शशिकांत गुप्ते इंदौर
पैट्रोल डीजल महंगा किया जा रहा है।महंगाई पर शोर शराबा करके समय बर्बाद करने के बजाए,विकल्प खोजों।विकल्प मतलब वैकल्पिक व्यवस्था की तलाश करों।यहाँ विकल्प शब्द आशय आर्थिक तंगी से बचने के लिए विभिन्न तरीक़े ढूढने से है। राजनीति में विकल्प शब्द तो अहंकार का प्रतीक हो गया है।अहंकार के भ्रम में यह कहा जाता है कि, कोई विकल्प है ही नहीं?बहरहाल पैट्रल डीजल का विकल्प है।Cycle साइकिल।
साइकिल चलाने से सेहत भी बनी रहेगी। आबोहवा में प्रदूषण भी नहीं होगा।यह उद्गार सयोंग से योग की साधना को व्यापार में तब्दील करने वाले लालाराम के हैं।साइकिल के चक्रों में वायु ही तो भरी जाती है।साइकिल का अविष्कार,महान वैज्ञानिक न्यूटन द्वारा ईजाद किए गए गति के नियम के आधार पर हुआ है।Cycle का अनुवाद होता है, चक्र।चक्र शब्द से सीधे काल का बोध होता है।देश के काल चक्र ने अभी महज सात वर्षो से गति पकड़ी है।इसके पूर्व तो देश में कुछ भी था ही नहीं।ऐसा अनुसंधान विदर्भ की राजधानी स्थित विश्वविद्यालय में प्रशिक्षण प्राप्त अनुयायियों द्वारा किया गया है।वैज्ञानिक न्यूटन के नियमानुसार कोई भी जड़ वस्तु तबतक चलती रहती है,जबतक उसे कोई रोक न हो।
दावे के साथ कह सकतें हैं कि अच्छे दिन की जड़ता को सात वर्ष पूर्व ही गति मिली है। अच्छेदिनों के चक्र की शुरुआत हो गई है,यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी जबतक कोई विरोधी अवरोध न पैदा करें।अच्छे दिनों को प्रक्रिया “अब की बार” के आश्वासन के धक्के से शुरू हो गई है।जिस रफ्तार से अच्छेदिन आने की शुरुआत हुई है,इसी गति से निश्चित ही अगले पचास वर्षो में तो अच्छे दिन आ ही जाएंगे?न्यूटन के गुरुत्वाकषर्ण के नियम के अनुसार कोई भी वस्तु ऊपर से नीचे गिरती है तो वह सीधे धरातल पर ही आती है।यह नियम विज्ञान की परिधि से बाहर आकर राजनीति की गिरफ्त में आ गया है।निर्मलमना अर्थशास्त्री की नीति ने न्यूटन की इस नियम को उलट दिया है।वर्तमान अर्थनीति महंगाई को नीचे से चाहे जितनी ऊपर ले जा सकती है।
Good governance के दावे के कारण महंगाई तो नीचें नहीं आ सकती है। आमजन अर्थ के अभाव निश्चित ही जमींदोज हो रहा है।ऐसा सत्ता के विरोधी अर्थ शास्त्रियों का मानना है?धर्म के लिए सबसे बड़ा अवरोध विज्ञान है।वर्तमान में धर्मावम्बली लोग सत्तासीन है।महादेव के नाम राशि (शिवराज) सूबेदार के सूबे में शिक्षा मंत्री प्रशंसा के पात्र है।हाल ही में बच्चों की शिक्षा की समस्याओं को लेकर कुछ पालक स्थानीय शिक्षा मंत्री से मिले।शिक्षा मंत्री से सीधे कह दिया मृत्यु को गले लगलो अर्थात मर जाओ।कुछ विघ्नसंतोषी समाचार माध्यमो को सनसनीखेज खबर फैलाने का अवसर ही मिल गया।
मंत्रीजी जब स्पष्टीकरण देंगे तब यही कहेंगे कि, मेरे व्यक्तव्य को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया।पालक कहेंगे कि मंत्री महोदय ने हमें दुत्कार दिया।मंत्री महोदय के दार्शनिक मानसिकता को पहचानें बगैर ही पालकों और कुछ समाचार माध्यमो ने बात बतंगड़ बना दिया।मंत्री महोदय का आशय यह हो सकता है कि,बच्चों की पढ़ाई की चिंता छोड़ो, चिंता चिता समान होती है।चिंता करने के बजाए इहलोक को त्यागकर परलोक,सिधार जाओ।तमाम तरह की मोहमाया से युक्त समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।पेट्रोल और डीजल के बिक्री से राजस्व प्राप्त हो रहा है,उससे ही तो विकास होगा।अभी तो कुछ लाख करोड़ ही इकठ्ठे हुएं है।देश में जहाँ जहाँ Good governance के दिशा निर्देश से संचालित होने वाली सरकारें हैं,वहाँ कमाल ही हो रहा है।वैक्सीन का टीकाकरण की संख्या तारीफेकाबिल है।इसपर भी कुछ विरोधी मानसिकता वाले संख्या शास्त्रियों का कहना है।टीकाकरण के जो आंकड़े प्रसारित किए जा रहें हैं यह प्रचार मात्र है।
असल में यह कहावत चरितार्थ हो रही है कि, “अंधा बांटे रेवड़ी अपने अपने ही दे”सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि, कोरोना महामारी से मृतकों के मुवावजा दिया जाए।सरकार के पास पैसा नहीं है। ऐसा व्यक्तव्य निर्मलमना अर्थशास्त्री ने कठोर मन से दिया है।न्यायालय को सोचना चाहिए सरकार अपनी मजबूती के लिए प्रचार कर रही है।प्रचार के लिए कितना धन व्यय होता है?यह समझना चाहिए।सरकार मजबूत होगी तो मुवावजा देने के लिए सक्षम होगी।इसपर भी विघ्नसन्तोषीयों द्वारा प्रधान सेवक के फोटो से सुशोभित पोस्टरों की आलोचना की जा रही है।इन पोस्टरों पर बेतहाशा खर्च किया जा रहा है?सरकार यदि अपनी उपलब्धियों का प्रचार ही नहीं करेगी तो आमजन को कैसे मालूम होगा कि सरकार की उपलब्धियां क्या है।
अभी तो सिर्फ सात वर्षों की उपलब्धियों से विरोधी घबरा रहें हैं अगले पचास वर्षों में विरोधियों की क्या अवस्था होगी कहना असंभव है?हम जिएंगे पचासों साल,हर साल की दिन होंगे पचासों साल।न्यूटन के गति का तृतीय नियम : ‘प्रत्येक क्रिया के समान एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है।विपरीत क्रिया भी उसी तीव्र गति के साथ ही होती है।इस नियम को कीचड़ फैलाने वालों को और दूसरों पर सतत कीचड़ उछालने वालों को समझ लेना चाहिए परिणाम क्या हो सकता है?वैसे नाली और कीचड़ का अंतरंग सम्बंध है।कहावत है कि, नाली में पत्थर फैंकने वालों पर कीचड़ के छींटे उड़तें ही हैं।यहाँ पर फैंकने का मतलब है,पत्थर फैंकना से है।कोई अन्यथा न ले।इनदिनों फैंकने से फैकु आशय निकाला जाता है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





