केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्रालय ने सेंसरशिप का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविज़न संस्थान (एसआरएफटीआई) के छात्रों की बनायी लघु एनीमेशन फिल्म “द’ लित किड्स” के मुंबई में हो रहे एनिमेला एनीमेशन फिल्मोत्सव में प्रदर्शन पर रोक लगा दी।
भारतीय फ़िल्म एवं टेलीविज़न संस्थान छात्र संगठन (एफटीआईआईएसए) ने शनिवार, 21 फ़रवरी को यहाँ जारी बयान में कहा कि फिल्म स्कूल को सेंसर करने का मतलब भारतीय सिनेमा के भविष्य को सेंसर करना है।
छात्र संगठन के अध्यक्ष अमितांशु सिंह यादव और महासचिव अजमल शाह केयू के जारी बयान के अनुसार द’ लित किड्स जनता के पैसे से चलने वाले एक फिल्म स्कूल का अकादमिक प्रोजेक्ट है और किसी भी अन्य कला संस्थान की तरह फिल्म स्कूल भी समाज और इसके समय की सच्चाई प्रस्तुत करने के लिए होते हैं। इन्हें आलोचनात्मक स्वर या रचनात्मक स्वतंत्रता से वंचित करने यह सिर्फ़ तकनीशियन प्रशिक्षण केंद्र बनकर रह जाते हैं।
छात्र संगठन के अनुसार फिल्म “द’ लित किड्स” जाति आधारित भेदभाव के विषय पर है। फिल्म का केरल वृत्तचित्र एवं लघु फिल्मोत्सव और धर्मशाला अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव जैसे सम्मानित फ़िल्मोत्सवों में प्रदर्शन हो चुका है।
बयान के अनुसार यदि फ़िल्म स्कूल के छात्रों की फ़िल्म को भी इस तरह के हालात का सामना करना पड़े तो इसका मतलब है की संस्थानिक स्वायत्तता केवल प्रतीकात्मक है। रचनात्मक आज़ादी प्रशासनिक भय के साये में साँस नहीं ले सकती।
बयान के अनुसार सरकारी निधि मुहैया कराने का मतलब आउटपुट पर राज्य की विचारधारा स्वामित्व नहीं है। फिल्म संस्थान प्रचार इकाई नहीं होते।
छात्र संगठन ने फिल्म बनाने वालों (एसआरएफटीआई के छात्रों और फैकल्टी) से एकजुटता जताते हुए माँग की है कि प्रदर्शन की अनुमति न देने के फैसले पर पुनर्विचार किया जाये।
एनिमेला एनीमेशन फिल्मोत्सव मुंबई में शुक्रवार, 20 फ़रवरी से शुरू हुआ है और रविवार, 22 फ़रवरी तक चलेगा।






Add comment