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बजट से चंद घंटे पहले व्यापारियों इस बार बड़ी राहत की उम्मीद

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 दश का आम बजट अब से कुछ ही घंटों में संसद के पटल पर रखा जाएगा. बजट का पिटारा खुलने से ठीक पहले देश के अलग-अलग कोनों से व्यापार जगत की आवाजें तेज हो गई हैं. छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े उद्योगपतियों तक, सबकी निगाहें वित्त मंत्री के भाषण पर टिकी हैं. हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि क्या इस बार का बजट उनकी जेब को राहत देगा या फिर चुनौतियों का पहाड़ खड़ा करेगा.आम बजट पेश होने में अब बस कुछ ही घंटे बाकी हैं और उससे पहले व्यापारियों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रख दी हैं. मेटल कारोबारी चंदन भंसाली से लेकर कपड़ा व्यापारी गणपत कोठारी तक, हर किसी को इस बार बड़ी राहत की उम्मीद है. जानिए, सराफा बाजार और MSME सेक्टर ने वित्त मंत्री से क्या खास गुहार लगाई है.

अर्थव्यवस्था के पहिये को गति देने वाले तमाम बड़े व्यापारियों ने इस बार के बजट से बहुत उम्मीदें बांध रखी हैं. अलग-अलग सेक्टर के दिग्गजों का मानना है कि अगर सरकार उनकी बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देती है, तो न केवल उनका व्यापार फलेगा-फूलेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी नई ऊंचाइयों को छुएगी.

मेटल इंडस्ट्री की सरकार से है ये आस
किसी भी देश के विकास में मेटल यानी धातु उद्योग की भूमिका रीढ़ की हड्डी जैसी होती है. सुई से लेकर हवाई जहाज तक और घर के बर्तनों से लेकर गगनचुंबी इमारतों तक, हर जगह मेटल का इस्तेमाल होता है. मेटल एंड स्टील मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष और जाने-माने कारोबारी चंदन भंसाली ने इस बार बजट को लेकर बड़ी बात कही है.

भंसाली का कहना है कि सरकार को मेटल इंडस्ट्री के बारे में गंभीरता से सोचना होगा. यह एक ऐसा सर्वव्यापी क्षेत्र है जिसके बिना निर्माण की कल्पना भी नहीं की जा सकती. व्यापारियों का तर्क है कि अगर मेटल उद्योग को करों में छूट या नीतियों में सरलीकरण मिलता है, तो इसका सीधा असर आम आदमी द्वारा खरीदी जाने वाली हर वस्तु की कीमत पर पड़ेगा. कच्चा माल सस्ता होने से उत्पादन लागत घटेगी, जिससे बाजार में महंगाई को काबू करने में मदद मिल सकती है.

कपड़ा उद्योग के टैक्स के गणित में सुधार की मांग
कपड़ा उद्योग भारत के सबसे पुराने और सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है. इस बार कपड़ा व्यापारियों ने सरकार का ध्यान एक बहुत ही तकनीकी लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर खींचा है. कपड़ा व्यापारी गणपत कोठारी का कहना है कि सरकार को इस बार ‘धागे’ (Yarn) पर लगने वाले जीएसटी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

व्यापारियों का मानना है कि अगर धागे पर टैक्स का बोझ कम होता है, तो देश का कपड़ा व्यापार बहुत मजबूत होगा. इससे न केवल घरेलू बाजार में कीमतें कम होंगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय कपड़ा ज्यादा मजबूती से टिक पाएगा. कोठारी ने यह भी संकेत दिया कि अगर व्यापार बढ़ता है, तो सरकार को वॉल्यूम के आधार पर अच्छा टैक्स कलेक्शन मिल सकता है. यह एक पारंपरिक बाजार है और इसे आधुनिक नीतियों के सहारे की सख्त जरूरत है.

चमकेंगे सोना-चांदी तो खिलेंगे चेहरे
बजट से उम्मीदें लगाने में सराफा बाजार भी पीछे नहीं है. भारतीय समाज में सोने-चांदी का महत्व केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सुरक्षित निवेश का सबसे बड़ा जरिया माना जाता है. सर्राफा व्यापारी सुभाष वडाला ने उम्मीद जताई है कि बजट में ऐसे प्रावधान होने चाहिए जिससे सोने-चांदी की खरीदारी को बढ़ावा मिले. उनका तर्क है कि जब सर्राफा बाजार में खरीदारी बढ़ती है, तो बाजार में नकदी का प्रवाह तेज होता है और देश का व्यापारिक ढांचा मजबूत होता है.

वहीं, अर्थव्यवस्था के एक और महत्वपूर्ण स्तंभ, MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर ने भी अपनी आवाज बुलंद की है. इस सेक्टर को देश की इकोनॉमी का ‘ग्रोथ इंजन’ कहा जाता है. कई व्यापारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि अगर सरकार नई कंपनियों को शुरू करने के लिए आसान नियम और प्रोत्साहन देती है, तो इसका सीधा असर रोजगार पर पड़ेगा. जितनी ज्यादा नई यूनिट्स लगेंगी, युवाओं के लिए नौकरियों के उतने ही ज्यादा अवसर पैदा होंगे.

Ramswaroop Mantri

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