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खंडवा की बेटी रूपल जायसवाल:22 लाख का पैकेज छोड़ा, रोज 9 घंटे पढ़ाई, UPSC में 43वीं रैंक

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खंडवा के महादेवी नगर की रहने वाली रूपल जायसवाल ने छोटे शहर से निकलकर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली UPSC परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है. आमतौर पर छोटे शहरों से IAS बनने वाले युवाओं की संख्या कम होती है, लेकिन रूपल ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के दम पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल खुद रास्ता बना लेती है. कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है मध्य प्रदेश के खंडवा की रहने वाली रूपल धनंजय जायसवाल की, जिन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया स्तर पर 43वीं रैंक हासिल कर जिले के साथ-साथ अपने परिवार का नाम भी रोशन कर दिया है.

बीमारी के बावजूद नहीं छोड़ी हिम्मत
रूपल जायसवाल की सफलता की कहानी और भी खास इसलिए है, क्योंकि परीक्षा के दौरान वह बीमार भी पड़ गई थीं. इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी तैयारी जारी रखी. लगातार पढ़ाई और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया में 43वीं रैंक हासिल कर ली.

इंटरव्यू में पूछा गया किशोर कुमार से जुड़ा सवाल
इंटरव्यू के दौरान उनसे खंडवा की पहचान और प्रसिद्ध गायक किशोर कुमार को लेकर भी सवाल पूछा गया. उनसे पूछा गया कि क्या खंडवा में किशोर कुमार का मंदिर बना हुआ है? इस पर रूपल ने जवाब दिया कि मंदिर तो नहीं है, लेकिन खंडवा में उनकी समाधि बनी हुई है और उनके माता-पिता के नाम से ऑडिटोरियम भी बनाया गया है.

रोज 9 घंटे रूपल ने की पढ़ाई
Local 18 से बातचीत में रूपल जायसवाल ने बताया कि वह पिछले करीब साढ़े तीन साल से UPSC की तैयारी कर रही थीं. रोजाना करीब 8 से 9 घंटे पढ़ाई करती थीं. रूपल ने बताया कि यह उनका तीसरा अटेम्प्ट था. दूसरे अटेम्प्ट में भी उन्हें सफलता मिली थी और उनकी रैंक 512 आई थी, लेकिन उन्हें अपनी पसंद की सर्विस नहीं मिल पाई थी. इसी वजह से उन्होंने एक बार फिर परीक्षा देने का फैसला किया और इस बार शानदार रैंक हासिल कर ली.

अच्छी नौकरी छोड़कर की तैयारी
रूपल ने BA-LLB (ऑनर्स) की पढ़ाई की है. कॉलेज के चौथे साल में ही उन्हें नौकरी मिल गई थी और उनका 22 लाख रुपए का पैकेज था. लेकिन उनका सपना सिविल सर्विस में जाने का था. रूपल बताती हैं कि नौकरी के साथ UPSC की तैयारी करना उनके लिए मुश्किल हो रहा था, इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान दिया.

परिवार का मिला पूरा साथ
रूपल के पिता धनंजय जायसवाल सिविल इंजीनियर हैं. रूपल बताती हैं कि उनकी सफलता के पीछे परिवार का बहुत बड़ा योगदान है. पढ़ाई के दौरान जब वह थक जाती थीं तो घर के डॉगी के साथ समय बिताकर खुद को रिलैक्स करती थीं और फिर दोबारा पढ़ाई में जुट जाती थीं.

महिलाओं के लिए करना चाहती हैं काम
रूपल का कहना है कि उनका सपना सिर्फ IAS बनना नहीं था, बल्कि देश सेवा करना था. वह आगे चलकर खासतौर पर महिलाओं के लिए काम करना चाहती हैं और उनके अधिकारों और विकास के लिए प्रयास करना चाहती हैं.

खंडवा की बेटी रूपल की यह सफलता आज जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है. उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे शहर में खुशी का माहौल है.

Ramswaroop Mantri

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