गेहूं का समर्थन मूल्य 2700 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
समर्थन मूल्य पर गेहूं विक्रय की पंजीयन की तिथि बढ़ाने की मांग समय पूर्व गिरधारी नहीं होने तथा सर्वर डाउन होने से प्रदेश भर में कई किसान पंजीयन से वंचित रह गए।
क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा एवं स्थानीय किसान नेताओं ने शासन-प्रशासन से महत्वपूर्ण मांगें उठाई हैं। किसानों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में सहकारी समितियों में ऋण जमा करने की अंतिम तिथि बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है, साथ ही गेहूं की उपज का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2700 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बबलू जाधव रामस्वरूप मंत्री चंदनसिंह बड़वाया शैलेंद्र पटेल प्रवीण ठाकुर ने कहा कि क्षेत्र में कई किसानों की फसल अभी भी खेतों में खड़ी है। फसल की कटाई, मड़ाई और बिक्री में समय लगता है। ऐसे में यदि ऋण जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च ही रखी जाती है, तो अनेक किसान समय पर ऋण नहीं चुका पाएंगे और अनावश्यक रूप से डिफाल्टर घोषित हो जाएंगे, जिसके कारण उन्हें अतिरिक्त ब्याज का भार उठाना पड़ेगा। इसलिए किसानों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सहकारी समितियों में ऋण जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च से बढ़ाकर 30 मई तक की जानी चाहिए।
किसान नेताओं ने यह भी मांग की कि बढ़ती लागत, खाद-बीज और डीजल के दामों को देखते हुए गेहूं का समर्थन मूल्य कम से कम 2700 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं बबलू जाधव, रामस्वरूप मंत्री, चंदन सिंह बड़वाया, शैलेंद्र पटेल एवं प्रवीण ठाकुर ने कहा कि यदि किसानों की इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो किसानों को आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। उन्होंने शासन से आग्रह किया कि किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द राहत प्रदान की जाए।
किसान नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार किसानों की वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए उनके हित में उचित निर्णय लेगी।






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