदेश के अनुसार हर शुक्रवार को मुस्लिम समाज को वहां नमाज पढ़ने की अनुमति भी दी गई है और हिन्दू समाज को भी हर मंगलवार और बसंत पंचमी पर दिनभर पूजा की अनुमति दी गई है। इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को आ रही है। तब विवाद की स्थिति न हो, इसके लिए धार प्रशासन ने रणनीति बनाना शुरू कर दी है। इस वर्ष बसंत पंचमी और शुक्रवार का संयोग होने के कारण धार में प्रशासन और उत्सव समिति के बीच हलचल तेज हो गई है। बसंतोत्सव समिति ने 7 अप्रैल 2003 के आदेश का हवाला देते हुए इस विशेष दिन पर हिंदुओं को निर्बाध पूजा का अधिकार देने की मांग की है।
उधर बसंत उत्सव समिति के अध्यक्ष सुरेशचंद्र जलोदिया ने कहा कि हिन्दू समाज बसंत पंचमी के अवसर पर हर साल मां सरस्वती का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाता आ रहा है। जब भी यह पर्व शुक्रवार को आता है तो मुस्लिम समाज भी वहां नमाज पढ़ने आ जाता है। इससे विवाद की स्थिति निर्मित होती है।
पूजा के लिए वर्ष 2003 के आदेश का उल्लंघन किया जाता है। इस कारण पहले समिति की पूजा खंडित हो चुकी है। पदाधिकारियों ने कहा कि इस बार इस तरह की स्थिति निर्मित नहीं होनी चाहिए। मंदिर भोजशाला परिसर में प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा 7 अप्रैल 2003 को दिए गए आदेशानुसार पूरे वर्ष प्रति मंगलवार और बसंत पंचमी को दिन भर पूजा अर्चना का अधिकार हिन्दुओं को प्रदान किया है। प्रशासन उसकी व्यवस्था करे। जलोदिया ने बताया कि 23 जनवरी को सुबह दस बजे भोजशाला में यज्ञ शुरू होगा। इसके अलावा लालबाग से शोभायात्रा निकाली जाएगी। दोपहर में भोजशाला में ही धर्मसभा होगी, जिसे विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार संबोधित करेंगे। दोपहर एक बजे महाआरती होगी।





