! -सुसंस्कृति परिहार
भारत सरकार के अधीनस्थ विभाग के लोग किस तरह भाजपा विरोधी राज्य सरकारों के अधिकारों की उपेक्षा करते हुए मनमानी करते रहते हैं।इसका पहला विरोध दर्ज कराने वाली बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं। जिन्होंने ईडी जैसी स्वायत्त संस्था को जो इस वक्त भाजपा सरकार की चाटुकारिता में निमग्न है,को बंगाल में पहुंचकर बिना राज्य सरकार के डीजीपी को ख़बर दिए छापा डालते हुए बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार करने की बात कही थी। जिसके बाद से भाजपा का ममता से जबरदस्त विरोध देखने मिल रहा है।
इसी कड़ी को विगत दिनों आगे बढ़ाते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी दिल्ली और हरियाणा पुलिस के ख़िलाफ़ संज्ञान लिया है। विदित हो दिल्ली ए आई समिट के दौरान युवा कांग्रेस के युवकों द्वारा शर्ट उतारकर हाथ में लेकर प्रदर्शन किया था।इन टी-शर्ट्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते संदेश लिखे थे। विरोध का उद्देश्य सरकार के कथित “समझौता किए गए निर्णयों” और पारदर्शिता के अभाव को लेकर सवाल उठाना बताया गया है।
इसे लेकर अमेरिका के आगे पूरी तरह सरेंडर प्रधानमंत्री को नागवार गुजरा और इसे देश के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बनाकर इन युवाओं की धरपकड़ जारी है।इसी सिलसिले में हिमाचल के शिमला के एक रिज़ार्ट के किचिन से सादे वेश में घुसकर तीन युवकों को पकड़ लिया। इनमें एक अरबाज खान भी हैं वह सुल्तानपुर शहर के कोतवाली नगर थाना क्षेत्र के घरहां इलाके में किराये के मकान में परिवार के साथ रहता था। वर्ष 2022 से वह राजनीति में अधिक सक्रिय है। अरबाज अहमद के पिता फिरोज अहमद वर्तमान में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य हैं। फिरोज अहमद पुराने कांग्रेसी नेता हैं उन्होंने 188, सुल्तानपुर (शहर) विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा था।
बहरहाल फिर यहां भी वही हुआ। पुलिस द्वारा राज्य सरकार को कोई इत्तिला नहीं दी गई। जिससे हिमाचल पुलिस ने दिल्ली-हरियाणा पुलिस को मज़ा चख़ा दिया।
इस आंदोलन को लेकर कई प्रकार की चर्चाएं जारी हैं। सरकार के पक्षधर लोगों का कहना है कि जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन देशद्रोह जैसा है।वह भी समिट के दौरान जहां विदेशों के लोग एकत्रित थे।
तो सरकार को ये बात समझनी होगी कि जब संसद के अंदर प्रतिपक्ष और विपक्षी नेताओं की बात नहीं सुनी जाएगी तो वे जाएंगे कहां। उन्हें प्रमुख विरोध स्थलों पर अनुमति नहीं दी जाएगी तो सरकार के ख़िलाफ़ ऐसे ही स्थल चुपचाप चुनने बाध्य होंगे।यह बानगी है यदि ऐसी ही स्थिति बनी रही तो फिर यही तो काट बनेगी।
फिलहाल, महत्वपूर्ण बात ये है आज भारत सरकार राज्यों के अधिकारों को भी हड़पना शुरू कर दी है। खबरें सिर्फ उन राज्यों से आई हैं जहां पर भाजपा विरोधी सरकारें है।अन्य भाजपा शासित राज्यों में तो लगता है मिस्टर ट्रम्प की तरह दिल्ली से सीधे सरेंडर साहेब का आदेश शांति से चल रहा होगा।राज्य सरकारों के अधिकारों का दमन संविधान विरोधी है। ममता बनर्जी और सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य सरकारों की उपेक्षा को निडरतापूर्वक दर्ज़ कराया वह श्लाघनीय, मायनेखेज और चिंताजनक मसला है।
लगता है,अब वह समय आ गया है जब हर मुकाम पर कूटनीतिक जागरूकता की ज़रुरत है।जब अधिकारों को सरेआम उल्लंघन हो,देश के साथ सौदेबाजी की जा रही हो , प्रदर्शनों की गुंजाइश ना हो,संसद में नेताओं को अनसुना किया जाए। राज्यों की स्वायत्तता पर हमला हो तब इस तरह की घटनाएं होना लाज़मी ही मानी जाएंगी।






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