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माइनिंग कंपनी वेदांता ने कर दिया कमाल, 3 महीने में छाप दिए 5,710 करोड़

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अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता ने अपना तिमाही रिजल्ट घोषित कर दिया है, जिसमें कंपनी ने शानदार कमाई दिखाई है. माइनिंग कंपनी वेदांता ने गुरुवार को तीसरी तिमाही में मुनाफे में 61% की सालाना (YoY) बढ़ोतरी के साथ 5,710 करोड़ रुपये का मजबूत प्रॉफिट दर्ज किया. कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 37% बढ़कर 23,369 करोड़ रुपये हो गया, जिसका मुख्य कारण LME की ऊंची कीमतें, बेहतर सेल्स वॉल्यूम, मजबूत प्रीमियम और फॉरेक्स गेन रहे.

वेदांता ने दिसंबर तिमाही में मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस दिखाई. ज्यादातर बिजनेस सेगमेंट में मेटल की ऊंची कीमतों, बेहतर प्रीमियम, लागत में कंट्रोल और बेहतर प्रोडक्शन वॉल्यूम की वजह से प्रॉफिटेबिलिटी में इजाफा हुआ. कंपनी ने बताया कि EBITDA सालाना आधार पर 34% और तिमाही आधार पर 31% बढ़कर 15,171 करोड़ रुपये हो गया, जो अब तक का सबसे ज्यादा तिमाही EBITDA है. EBITDA मार्जिन बढ़कर 41% हो गया, जो सालाना आधार पर 629 बेसिस पॉइंट और तिमाही आधार पर 512 बेसिस पॉइंट ज्यादा है. यह कंपनी का अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा मार्जिन है.

कंपनी का ऑपरेशनल प्रदर्शन

ऑपरेशनल परफॉर्मेंस बेहतर होने से कैपिटल एफिशिएंसी में भी सुधार हुआ. कैपिटल एम्प्लॉयड पर रिटर्न (ROCE) 27% रहा, जो एक साल पहले की तुलना में 296 बेसिस पॉइंट ज्यादा है. यह ज्यादा कमाई और डिसिप्लिन्ड कैपिटल यूज को दिखाता है. नेट कर्ज घटकर 60,624 करोड़ रुपये हो गया, जिससे नेट डेट-टू-EBITDA रेश्यो 1.23 गुना हो गया. पिछले साल इसी तिमाही में यह 1.40 गुना था. ऑपरेशनल तौर पर, एल्युमिनियम बिजनेस ने शानदार तिमाही परफॉर्मेंस दी. एल्यूमिना प्रोडक्शन रिकॉर्ड 794 किलो टन रहा, जो सालाना आधार पर 57% और तिमाही आधार पर 22% ज्यादा है. वहीं, कास्ट मेटल एल्युमिनियम का प्रोडक्शन 620 किलो टन रहा, जो सालाना आधार पर थोड़ा ज्यादा है.

एल्युमिनियम प्रोडक्शन की लागत घटकर $1,674 प्रति टन हो गई, जो सालाना आधार पर 11% और तिमाही आधार पर 8% कम है. इससे कंपनी के मार्जिन को बेहतर करने में मदद मिली. जिंक इंडिया ने भी अब तक का सबसे मजबूत तीसरी तिमाही का परफॉर्मेंस दिया. माइनिंग से निकले मेटल का प्रोडक्शन बढ़कर 276 किलो टन हो गया, जो सालाना आधार पर 4% और तिमाही आधार पर 7% ज्यादा है. रिफाइंड मेटल का प्रोडक्शन बढ़कर 270 किलो टन हो गया, जो सालाना आधार पर 4% और तिमाही आधार पर 9% ज्यादा है. लागत पर अच्छा कंट्रोल रहा और जिंक प्रोडक्शन की लागत घटकर $940 प्रति टन हो गई, जो पिछले पांच सालों में तीसरी तिमाही के लिए सबसे कम है.

इंटरनेशनल जिंक बिजनेस में भी जबरदस्त सुधार देखने को मिला. माइनिंग से मेटल प्रोडक्शन सालाना आधार पर 28% बढ़कर 59 किलो टन हो गया. गैंसबर्ग माइंस में प्रोडक्शन सालाना आधार पर 40% बढ़कर 49 किलो टन हो गया, जो बेहतर रिकवरी और स्टेबल ऑपरेशंस को दिखाता है. ऑयल और गैस बिजनेस में तिमाही के दौरान औसतन रोजाना प्रोडक्शन 84.9 हजार बैरल ऑयल इक्विवेलेंट रहा. वहीं, आयरन ओर बिजनेस में भी वॉल्यूम में सुधार हुआ. कर्नाटक ऑपरेशंस में आयरन ओर का प्रोडक्शन 1.2 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 3% और तिमाही आधार पर 25% ज्यादा है. गोवा ऑपरेशंस में 0.4 मिलियन टन प्रोडक्शन हुआ, जो सालाना आधार पर 7% ज्यादा है.

Ramswaroop Mantri

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