अजय असुर
नरेंद्र मोदी ने 2013 में रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा था- “एक कुत्ते के बच्चे के भी गाड़ी के नीचे आ जाने पर दुख होता है”। उनके बयान पर सियासी बवाल उठा था। इस सवाल पर कि कुत्ते का बच्चा कौन है? ये अलग बात है कि पीएम बनने के बाद मोदी को ऐसी घटनाएं नज़र नहीं आतीं और न उन्हें दर्द होता है। भारत में 67% कैदी विचाराधीन हैं। ऐसे हर 3 में से 1 एससी/एसटी वर्ग के हैं। यानी 34% झारखंड में हुए एक अध्ययन के मुताबिक 59% विचाराधीन कैदियों की पारिवारिक मासिक आय 3000 रुपये से कम है।लगभग 97% विचाराधीन कैदियों की आय 5000 रुपये प्रति माह से भी कम है।
झारखंड की स्टडी बताती है कि उनमें से 57% को उनके घर से नक्सल/ नक्सलियों से सहानुभूति रखने के आरोप में पकड़ा गया था।
फिर क्या होता है? इन ग़रीब विचाराधीन कैदियों को छुड़ाने के लिए उनका परिवार ज़मीन, मकान, गहने, बर्तन-भांडे सब बेचकर सड़क पर आ जाता है।
और जेल में? भीमा कोरेगांव मामले में हिरासत में लिए गए एक वरिष्ठ वकील को पुणे में पुलिस वाले तब तक झापड़ मारते रहे, जब तक वे अस्पताल नहीं पहुंच गए।
84 साल के दिवंगत फादर स्टेन स्वामी ने भी पुलिस से पूछा था- क्या अत्याचार पुलिस की परंपरा है? फिर भी हमारी सरकार हमें बताती है कि भारत बुद्ध और गांधी की धरती है।
हम जयंती, पर्व मनाते हैं, लेकिन एक अदद सवाल का माक़ूल जवाब नहीं ढूंढ पाते कि गाड़ी के नीचे अक्सर आ जाने वाला कुत्ते का बच्चा आखिर है कौन?
खुद से पूछिए। अपने ईमान से पूछिए। जवाब ज़रूर मिलेगा। फिर ख़ुद को आईने में देखिए। आपका अक्स बताएगा कि आप कितने बुजदिल हैं।
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पहले वे आये कम्युनिस्टों के लिएऔर मैं कुछ नहीं बोलाक्योंकि मैं कम्युनिस्ट नहीं था।फिर वे आये ट्रेड यूनियन वालों के लिएऔर मैं कुछ नहीं बोलाक्योंकि मैं ट्रेड यूनियन में नहीं था।फिर वे आये यहूदियों के लिएऔर मैं कुछ नहीं बोलाक्योंकि मैं यहूदी नहीं था।फिर वे मेरे लिए आयेऔर तब तक कोई नहीं बचा थाजो मेरे लिए बोलता।
*- पास्टर निमोलर*जर्मन कवि और फासीवाद विरोधी कार्यकर्ता निमोलर की यह कविता आज के समय में भारत पर बिलकुल सही साबित हो रही है। *यूं ही मुर्दे बने तमाशा देखते रहें तो कल मत कहना कि हम ही क्यूँ? इस गलतफहमी में मत रहिएगा कि आप बंच जाएंगे। यदि मुर्दे होकर पड़े रहेंगे तब कोई बात नहीं आप सुरक्षित हैं। अन्यथा एक-एक करके सबकी बारी आएगी। समय रहते चेत जाएं और इस फाँसीवादी व्यवस्था को समय रहते नहीं उखाड़ फेंका तो आप भी नहीं बचेंगे।*
*फादर स्टेन स्वामी हम शर्मिंदा हैं, क्योंकि नहीं हम जिंदा है। हम मुर्दो को माफ करिएगा, यदि हम जिंदा होते तो यकीनन आप आज हमारे साथ होते। हम मुर्दो को माफ करिएगा…..*
*अजय असुर**राष्ट्रीय जनवादी मोर्चा उ. प्र.*





