विकास केंद्रित केंद्रीय बजट, कम महंगाई और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मद्देनजर आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) बुधवार से तीन दिवसीय बैठक शुरू करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई ने फरवरी से अब तक रेपो दर में 1.25 फीसदी की कमी की है। चूंकि, विकास या महंगाई को लेकर गंभीर चिंताएं नहीं हैं, इसलिए वह दरों में यथास्थिति बनाए रख सकता है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, एमपीसी के रेपो दर पर कायम रहने की संभावना है और यह दर-कटौती चक्र का अंत भी हो सकता है। वहीं, इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, इस समय विराम उचित है, ताकि जनवरी, 2026 की खुदरा महंगाई और 2023-24 से 2025-26 तक के जीडीपी आंकड़ों का आकलन किया जा सके। हालांकि, कम महंगाई आरबीआई को दर कटौती पर विचार करने की गुंजाइश देती है।
किफायती हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों का घटेगा एयूएम
किफायती आवासीय परियोजनाओं को कर्ज देने वाली हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की प्रबंधन के अधीन परिसंपत्तियां यानी एयूएम चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान घटकर 21 फीसदी रह सकती हैं। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान किफायती हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों का एयूएम 23 फीसदी रहा था।
घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा, आने वाले वित्त वर्ष 2026-27 में भी इन कंपनियों के एयूएम में वृद्धि की रफ्तार 20-21 फीसदी पर स्थिर बनी रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रॉपर्टी के बदले लोन (एलएपी) सेगमेंट में वृद्धि भी 30 फीसदी से घटकर चालू वित्त वर्ष में 24-26 फीसदी रह सकती है, क्योंकि कुछ खास तरह के कर्जदारों की संपत्ति की गुणवत्ता पर दबाव के बाद लेंडर्स अंडरराइटिंग को फिर से एडजस्ट कर रहे हैं। इससे क्रेडिट लागत में थोड़ी बढ़ोतरी होगी।
पिछले 6 साल के IPO निवेशकों को झटका, आधे से ज्यादा अब भी इश्यू प्राइस से नीचे
पिछले छह वर्षों में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई कंपनियों में से बड़ी संख्या के निवेशकों को अब तक मुनाफा नहीं मिल पाया है। एक्सिस कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में लिस्ट हुई कंपनियों में से करीब आधी अब भी अपने इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार कर रही हैं।
रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, बीते छह साल में कुल 374 कंपनियों के IPO आए, जिनमें से लगभग 180 कंपनियां फिलहाल अपने इश्यू प्राइस से नीचे ट्रेड कर रही हैं। यह संख्या कुल लिस्टेड कंपनियों का करीब 48 फीसदी है। इनमें से करीब 19 फीसदी यानी लगभग 70 कंपनियां ऐसी हैं, जिनके शेयर अपने इश्यू प्राइस से 25 से 50 फीसदी तक नीचे आ चुके हैं। वहीं, 34 कंपनियां (करीब 9 फीसदी) ऐसी भी हैं, जिनके शेयरों में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ये आंकड़े IPO बाजार में निवेश से जुड़े जोखिमों को दर्शाते हैं और यह संकेत देते हैं कि केवल लिस्टिंग गेन के भरोसे निवेश करना निवेशकों के लिए घाटे का सौदा साबित हो सकता है।
तेलंगाना में एकीकृत बिलिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी
तेलंगाना सरकार ने स्थानीय निकायों की आय बढ़ाने और नागरिकों के लिए भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिलों में कॉमन बिलिंग सिस्टम लागू करने का फैसला किया है। इस प्रणाली के तहत बिजली, जलापूर्ति और संपत्ति कर के बिलों का भुगतान एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया जा सकेगा। इस विकास से जुड़े अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, इसी तरह का मॉडल पहले से मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में अपनाया जा रहा है, जिससे राजस्व संग्रह में सुधार और प्रशासनिक दक्षता बढ़ी है। एक अधिकारी ने बताया कि इस पहल से नागरिकों को अलग-अलग विभागों के लिए अलग-अलग भुगतान करने की झंझट से राहत मिलेगी।
कॉमन बिलिंग सिस्टम लागू करने का निर्णय 12 जनवरी को ए रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया था। इसके बाद नगर प्रशासन एवं शहरी विकास विभाग के विशेष मुख्य सचिव ने राज्य के सभी नगर निकायों के अधिकारियों के साथ फॉलो-अप बैठक कर इस योजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (जीएचएमसी) के एक अधिकारी ने कहा कि एकीकृत प्लेटफॉर्म से न केवल भुगतान प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि समय पर कर संग्रह सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और शहरी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने में अहम भूमिका निभाएगा।
EU के सख्त AMR नियमों में भारत को राहत, सीफूड-शहद-डेयरी निर्यात सुरक्षित
भारतीय सीफूड, शहद और डेयरी उत्पादों के निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। यूरोपीयन यूनियन के नए एएमआर स्वास्थ्य नियमों के तहत भारत को बाजार पहुंच बनाए रखने की मंजूरी मिल गई है। सितंबर 2026 से लागू होने वाले कड़े नियमों से पहले भारत ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप निगरानी व्यवस्था मजबूत की, जिससे एक्वाकल्चर, अंडे, शहद और अन्य पशु-उत्पादों का ईयू निर्यात सुरक्षित हो गया। इससे करीब 1.125 अरब डॉलर के मत्स्य निर्यात पर मंडरा रहा खतरा टल गया है।





