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प्रत्यूष सुरेका को ED ने दबोचा…25 बैंकों से ₹2,672 करोड़ की धोखाधड़ी, फिर थाईलैंड भागने की कोशिश

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कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को हजारों करोड़ रुपये के हेरफेर के आरोप में एक व्यवसायी को गिरफ्तार किया है. कोलकाता के रहने वाले प्रत्यूष कुमार सुरेका को पीएमएलए (PMLA), 2002 के तहत ईडी ने गिरफ्तार किया है. 40 साल के कुमार के खिलाफ मेसर्स श्री गणेश ज्वेलरी हाउस (I) लिमिटेड के बैंक फ्रॉड केस में गिरफ्तार किया है. ईडी ने उनको कोलकता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी को चकमा देते हुए सुरेका थाईलैंड भागने के फिराक में थे.कोलकाता में ईडी ने 2 हजार करोड़ से अधिक फ्रॉड मामले में प्रत्युष सुरेका को गिरफ्तार किया. 2016 में पैसों के हेरफेर का मामला दर्ज हुआ था. तब से जांच चल रही थी. सबूत मिटाने के लिए सुरेका कोलकाता से थाईलैंड भागने के फिराख में थे. हालांकि, लुकआउट सर्कुलर जारी होने की वजह से उनको कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया.

ईडी के अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई, बैंक फ्रॉड, कोलकाता द्वारा मेसर्स श्री गणेश ज्वेलरी हाउस (I) लिमिटेड (SGJHIL) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराया गया था. इसमें इसके प्रमोटर्स के खिलाफ 25 बैंकों के ग्रुप से ₹2,672 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप था. इसी आधार पर ईडी ने अपनी जांच शुरू की और सुरेका के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया.

क्या मिला जांच में

ईडी की जांच में सामने आया कि 2011-12 में SGJHIL ने ज्वेलरी बिजनेस के लिए लोन ली गई. इस राशि को सोलर पावर प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट कर दिया. यह काम M/s एलेक्स एस्ट्रल पावर प्राइवेट लिमिटेड के जरिए किया गया. सुरेका को 24 अप्रैल 2012 को इस कंपनी का जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया. लगभग 400 करोड़ रुपये (120 करोड़ इक्विटी + 280 करोड़ बैंक फाइनेंस) का सोलर प्लांट गुजरात उर्जा विकास निगम लिमिटेड के साथ लॉन्ग-टर्म PPA पर था. लेकिन, इसे मात्र 20 करोड़ रुपये में फर्जी निवेश समझौते के जरिए सुरेका के कंट्रोल वाली कंपनियों को ट्रांसफर कर दिया गया.

फर्जी बिक्री के बाद भी होती रही कमाई

ईडी के जांच में पता चला कि सुरेका के पास बहुत कम नेटवर्थ था, लेकिन सैकड़ों करोड़ की संपत्ति सर्कुलर ट्रांजेक्शन, एंट्री ऑपरेटर्स और फर्जी दस्तावेजों के जरिए ट्रांसफर कराए. लेन-देन के सबूतों से पता चला कि फर्जी बिक्री के बाद भी SGJHIL के प्रमोटर नीलेश पारेख को सोलर एसेट्स से बने कैश मिलते रहे. सुरेका ने बोर्ड रेजोल्यूशन फर्जी बनाए, बैकडेटेड एग्रीमेंट किए, डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग किया और डमी डायरेक्टर नियुक्त किए. एलेक्स एस्ट्रल और ग्रुप कंपनियों के फंड्स को शैम लोन, फर्जी खर्चों और सर्कुलर ट्रांजेक्शन के जरिए सुरेका और उनके परिवार की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया.

थाईलैंड भागने की कोशिश

सुरेका ने जांच में कई बार सहयोग नहीं किया. सबूत नष्ट करने, गवाहों को डराने और भागने की कोशिश की. 5 जनवरी को कोलकाता एयरपोर्ट से उन्हें थाईलैंड जाने से रोका गया. ईडी ने कहा कि सुरेका फ्लाइट रिस्क, सबूत नष्ट करने और प्रॉसीड्स ऑफ क्राइम के डिसिपेशन का खतरा पैदा कर रहे थे. इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया. यह मामला CBI की 2016 की FIR से शुरू हुआ था, जिसमें SGJHIL और उसके प्रमोटरों पर 25 बैंकों को 2,672 करोड़ रुपये का चूना लगाने का आरोप है.

Ramswaroop Mantri

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