भारत ने बांग्लादेश में खराब होती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है. भारत सरकार ने वहां तैनात भारतीय राजनयिकों के परिवारों को वापस बुलाने का फैसला किया है. हालांकि सरकार ने साफ कहा है कि इससे बांग्लादेश में काम कर रहे भारतीय राजनयिकों की संख्या पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग और अन्य सहायक उच्चायोग पहले की तरह काम करते रहेंगे.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब बांग्लादेश में कुछ ही हफ्तों बाद संसदीय चुनाव होने वाले हैं. ये चुनाव अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद पहली बार हो रहे हैं. शेख हसीना की सरकार छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से बाहर हुई थी. इसके बाद से ही देश में राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं.
जयसिंह रावतबांग्लादेशी उच्चायुक्त तलब हुए थे
पिछले महीने भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह को तलब किया था. भारत ने उन्हें देश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था. यह विरोध उस समय दर्ज किया गया, जब ढाका में भारतीय उच्चायोग के आसपास विरोध प्रदर्शन हुए थे. इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और गहरा गया.
बांग्लादेश में हालात बिगड़ने की वजह?
बांग्लादेश में हालात तब और बिगड़ गए, जब छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस घटना की जांच की मांग को लेकर देशभर में प्रदर्शन हुए. बाद में इन प्रदर्शनों में भारत विरोधी बातें सामने आने लगीं. कुछ छात्र नेताओं ने बिना किसी सबूत के इस हमले में भारत का नाम जोड़ा.
इन आरोपों पर भारत के विदेश मंत्रालय ने सख्त प्रतिक्रिया दी. मंत्रालय ने कहा कि कुछ चरमपंथी तत्व जानबूझकर झूठी कहानी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने न तो इस मामले की पूरी जांच की है और न ही भारत के साथ कोई ठोस सबूत साझा किए हैं.
अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े
इस बीच बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के मामले भी तेजी से बढ़े हैं. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ 645 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं. ये आंकड़े जनवरी से दिसंबर 2025 तक के पुलिस रिकॉर्ड, एफआईआर, जनरल डायरी, चार्जशीट और जांच रिपोर्ट के आधार पर तैयार किए गए हैं.





