*बीज विधेयक 2025, विद्युत विधेयक 2025, VB-GRAMG अधिनियम 2025, चार श्रम संहिताओं को रद्द कराने तथा MSP@C2+50% (गारंटीकृत खरीद सहित) का कानून और व्यापक कर्ज माफी की मांग को लेकर होगा प्रदर्शन*
संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा आज प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई। भारतीय किसान यूनियन उग्रहां के अध्यक्ष जोगेंदरसिंह उग्रहां, किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ सुनीलम, अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर सभा के अध्यक्ष सत्यवान, कीर्ति किसान यूनियन के अध्यक्ष रविंदर पटियाला, अ भा कि सभा के वित्त सचिव कृष्ण प्रसाद सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ सुनीलम ने कहा कि केंद्र सरकार ने कॉर्पोरेट को सस्ते मजदूर उपलब्ध कराने के लिए किसानों और मजदूरों पर हमला बोला है।
इसी उद्देश्य से बीज विधेयक, बिजली सुधार विधेयक लाकर तथा मजदूरों पर चार लेबर कोड थोपकर एवं मनरेगा योजना समाप्त करने का निर्णय किया है। बीज विधेयक के चलते हजारों साल से बीजों पर किसानों का जो अधिकार था वह समाप्त हो जाएगा। कंपनियां मुंह मांगे दामों पर बांझ बीज किसानों को बेचेगी, जिसका दोबारा इस्तेमाल नहीं हो सकेगा।
बिजली सुधार विधेयक के माध्यम से बिजली सब्सिडी समाप्त हो जाएगी। मंहगी बिजली खरीदने को मजबूर करने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। दोनों विधेयक लागू होने से खेती और अधिक महंगी हो जाएगी जिससे किसानों की आत्महत्याएं बढ़ेगी। मांग आधारित मनरेगा योजना समाप्त कर केंद्र सरकार 90 प्रतिशत की जगह 60 प्रतिशत राज्य सरकार को देगी। केंद्र सरकार के पास ही पंचायत चयन का अधिकार होगा।
डॉ सुनीलम ने कहा कि सरकार ने महात्मा गांधी का नाम खत्म करने के साथ-साथ मनरेगा मजदूरों विशेषकर महिलाओं की संगठित ताकत को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया है।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि तानाशाही और जन-विरोधी एनडीए सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को बुलडोज़ कर उसे समाप्त करते हुए उसकी जगह ‘विकसित भारत गारंटी ऑफ रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम’ लागू कर दिया है। साथ ही 100% एफडीआई की अनुमति देने वाला बीमा विधेयक 2025 पारित किया गया है तथा ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) विधेयक 2025’ के माध्यम से भारतीय कॉरपोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हितों में बड़े पैमाने पर निजी और विदेशी भागीदारी को मंजूरी दी गई है।
ये हमले पहले से लागू जन-विरोधी कदमों की ही निरंतरता हैं—अमेरिकी दबाव में मुक्त व्यापार समझौते, बीज विधेयक, विद्युत विधेयक और चार श्रम संहिताएँ। इन प्रत्येक कदमों ने मेहनतकश जनता के विशाल हिस्से को एनडीए सरकार से और अधिक विमुख किया है।
मज़दूर-ग्रामीण मज़दूर-किसान एकता ही मेहनतकश जनता पर तेज़ होते शासक वर्ग के इन हमलों से लड़ने और उन्हें परास्त करने का हथियार है। इसी संदर्भ में, संयुक्त किसान मोर्चा की राष्ट्रीय समन्वय समिति ने 16 जनवरी 2026 को ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। SKM किसानों और ग्रामीण मज़दूरों से अपील करता है कि वे गाँवों में महापंचायतें आयोजित करें और नया साल संकल्प लें कि बीज विधेयक 2025, विद्युत विधेयक 2025, VB-GRAMG अधिनियम 2025 और चार श्रम संहिताओं को रद्द कराने तथा सभी फसलों के लिए MSP@C2+50% (गारंटीकृत खरीद सहित) का कानून और व्यापक कर्ज माफी लागू होने तक—जो किसान आत्महत्याओं और ग्रामीण-शहरी पलायन को समाप्त करने के लिए आवश्यक है—संघर्ष तेज करेंगे।
SKM की राज्य समन्वय समितियाँ (SCCs) 30 दिसंबर 2025 से पहले बैठकें करेंगी। इसके बाद जिला समन्वय समितियाँ बैठेंगी और 9–15 जनवरी 2026 के दौरान गाँव-गाँव पदयात्रा, साइकिल रैलियाँ और घर-घर संपर्क जैसे अभियानों की योजना बनाएँगी, ताकि एनडीए सरकार की जन-विरोधी और संघ-विरोधी नीतियों को जनता के सामने उजागर किया जा सके।
SKM की राष्ट्रीय परिषद (जनरल बॉडी) की बैठक 11 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होगी। SKM, चार श्रम संहिताओं को थोपे जाने के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा आहूत अखिल भारतीय आम हड़ताल के आह्वान का बिना शर्त समर्थन करता है। साथ ही कृषि मज़दूरों—NREGA संघर्ष मोर्चा (NSM)—द्वारा MGNREGA को बहाल करने, इसे 200 दिनों के काम, ₹700 दैनिक मज़दूरी और कृषि एवं सहायक क्षेत्रों से जोड़ने की मांग के संघर्ष का भी समर्थन करता है।
SKM राज्यों के संघीय अधिकारों की रक्षा और उन्हें मज़बूत करने, GST अधिनियम में संशोधन कर राज्यों की कराधान शक्तियाँ बहाल करने, तथा सेस और सरचार्ज सहित विभाज्य पूल में राज्यों की हिस्सेदारी को वर्तमान 31% से बढ़ाकर 60% करने की मांग करता है, ताकि राज्य अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो, कृषि संकट और बेरोज़गारी का समाधान आधुनिक कृषि और व्यापक औद्योगिकीकरण के माध्यम से किया जा सके।
SKM, एनडीए की ‘डबल इंजन’ सरकारों के तहत लागू तानाशाही पुलिस नीतियों का भी प्रतिरोध करेगा—जहाँ दंडात्मक कानूनों और पुलिस प्रशासन का दुरुपयोग कर किसान कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे थोपे जा रहे हैं, उन्हें जेल भेजने के लिए रिमांड पर रखा जा रहा है, लोकतांत्रिक विरोध को रोका जा रहा है और अवैध जुर्माने व दंड लगाकर कार्यकर्ताओं को डराया-धमकाया जा रहा है।
जारीकर्ता
एड शिवसिंह
राष्ट्रीय प्रवक्ता, किसान संघर्ष समिति
98932 29788





