-सुसंस्कृति परिहार
असम राज्य में जबसे भाजपा हेमंत विसवा सर्मा सरकार बनी है तब से सतत यहां मस्जिद मंदिर तोड़कर कर देंगे भड़काए जाते रहे हैं। सन् 2021और 24 में हुए दंगों के ज़ख़्म अभी भरे नहीं थे कि पिछले दिनों फिर दंगा चंदा विवाद को लेकर ऐसा भड़का कि पूरी बस्ती तबाह हो गई।
जानकारी के मुताबिक त्रिपुरा के उनाकोटी ज़िले के कुमारघाट उपमंडल में शुक्रवार को सांप्रदायिक हिंसा के बाद प्रशासन ने निषेधाज्ञा लगा दी। फटिकरॉय थाना क्षेत्र के सायदरपाड़ा-शिमुलतला इलाके में एक मस्जिद और मुस्लिम समुदाय के कई घर-दुकानों में आग लगा दी गई। पुलिस के अनुसार, भैरब मेला से पहले पूजा चंदा वसूली को लेकर विवाद हुआ। एक स्थानीय मुस्लिम व्यक्ति द्वारा चंदा देने से इनकार करने पर कहासुनी बढ़ी और हिंसा भड़क गई। भीड़ ने सड़कें जाम कीं, वाहनों में तोड़फोड़ की और दुकानों व घरों को आग के हवाले कर दिया। कई लोग घायल हुए।
स्थिति को काबू में रखने के लिए धारा 163 लागू की गई, 5 से अधिक लोगों के जुटने पर रोक लगी और 48 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद किया गया। पुलिस ने अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। अतिरिक्त बल तैनात है, ड्रोन से निगरानी हो रही है। प्रशासन ने शांति बनाए रखने और अफवाह न फैलाने की अपील की है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सैदरपार गांव में लोगों के एक समूह ने लकड़ी से लदे वाहन को रोककर मेले के लिए चंदा मांगा। इसी बात पर दो समुदायों के बीच बहस शुरू हुई, जो तेजी से झड़समुदाय ने चंदा देने से इनकार किया, जिसके बाद दूसरे समुदाय की भीड़ ने जवाबी कार्रवाई की। लकड़ी की दुकानों और एक पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाया गया।
संवेदनशील इलाकों में अर्धसैनिक बलों द्वारा पैदल गश्त की जा रही है। पुलिस अधीक्षक अविनाश कुमार राय राय ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है और इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं। राय के मुताबिक, झड़पों में चार पुलिसकर्मी और छह नागरिक घायल हुए।
इस बीच, कांग्रेस विधायक दल के नेता बिराजित सिन्हा ने आरोप लगाया कि उन्हें हिंसा प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने से रोका गया। विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने सरकार पर अल्पसंख्यक समुदाय की जान-माल की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया। वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीब भट्टाचार्जी ने हिंसा की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस की सराहना की।
वास्तविक स्थिति क्या है और क्यों इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति हो रही है।इसके मूल संघी भाजपा सरकार है जो मुस्लिम विरोधी है। उन्हें घुसपैठिए मानती है। इसलिए उनकी बर्बादी को संघीय संगठनों को प्रशय देती है।
त्रिपुरा की जनसंख्या में हिंदू धर्म का हिस्सा 83.40% है। त्रिपुरा राज्य के 4 में से 4 जिलों में हिंदू बहुसंख्यक धर्म हैं। 2025 और 2026 के आंकड़े प्रक्रियाधीन हैं और कुछ हफ्तों में अपडेट कर दिए जाएंगे। त्रिपुरा की कुल जनसंख्या 36.74 लाख में से मुस्लिम जनसंख्या 3.16 लाख (8.60 प्रतिशत) है। यहां इन लोगों को बेहद परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है।
पिछले दिनों जब उत्तराखंड के देहरादून में ऐंजल चकमा के साथ भाजपा सरकार के गढ़ में हमला किया गया तब भी यहां के लोग उत्तेजित नहीं हो पाए थे। उनके आंदोलन को कुचला गया। पूर्वोत्तर के लोगों को इसे समझना चाहिए।
,आज मकर संक्रांति के शुभ दिन पर नितिन गडकरी ने एक और आदेश सुना दिया है कि हिंदुओं की ज़मीन कोई मुसलमान नहीं खरीद सकता है बताया जा रहा है यह आदेश त्वरित गति से असम सरकार ने लागू भी कर दिया है।
अल्पसंख्यकों के अधिकारों का दमन हर तरह से हो रहा है बुलडोजर नहीं तो आग है जो सब नाश कर देती है।इस बस्ती के जो फुटेज सामने आए हैं वह हृदय विदारक हैं।
देश में नफ़रत की फसल फल-फूल रही है इसकी वजह संघ और भाजपा नेताओं की भेंट स्पीच और दोषियों पर उचित कार्रवाई ना होना है।यदि ऐसा ही चलता रहा तो यह महामारी का रुप धारण कर सकती है।नफ़रत की जगह मोहब्बत का पैगाम ही इससे बचा सकता है। हिंदू मुस्लिम अलग नहीं इस देश की आज़ादी में उनका अवदान याद रखना होगा। देश की मज़बूरी के लिए उनका अवदान बराबर जारी है।गांधी का यह भजन ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान। इस भावना का विस्तार होना चाहिए। नफरती चिंटुओं से दूर रहें देशवासी।यह संक्रांति काल ख़त्म हो जाएगा।





