ग्वालियर: मध्य प्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 4 लाख 38 हजार करोड़ से ज्यादा का बजट पेश किया है. उसके बाद अलग-अलग सेक्टर से लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. इस बीच मध्य प्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स बजट से निराश है, जिन्हें नए बजट में उद्योग क्षेत्र के लिए कई उम्मीदें थीं. लेकिन उन्हें उम्मीद अनुसार कुछ भी बजट में दिखाई नहीं दिया.
‘उद्योग जगत को थी बजट के बूस्टर डोज की जरूरत’
मध्य प्रदेश में वर्ष 2026-27 का वित्तीय बजट बुधवार को विधानसभा सदन में पेश किया गया. इस बजट के जरिए महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए कई सौगातें देने की बात कही गई. वहीं, उद्योग और व्यापारी वर्ग इस बजट को लेकर निराश नजर आ रहे हैं. मध्य प्रदेश चैम्बर ऑफ कॉमर्स, ग्वालियर के मानसेवी सचिव दीपक अग्रवाल ने कहा, ” मुख्यमंत्री ने इस बजट के माध्यम से किसानों, महिलाओं, शहर की नगरीय निकाय की सड़कें आदि के लिए कार्य करने का प्रयास किया है. लेकिन व्यापार व उद्योग में इस समय एक बूस्टर डोज की आवश्यकता है, जो नहीं मिली. ये बजट इस क्षेत्र के लिए निराश करने वाला रहा.”
डबल टैक्स से बजट में नहीं दी राहत
दीपक अग्रवाल ने कहा, ” व्यापार और उद्योग की अपेक्षा इतनी थी कि जहां-जहां उद्योग जगत का टैक्स मध्य प्रदेश में अन्य राज्यों से ज्यादा है, वहां हमें उनके बराबर लिया जाए. आज एक कॉम्पिटीशन का युग है. उदाहरण के लिए एक ही तरह का प्रोडक्ट मध्य प्रदेश, गुजरात, और उत्तर प्रदेश में बनता है. लेकिन हम पर ज्यादा टैक्स होगा, तो हम कैसे उसे कंपीट कर पाएंगे? हमारे उद्योग को उसी कार्य के लिए डबल टैक्स देना पड़ता है. एक काम के लिए टैक्स उद्योग के साथ ही नगरीय निकाय को भी टैक्स देना पड़ता है. सरकार ने उस पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया.”

‘उद्योग में ज्यादा टैक्स बनी है समस्या’
चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने पेट्रोल डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की भी मांग की थी. इस बारे में दीपक अग्रवाल ने कहा, “पेट्रोल और डीजल की रेट हमारे यहां मध्य प्रदेश में निकटवर्ती राज्यों से भी ज्यादा है. हमारी मांग थी कि उनको पड़ोसी राज्यों के बराबर किया जाए, जो कि नहीं हुआ. वहीं, हमारे यहां स्टैम्प ड्यूटी पर जो रजिस्ट्रेशन शुल्क है, वह 11% से लेकर 12.5% है, जबकि अन्य विकसित राज्यों जैसे महाराष्ट्र, गुजरात में ये 6% से 7% है. ऐसे में कोई भी उद्योगपति यहां पर आएगा, तो उसे उन राज्यों से ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा. जिससे उसे परेशानियां भी आएगी. अगर इन समस्याओं का समाधान इस बजट में किया गया होता, तो बजट थोड़ा सा और अच्छा कहा जा सकता था. लेकिन इस बजट में हमें निराशा हाथ लगी है.”






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