अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

स्विस बैंकों में बढ़ रहा है भारतीय काला धन ?

Share

सुसंस्कृति परिहार 

लोकसभा चुनाव 2014  अभियान के दौरान मोदी ने दावा किया था कि, “एक बार ये जो चोर-लुटेरों के पैसे विदेशी बैंकों में जमा हैं ना, उतने भी हम ले आए ना, हिंदुस्तान के एक-एक ग़रीब आदमी को मुफ़्त में 15-20 लाख रुपये यूं ही मिल जाएँगे. इतने रुपये हैं.” जन-जन ने इसके लिए खाते खुलवाए पर15-20लाख तो दूर , खाते खोलने में हुई जमा राशि भी जप्त हो गई।सबसे बड़ी बात कांग्रेस ख़ासतौर पर सोनिया गांधी और राहुल पर कालेधन के आरोप लगाए गए थे वे निराधार सिद्ध साबित हुए।कहा तो यहां तक गया कि वे इटली भाग जाएंगे।पर भागे बैंक लूटकर गुजरात के उनके दोस्त।
अब खबर आ रही है कि  2020 के अंत तक  स्विस बैंक में भारतीयों का धन बढ़कर 20,700 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है जो साल 2019 के अंत तक 6,625 करोड़ रुपये था। जबकि दो साल में यहां भारतीयों के धन में कमी देखी गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले 13 साल में जमा की गई रकम के आंकड़ों के हिसाब से यह उच्चतम है।यह धन कहां से आया सरसरी तौर पर यही समझ बनती है कि कोरोनावायरस काल में प्रवासी मजदूरों के नाम हुएअनाप- शनाप चंदे, पाज़ीटिव निगेटिव के खेल,दवाओं, इंजेक्शन और आॅक्सीजन की कालाबाजारी के साथ विदेशों से आई भारी भरकम धनराशि से आपदा अवसर का भरपूर लाभ लिया गया ।जब पी एम केयर फंड का हिसाब नहीं दिखाया जा सका तो फिर इस अदृश्य संपदा का कैसा हिसाब? देश में अनगिनत शासकीय संस्थानों और जमीनों की बिक्री पेट्रोल,डीजल, गैस की लूटमार के साथ मंहगाई के जो खेल अब भी जारी है लगता है इसी से प्राप्त अकूत धन में से प्राप्त हिस्सेदारी ही ने स्विस बैंक में धन बढ़ाया है। कहां काला धन लाने की बात थी और कहां लूट का धन यहां पहुंचाया गया ।
  स्वाभाविक है, काला धन वापस लाने का दावा करने वालोें के लिए यह ख़बर बेचैन कर गई । वहीं विपक्ष ने भी इस बढ़े धन पर सवाल पूछना शुरू किया तो वित्त मंत्रालय की ओर से जो जवाब आया वह संतोषजनक कतई नहीं है ।अपनी सरकार के बचाव में दिया हुआ एक लापरवाह बयान है।  ,वित्त मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि मीडिया रिपोर्टें इस तथ्य की ओर इशारा करती हैं कि रिपोर्ट किए गए आंकड़े बैंकों द्वारा स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) को बताए गए आधिकारिक आंकड़े हैं. यह आंकड़े स्विट्जरलैंड में भारतीयों द्वारा रखे गए कथित काले धन की मात्रा का संकेत नहीं।इसके अलावा इन आंकड़ों में वह रकम भी शामिल नहीं है जो भारतीयों, एनआरआई या अन्य लोगों के पास स्विस बैंकों में तीसरे देश की संस्थाओं के नाम पर हो सकता है.

हालांकि 2019 के अंत से ग्राहकों की जमा राशि वास्तव में गिर गई है. न्यासी के माध्यम से रखा गया धन भी 2019 के अंत से आधे से ज्यादा हो गया है. सबसे बड़ी वृद्धि ‘ग्राहकों से बकाया अन्य राशि’ में है, जो कि बॉन्ड, सिक्योरिटीज और अलग-अलग अन्य वित्तीय इंस्ट्रूमेंट्स के रूप में हैं.’

 भारत सरकार ने काले धन के खिलाफ पिछले छह सालों में बड़ा अभियान छेड़ रखा है, लेकिन इसमें अहम सफलता हाथ नहीं लगी है. अधिकारियों का कहना है कि विदेश में खाताधारकों के रिकॉर्ड का अन्य दस्तावेजों से मिलान किया जाएगा. संदिग्ध लेनदेन या बिना जानकारी धन जमा करने पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी.इस तरह का अगला आदान-प्रदान सितंबर 2021 में संभावित है।

ज्ञात हो अक्टूबर 20 में काले धन पर बंद लिफाफा सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में सरकार की तरफ से काले धन पर तीन-तीन लिफाफे सौंपे गए. लिफाफा तो नहीं खुला लेकिन कोर्ट ने सीबीआई से लेकर ईडी तक को जल्द से जल्द जांच के लिए कह दिया. अगर सब कुछ ठीक रहा तो 5 महीने में काले धन पर जांच की एक मुकम्मल रिपोर्ट आ जाएगी लेकिन वह आज तक नहीं आई ।

बैंकर्स और नियामक अधिकारियों ने कहा है कि खाताधारकों की लिस्ट में ज्यादतर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों, अमेरिका, ब्रिटेन, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिकी देशों में रहने वाले भारतीय और बिजनेसमैन हैं. बैंकरों ने स्वीकार किया कि कभी पूरी तरह से गोपनीय रहे स्विस बैंकों के खातों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर शुरू हुई मुहिम के बाद इन खातों से काफी पैसे निकाले गए. इनमें से कई खाते बंद भी हो गए. 2018 में बंद कराए गए खातों की जानकारी भी मिली है.

 जिन लोगों के नाम केंद्र ने पहले सार्वजनिक किए थे, उनमें डाबर कंपनी के पूर्व कार्यकारी निदेशक प्रदीप बर्मन, राजकोट के कारोबारी पंकज चिमनलाल लोढ़िया और गोवा की खनन कंपनी टिम्बलो के मालिक राधा एस टिम्बलो शामिल है।कहते हैं बंद लिफाफे में जो नाम हैं उनमें भाजपा से जुड़े गुजरात के नेता और उद्योगपति बड़ी संख्या में है।

मतलब तो यही समझा जाना चाहिए  कि कालेधन के नाम पर जो भाजपा ने जनता को 15लाख देने का वादा किया वह कांग्रेस नेताओं को बदनाम करने के लिए ही था ।असल बात तो यही है कि तमाम जमा धन का बड़ा हिस्सा गुजरात एंड कंपनी का ही है और अभी जिस बढ़ोतरी की बात हुई है उसमें भी यही कारोबारी शामिल हैं । वित्त मंत्रालय इसीलिए गोलमोल जवाब देकर बचने की कोशिश कर रहा है। बहरहाल यह बात तो साफ है भाजपा की कथनी करनी में जमीन आसमान का अंतर है। मर्ज बढ़ता ही गया ज्यों ज्यों दवा की।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें