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बुरहानपुर में अश्वत्थामा आज भी करते हैं पूजा?

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 बुरहानपुर जिले में कई प्राचीन शिवालय मौजूद हैं, जिनमें असीरगढ़ का शिव मंदिर और खड़कोद का गुप्तेश्वर महादेव मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं. कहा जाता है कि इन मंदिरों पर अश्वत्थामा शिवजी की पूजा अर्चना करने आते थे. महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं.

बुरहानपुर जिले में आज भी कई प्राचीन शिवालय मौजूद है. जिनकी अपनी-अपनी कहानी है. आज हम आपको मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के दो शिवालयों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी अश्वत्थामा से जुडी रहस्यमई कहानी है. इतिहासकार बताते हैं कि इन दो मंदिरों पर आज भी लोग दावा करते हैं कि अश्वत्थामा शिवजी की पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं. जिसमें असीरगढ़ का शिव मंदिर और खड़कोद का गुप्तेश्वर महादेव मंदिर इन दो मंदिरों पर शिवजी की पूजा अर्चना करने के लिए अश्वत्थामा आते हैं ऐसा लोग दावा करते हैं और यहां पर महाशिवरात्रि के अवसर पर लोगों की बड़ी संख्या में भीड़ देखने के लिए मिलती है. लोग दूर-दूर से दर्शन पूजन करने के लिए आते हैं.

महाराज ने दी जानकारी 
लोकल 18 की टीम ने जब गुप्तेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी योगेश महाराज से बात की तो उन्होंने बताया कि यह काफी प्राचीन शिवजी का मंदिर है. यहां पर शिवालय में दूर-दूर से भक्त दर्शन पूजन करने के लिए आते हैं और खास बात यह है कि यहां पर आज भी अश्वत्थामा शिव जी की पूजा अर्चना करते हैं. इस मंदिर की खासियत है कि यहां पर सुबह के समय में ऐसा लगता है कि कोई पूजा कर गया है लेकिन आज तक हमको दिखाई नहीं दिया है. क्योंकि लोग भी यहां पर हमको बताते हैं कि अश्वत्थामा आज भी आते हैं क्षेत्र के लोग दावा करते हैं तो वही असीरगढ़ का शिव मंदिर की कहानी भी अश्वत्थामा से जुड़ी हुई है.  यहां पर भी अश्वत्थामा शिव जी की पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं. गांव के लोग बताते हैं कि आज तक किसी को दिखे नहीं है लेकिन सुबह के समय में मंदिर में गुलाब का फूल नजर आता है दोनों शिवालय की कहानी अश्वत्थामा से जुड़ी हुई है और यहां पर महाशिवरात्रि पर भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ भी लगती है मध्य प्रदेश महाराष्ट्र और गुजरात के भक्त दर्शन पूजन करने के लिए आते हैं.

कुंवारी कन्याओं के होते हैं विवाह 
मंदिर से जुड़े लोग बताते हैं कि जो भी कुंवारी कन्या होती है वह शिवजी के दर्शन पूजन करने के लिए महाशिवरात्रि के दिन आती है और यहां पर यदि मन्नत मांगती है तो उसकी मन्नत पूरी होती है और उसको अच्छा वर मिलता है तो वही लोग संतान के लिए भी यहां पर मन्नत मांगते हैं. जिनके यहां पर संतान होती है वह शिवजी का अभिषेक पूजन करवाते हैं. इसलिए इन दोनों ही मंदिरों की कहानी काफी प्रसिद्ध है और यह मंदिर हजारों साल पुराने बताए जाते हैं.

Ramswaroop Mantri

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