क्रांति में किसी के हाथ में कलम होती है,
किसी के हाथ में किताब होती है,
किसी के हाथ में रंग और ब्रश होते हैं,
कोई अपनी कविता से अपने लेख से अपनी बात कहता है,
किसी के हाथ में बंदूक होती है,
किसी की जबां पर कविता होती है
किसी के हाथ में बेचने वाली किताबें होती हैं,
कोई मजदूरों में काम करता है,
कोई किसानों में काम करता है,
कोई जन संगठन बनाने में काम करता है,
कोई क्रांति के लिए अखबार, पत्रिकायें, पुस्तकें छापता है,
कोई क्रांति की पुस्तकें, पत्रिका, अखबार बांटने का काम करता है,
कोई भाषण के जरिए अपना फर्ज निभाता है,
कोई क्रांतिकारी कविताएं गाकर क्रांति में अपना योगदान देता है,
कोई फांसी के तख्ते पर चढ़कर क्रांति की बात कहता है,
कोई फांसी के फंदे पर झूल जाता है क्रांति के लिए,
कोई अपनी जिंदगी जेल में काट देता है क्रांति के लिए,
कोई नाटक खेल कर अपनी बात कहता है,
कोई दवाई बांटकर क्रांति में अपनी जिम्मेदारी निभाता है,
कोई डॉक्टर बंद कर लोगों का इलाज कर प्रांत की चेतना को आगे बढ़ाता है
,कोई क्रांति के लिए अपनी पूरी जिंदगी देकर क्रांति की शमा जलाता है,
कोई होल टाइमर होता है, कोई पार्ट टाइमर होता है,
कोई शारीरिक श्रम क्रांति के लिए करता है,
कोई मानसिक और बौद्धिक श्रम करता है,
कोई क्रांतिकारी बहस करके क्रांति को नए आयाम प्रदान करता है,
कोई आर्थिक मदद करके क्रांति के कारवां को आगे बढ़ाता है,
कोई मीडिया में काम करके मीडिया के द्वारा
जनता के बीच क्रांतिकारी जागृति लाने का काम करता है,
कोई विचार गोष्ठी और कविता गोष्ठी करके क्रांति के मार्ग को आगे बढ़ाता है,
एक संगठित कर्म है क्रांति,
बहुत लोगों की जरूरत होती है क्रांति के काम को आगे बढ़ाने में और क्रांति करने में।
मुनेश त्यागी
वरिष्ठ अधिवक्ता,मेरठ सिविल कोर्ट मेरठ,संपर्क-9837151641
संकलन-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण ‘,मोबाईल नम्बर 9910629632




