अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

देश में चार तरह के हिंदू… मोहन भागवत ने समझाया

Share

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बताया, हिंदू होने का मतलब

मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर ऑडिटोरियम में 7 और 8 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का विषय ‘संघ यात्रा के 100 वर्ष – नए क्षितिज’ रखा गया. इस दो दिवसीय आयोजन के पहले दिन सरसंघचालक मोहन भागवन ने बताया कि वर्तमान में देश में चार प्रकार के हिंदू मौजूद हैं. इनमें पहले वे हैं जो गर्व से अपनी पहचान बताते हैं. दूसरे वे जो सामान्य रूप से अपनी पहचान स्वीकारते हैं. तीसरे वे जो अपनी पहचान बताने से डरते हैं और चौथे वे जिन्हें अपनी विरासत भुला दी गई है. RSS प्रमुख ने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं बल्कि एक विशेषण है. भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक सीमा में रहने वाले सभी लोग मूल रूप से हिंदू ही हैं. भागवत ने कहा कि जैसे-जैसे शक्तिशाली बनेगा, दुनिया की स्वार्थी शक्तियों की दुकानें बंद हो जाएंगी. यही कारण है कि कुछ विदेशी ताकतें दिखावे के लिए दोस्ती करती हैं लेकिन समय आने पर दुश्मनी निकालने से पीछे नहीं हटतीं. इन चुनौतियों से निपटने का एकमात्र रास्ता भारत को सामर्थ्य संपन्न राष्ट्र बनाना है. इसके लिए समाज का हर हिस्सा संगठित और गुणवान होना चाहिए. किसी को भी पीछे छोड़ना देश के हित में नहीं है.

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को बेंगलुरू में एक कार्यक्रम में हिंदू होने का मतलब बताया. उन्होंने कहा कि हिंदू होने का अर्थ है, भारत माता के वंशज, भारत के लिए जिम्मेदार. जो भी भारत के लिए लड़े, वे सभी हिंदू हैं. सभी मुसलमान और ईसाई के पूर्वज भी इसी भूमि के रहे हैं, इसलिए वे सभी भी हिंदू हैं. मुसलमानों में भी माना जाता है कि जब तक वतन की मुट्ठी भर मिट्टी जनाजे में नहीं पड़ती, तब तक जन्नत नसीब नहीं होती.

4 तरह के हिंदू कौन-कौन से?

संघ के 100 वर्षों की यात्रा पर बेंगलुरू में आयोजित दो दिवसीय लेक्चर सीरीज के पहले दिन आरएसएस प्रमुख भागवत ने कहा कि चार प्रकार के हिंदू होते हैं. पहला, जो अपने होने पर गर्व करते हैं. दूसरे हिंदू वह जो यह तो कहते है कि वे हिंदू हैं, पर गर्व नहीं महसूस करते. तीसरे हिंदू वो हैं, जो निजी रूप से स्वयं को हिंदू मानते हैं, पर किसी लाभ-नुकसान के भय से सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करते. और चौथी तरह के हिंदू वो हैं, जो यह तक भूल चुके हैं कि वे हिंदू हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

‘पूरी दुनिया में संघ जैसा कोई संगठन नहीं’

भागवत ने कहा कि संघ एक अद्वितीय संगठन है. पूरी दुनिया में इसके समान कोई नहीं है. संघ न तो किसी परिस्थिति की प्रतिक्रिया है, और न ही विरोध. संघ का उद्देश्य विनाश नहीं बल्कि पूर्णता की स्थापना है, पूरे समाज को एकजुट करना है. उन्होंने कहा कि संघ का एक ही लक्ष्य है “सम्पूर्ण हिन्दू समाज का संगठन”. संघ प्रत्येक व्यक्ति को शाखा में प्रशिक्षण देकर सिखाता है कि वह केवल भारत माता के बारे में सोचे. सम्पूर्ण समाज के संगठन तथा व्यक्ति-निर्माण की पद्धति को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने विकसित किया है. 

‘सत्ता नहीं, समाज को संगठित करना उद्देश्य’

मोहन भागवत ने कहा कि संघ हिंदू समाज का संगठन भारत माता के वैभव के लिए करना चाहता है, सत्ता के लिए नहीं. संघ के संचालन के लिए एक भी पैसा बाहर से नहीं लिया जाता.उन्होंने कहा कि विश्व में ऐसा कोई स्वैच्छिक संगठन नहीं है, जिसने संघ जैसी कठिनाइयों का सामना किया हो. संघ ने तीन प्रतिबंध झेले, हालांकि तीसरा प्रतिबंध वास्तविक अर्थों में कोई खास प्रतिबंध नहीं था.

Ramswaroop Mantri

Add comment

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें