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मालवा-निमाड़ को मिलेगी नई रेल रफ्तार,इंदौर-खंडवा ब्रॉडगेज को पर्यावरण और वन मंत्रालय से मंजूरी

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इंदौर-खंडवा ब्रॉडगेज रेल परियोजना को पर्यावरण और वन मंत्रालय से प्रारंभिक मंजूरी मिल गई है. इसके बाद महू से मुख्तियार बलवाड़ा के बीच नई रेल लाइन का निर्माण जल्द शुरू होने की संभावना है. करीब 454 हेक्टेयर वनभूमि पर बनने वाली इस परियोजना में सुरंगों और पुलों के जरिए आधुनिक रेल मार्ग तैयार किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मालवा और निमाड़ क्षेत्र की कनेक्टिविटी और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी.

पर्यावरण और वन मंत्रालय से इंदौर-खंडवा ब्रॉडगेज रेल परियोजना को प्रारंभिक अनुमति मिलने के बाद मध्य प्रदेश में एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आगे बढ़ने की स्थिति में आ गया है. लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना को मालवा और निमाड़ क्षेत्र के आर्थिक विकास की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है. नई ब्रॉडगेज लाइन महू से मुख्तियार बलवाड़ा के बीच बनाई जाएगी. इसके लिए रेलवे को लगभग 454 हेक्टेयर वनभूमि के उपयोग की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है. इस स्वीकृति के साथ अब निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है. परियोजना को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन को बढ़ावा देने वाला कदम माना जा रहा है.

राजनीतिक दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण है. पिछले कई वर्षों से स्थानीय जनप्रतिनिधि और उद्योग जगत इस रेल मार्ग को जल्द शुरू करने की मांग करते रहे हैं. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद यह परियोजना अब जमीनी स्तर पर आगे बढ़ सकेगी. स्थानीय सांसद शंकर लालवानी का कहना है कि इस रेल लाइन से इंदौर और निमाड़ के बीच आवागमन आसान होगा और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी. यह क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएगा. इससे रेल रफ्तार के साथ ही जन सामान्‍य को बड़ी सुव‍िधाएं मिलेंगी.

परियोजना को मिली प्रारंभिक मंजूरी
पर्यावरण और वन मंत्रालय की स्वीकृति के बाद रेलवे को वनभूमि उपयोग की सैद्धांतिक अनुमति मिल चुकी है. इस अनुमति के तहत 10 मार्च 2026 से 9 जून 2026 के बीच निर्माण कार्य शुरू करने की अस्थायी अनुमति दी गई है. रेलवे को परियोजना के लिए पर्यावरणीय शर्तों का पालन करना होगा. इनमें पेड़ कटाई, पौधारोपण और मिट्टी संरक्षण से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं.

जंगल की जमीन पर बनेगी रेल लाइन
इस परियोजना के तहत रेलवे लगभग 454 हेक्टेयर वनभूमि पर रेल लाइन बिछाएगा. इसमें इंदौर वनमंडल की लगभग 407 हेक्टेयर और खरगोन जिले के बड़वाह वनमंडल की करीब 46 हेक्टेयर जमीन शामिल है. रेल लाइन निर्माण के लिए लगभग 1.34 लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है. हालांकि करीब 17 हजार पेड़ों को सुरक्षित रखने की योजना बनाई गई है.

सुरंगों और पुलों से बनेगा आधुनिक रेल मार्ग
यह रेल लाइन पहाड़ी और वन क्षेत्र से होकर गुजरेगी. इसलिए रेलवे ने कई तकनीकी संरचनाएं बनाने की योजना बनाई है. करीब 20 किलोमीटर के हिस्से में कुल 16 सुरंगें बनाई जाएंगी. इसके अलावा कई स्थानों पर वायडक्ट यानी ऊंचे पुल भी बनाए जाएंगे. इससे रेल मार्ग को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की कोशिश की जाएगी.

पर्यावरणीय संतुलन पर भी जोर
परियोजना को मंजूरी देते समय पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. रेलवे को पौधारोपण, वर्षा जल संचयन और ऊर्जा दक्षता से जुड़े उपाय अपनाने होंगे. ग्रीन रेलवे कॉरिडोर प्रबंधन योजना तैयार करना भी अनिवार्य किया गया है. इसके तहत स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे.

वन विभाग को 150 करोड़ रुपये जमा
रेलवे ने इस परियोजना के लिए वन विभाग को करीब 150 करोड़ रुपये जमा कराए हैं. इसमें वनभूमि के बदले मुआवजा, पेड़ों की नेट प्रेजेंट वैल्यू और पौधारोपण के लिए अलग-अलग राशि शामिल है. इन पैसों से करीब 1000 हेक्टेयर क्षेत्र में नए पौधे लगाए जाएंगे. यह पौधारोपण मुख्य रूप से धार और झाबुआ जिलों में किया जाएगा.

क्षेत्रीय विकास की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि इंदौर-खंडवा ब्रॉडगेज रेल लाइन बनने से मालवा और निमाड़ क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी. इससे व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है. यदि परियोजना निर्धारित समय और पर्यावरणीय मानकों के अनुसार पूरी होती है तो यह क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर का भी उदाहरण बन सकती है.

Ramswaroop Mantri

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