सिंहस्थ 2028 के लिए सिलारखेड़ी परियोजना की लंबे समय से मांग की जा रही थी, जिसका काम अब युद्ध स्तर पर चलता नजर आ रहा है. आने वाले सिंहस्थ 2028 मे इसी पानी के जल से श्रद्धालुओं को स्न्नान कराया जाएगा. अब इस पर सांसद अनिल फिरौजिया ने बयान दिया है.
विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के दरबार में रोजाना लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन लगा रहता है. अभी कुछ ही समय बाद यह संख्या करोड़ों में पहुंचने वाली है. जिसकी वजह है उज्जैन में होने वाला 2028 का सिंहस्थ. इसके लिए उज्जैन में लगातार विकास की सौगात देखने को मिल रही है. काफी समय से श्रद्धालुओं की एक मांग उठ रही थी कि आने वाले सिंहस्थ 2028 मे शिप्रा के शुद्ध जल से स्नान कराया जाए. इसके लिए शिप्रा नदी को प्रवाहमान बनाए रखने के लिए बनाई जा रही सिलारखेड़ी परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है.
इस परियोजना की लागत लगभग 625 करोड़ रुपए की है, जिसका काम तेजी से चल रहा है. लगातार जिला प्रशासनिक अधिकारी के साथ जनप्रतिनिधि भी समय-समय पर इस योजना का काम बारीकी से चैक कर रहे हैं. इस बार उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने इंजीनियरों और अधिकारियों की टीम के साथ स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया और कार्य की प्रगति की जानकारी ली. इस पूरी योजना से श्रद्धालुओं को विशेष लाभ मिलेगा.
कैसे होगी शिप्रा नदी बनी रहेगी प्रवाहवान?
यह परियोजना केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार की संयुक्त योजना है, जिसका उद्देश्य साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ के दौरान शिप्रा नदी में निरंतर जल प्रवाह बनाए रखना है. इसके तहत सिलारखेड़ी में 51 एमसीएम क्षमता का एक बड़ा जलाशय तैयार किया जा रहा है. बारिश के समय जब शिप्रा नदी का जलस्तर अधिक होगा, तब सेवरखेड़ी स्थित पंप स्टेशन से पानी को पंप कर सिलारखेड़ी स्थित इस जलाशय में जमा किया जाएगा. बाद में आवश्यकता के अनुसार इस पानी को शिप्रा में छोड़ा जाएगा, जिससे नदी का प्रवाह लगातार बना रहेगा.
जानिए कितने एकड़ में फैला है तालाब
परियोजना के लिए करीब 6.5 किलोमीटर क्षेत्र में आने वाली जमीनों का अधिग्रहण किया जा चुका है, जबकि कुछ शेष जमीनों का कब्जा किसानों की फसल कटने के बाद लिया जाएगा. निरीक्षण के दौरान सांसद अनिल फिरोजिया ने बताया कि करीब 36 वर्ष पहले वर्ष 1990-91 में गंभीर डेम योजना बनाई गई थी, जिससे आज तक क्षेत्र को पानी मिल रहा है. अब सिलारखेड़ी योजना आने वाले 50 से 100 वर्षों तक क्षेत्र में पेयजल और शिप्रा नदी के प्रवाह को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
जून 2027 तक परियोजना को पूरा करने का प्लान
उन्होंने बताया कि फिलहाल परियोजना का लगभग 35 से 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है. लक्ष्य है कि इसे जून 2027 तक पूर्ण कर लिया जाए. हालांकि कार्य की गति को देखते हुए उम्मीद है कि इसे तय समय से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा. आने वाले जून महीने में इसकी पहली टेस्टिंग भी किए जाने की तैयारी है.
सांसद ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का संकल्प है कि सिंहस्थ-2028 में श्रद्धाल शिप्रा मैया के स्वाभाविक और स्वच्छ जल में स्नान करें. सिलारखेड़ी परियोजना उसी संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.






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