1,000 लीटर पानी के लिए 21 रुपये चुका रहे हैं लोग
इंदौर: देश का सबसे स्वच्छ शहर, जो ‘वाटर प्लस’ टैग और तेजी से विकास के लिए जाना जाता है, इस समय दोहरी समस्या से जूझ रहा है। यहां देश में सबसे महंगे पानी के दाम हैं और साथ ही पानी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं। लोग 1,000 लीटर पानी के लिए 21 रुपये चुका रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे ‘जहरीला’ बता रहे हैं।
भौगोलिक स्थिति के कारण ऐसी स्थिति
इस महंगे पानी का मुख्य कारण इंदौर की भौगोलिक स्थिति है। शहर को पानी नर्मदा नदी से मिलता है, जो 70 किलोमीटर दूर है। इस पानी को 500 मीटर ऊंचाई तक पंप करने में हर महीने बिजली पर 25 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि इसी वजह से इंदौर का पानी देश में सबसे महंगा है और इसका बोझ सीधे नागरिकों पर पड़ता है।
क्या है ‘वाटर प्लस’ टैग का मतलब
साल 2021 में इंदौर ‘वाटर प्लस’ सर्टिफिकेशन पाने वाला भारत का पहला शहर बना था। इसका मतलब था कि सारा घरेलू और औद्योगिक गंदा पानी साफ करके ही बाहर छोड़ा जाता है। शहर में 402 MLD की कुल STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) क्षमता है और 320 MLD कचरा रोज आता है। लेकिन, विशेषज्ञ इस सर्टिफिकेशन की सच्चाई पर सवाल उठा रहे हैं।
भविष्य के लिए बन रहीं योजनाएं
आलोचकों का कहना है कि यह सर्टिफिकेशन सिर्फ सर्वे के समय STPs को पूरी क्षमता से चलाकर हासिल किया गया था। असलियत में, दशकों पुरानी पाइपलाइनें सीवेज लाइनों के बगल से गुजरती हैं, जिससे पानी दूषित हो जाता है। इस बिजली के भारी खर्च से निपटने के लिए, इंदौर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (IMC) जलूद में 60 MW का सोलर पार्क बना रहा है। यह प्रोजेक्ट भारत के पहले म्युनिसिपल ‘ग्रीन बॉन्ड’ से फंड किया गया है, जिससे 244 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। उम्मीद है कि मार्च 2026 से यह प्लांट हर महीने 5 करोड़ रुपये बचाएगा, लेकिन अभी पैसों की तंगी बनी हुई है।





