-सुसंस्कृति परिहार
लोकसभा स्पीकर ने जिस तरह के कयास लगाकर देश के प्रधानमंत्री को गुमराह किया उन्हें सदन में नहीं आने दिया इससे यह सिद्ध होता है लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला सदन को संभालने की क्षमता नहीं रखते हैं? सिर्फ तीन ही तो महिलाएं थीं जो प्रधानमंत्री की कुर्सी के करीब पहुंची थी।उन महिला सांसदों से इतना डर ? प्रधानमंत्री भी इतने कायर कि ओम बिड़ला की सूचना से डर गए?
याद आती हैं प्रियंका गांधी का सन् 2023 में दिया वह भाषण जब वे ज़ोर देकर कहती हैं कि- “इस देश का प्रधानमंत्री कायर है,कायर है।कर लो मेरे खिलाफ एफआईआर,भेज दो मुझे जेल।” तब शायद सभी को बुरा लगा होगा। लेकिन आज उसकी हकीकत, समझ में देश वासियों को आ ही गई।

पहले वे सेना चीफ नरवणे जी की पुस्तक से डरे।ओम बिड़ला ने प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया। दूसरे दिन उन्होंने नरवणे जी की पुस्तक दिखाई और उसे पीएम को भेंट करने की घोषणा की। जिसमें चीन हमले पर उनके डर को नरवणे जी ने उद्घाटित किया है।वे फिर डरा दिए गए।
बेशक इस बात की अब तो कई तरह से पुष्टि होती जा रही है कि पीएम कायर ही नहीं, बुज़दिल और डरपोक भी है। अमेरिकी दाऊ के आगे आपरेशन सिंदूर के दौरान पीएम ने सरेंडर किया उससे देश भली-भांति परिचित हैं। हाल ही में मोदीजी ने अपने आका द्वारा 18%टेरिफ की घोषणा होने पर जिस तरह का जश्न मनाया वह आपदा में निजी फायदा का जश्न है। एपस्टीन फायल और क्या क्या कराएगी या कब तक मोदीजी उसके डर से डोनाल्ड ट्रंप जैसे गंदे दोस्त के आगे नतमस्तक रहेंगे। कब तक देश उनके आका के आदेशों से चलेगा।
विदित हो हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान पर अमरीका ने 19%टेरिफ लगाया हुआ है लेकिन पाकिस्तान सरकार ने उतना ही टैरिफ अपने निर्यात पर लगाया हुआ।ऐसा कई देशों ने भी किया है लेकिन हमारे पीएम के डर का क्या कहना वे तो ज़ीरो टैरिफ पर अपना सामान निर्यात करने राजी हैं।देश के मेहनतकशों के साथ इतने घाटे का सौदा मोदीजी की कायरता का ही परिणाम है।
इसी तरह गुपचुप हमारे यहां अमेरिका के कृषि उत्पादों को लाने की अनुमति दी गई है जिससे देश के किसानों की तबाही सुनिश्चित है।
सोचिए जिस देश का प्रधानमंत्री इतना कायर हो जिसे अपने हित साधने के अलावा ना देश की सीमा का ख़्याल है,ना मेहनतकशों का और ना ही अन्नदाताओं का, जिनके दम से ही देश विकासशील देश बना है। विकसित भारत की ओर कदम रखते भारत को आज एक खिलौने की तरह अमेरिका और चीन इस्तेमाल कर रहे हैं।इससे तेल लो उसका बंद करो का खेल तो चल ही रहा था कि इधर गाओ नाचो के बाद काम पूरा हुआ डोनाल्ड खुश हुए।कहने का आशय यह कि हमारे देश का डरा हुआ प्रधानमंत्री देश को बर्बाद करने उतारु है और लोकसभा स्पीकर उसकी रक्षा कर रहे हैं यह पैगाम देकर कि उन्हें सदन में ख़तरा है वे सदन में ना आएं।जैसे विपक्षी सांसद हत्यारे हों, महिलाएं आतंकी हों।
कुल मिलाकर दोनों मिलकर ना केवल हमारी संसद की प्रतिष्ठा दुनियां में गिरा रहे हैं बल्कि अपनी अयोग्यता भी जता रहे हैं कि वे भारतीय संसद के प्रतिनिधित्व के काबिल नहीं हैं।इसकी अहम जिम्मेदारी लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला की बनती है जिसे पार्टीगत जुड़ाव से अलग रहकर निष्पक्ष काम करने ही चयनित किया जाता है।ऐसे नाकाबिल स्पीकर को हटा देना ही उचित होगा।जिसने ना केवल सदन को काला धब्बा लगाया है बल्कि पीएम को भी गुमराह किया है।





