सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) भारत-अमेरिका ट्रेड डील के तहत अमेरिका द्वारा भारतीय कृषि उत्पादों पर लगाए गए नए टैरिफ़ और इस पर भारत सरकार की सहमति की कड़ी निंदा करती है। यह निर्णय न केवल भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला है, बल्कि करोड़ों किसानों के साथ विश्वासघात करते हुए उनकी आजीविका, आत्मनिर्भरता और भविष्य को भी गहरे संकट में डालने वाला कदम है।
अमेरिकी टैरिफ़ नीति दरअसल वैश्विक कॉरपोरेट हितों की रक्षा और विकासशील देशों के किसानों को बाज़ार से बाहर धकेलने की रणनीति का हिस्सा है। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि भारत सरकार, जो स्वयं को “किसान हितैषी” बताती है, इस अन्यायपूर्ण नीति के सामने घुटने टेकती नज़र आ रही है। यह सरकार की विदेश व्यापार नीति की विफलता और किसानों के प्रति उसकी असंवेदनशीलता को उजागर करता है।
भारत के किसान पहले ही बढ़ती लागत, न्यूनतम समर्थन मूल्य की अनिश्चितता, कर्ज़ के बोझ और जलवायु संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में कृषि निर्यात पर प्रतिकूल टैरिफ़ भारतीय किसानों की आय घटाने, मंडियों को अस्थिर करने और कृषि संकट को और गहरा करने का काम करेंगे। यह स्पष्ट है कि सरकार की प्राथमिकता किसान नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के नाम पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को खुश करना बन गई है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) यह मानती है कि कृषि केवल व्यापार का विषय नहीं, बल्कि देश की खाद्य संप्रभुता, ग्रामीण रोज़गार और सामाजिक न्याय का आधार है। किसानों के हितों के खिलाफ किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव को स्वीकार करना देश की संप्रभुता से समझौता करने के बराबर है।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) माँग करती है कि भारत सरकार अमेरिकी टैरिफ़ नीति को अस्वीकार करे और किसानों के हित में इस पर तत्काल कूटनीतिक स्तर पर ठोस पहल करे। इसके साथ ही किसानों के हितों को संरक्षित करने के लिए WTO सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत विकासशील देशों के साथ मिलकर इस तरह की एकतरफा नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाए।
इसके विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 12 फ़रवरी को मोदी-ट्रंप के पुतले दहन करने के घोषित कार्यक्रम के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) और इसका किसान संगठन सोशलिस्ट किसान सभा भी उसी दिन देशभर में मोदी-ट्रंप का पुतला दहन एवं धरना प्रदर्शन करेगी। इसके साथ ही पार्टी आह्वान करती है कि देश भर में अमेरिका से आयातित सभी वस्तुओं का बहिष्कार हो, किसानों, मज़दूरों और सभी जनपक्षधर ताक़तें इस किसान-विरोधी नीति के खिलाफ संगठित प्रतिरोध दर्ज करें ताकि पूर्व में किसान आंदोलन को मिली सफलता की तरह सरकार को इस डील को रद्द करने के लिए मजबूर किया जा सके।
बसंत हेतमसरिया
राष्ट्रीय प्रवक्ता
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)
मो. 9934443337






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