क्सीन के सिलसिले में सरकार ने जो दावा किया है वह गुमराह कुन है
हिसाम सिद्दीकी
नई दिल्ली! जबसे मुल्क में मोदी सरकार बनी है, सरकार पर झूट बोलने और देश को गुमराह करने के इल्जाम अक्सर लगते रहे हैं। अब कोविड वैक्सीन के सिलसिले में सरकार ने जो दावा किया है वह इंतेहाई गुमराह कुन है। दावा किया गया कि मुल्क में 32 करोड़ 36 लाख लोगों को टीका लगाया जा चुका है। जो अमरीका से भी ज्यादा है इस तरह हम अमरीका से आगे निकल गए। जबकि भारत में अमरीका से बत्तीस दिन बाद सोलह जनवरी से टीकाकारी का काम शुरू हुआ है। इस दावे को वजीर-ए-आजम नरेन्द्र मोदी, होम मिनिस्टर अमित शाह और उनकी वजारत के कई वजीरों ने बढ-चढ कर ट्वीट किया।
सरकार ने इस मामले में देश को पूरी तरह गुमराह किया और यह नहीं कहा कि हमने एक सौ चालीस (140) करोड़ की आबादी में सिर्फ बत्तीस करोड़ छत्तीस लाख (32.36 करोड़) लोगों को टीका लगाया है। वह भी पहली खुराक, हकीकत यह है कि देश में टीके की दोनों खुराकें सिर्फ साढे चार (4.5) फीसद लोगों को दी जा सकी है। जहां तक अमरीका का सवाल है अमरीका की कुल आबादी तैंतीस (33) करोड़ है इसमें से बत्तीस करोड़ तैंतीस लाख (32.33 करोड़) लोगों को टीके की दोनों खुराकें लग चुकी हैं। यानी मुल्क में सिर्फ सरसठ (67) लाख लोग ही टीका लगने से बचे हैं। मोदी सरकार यह नहीं बताती है कि अमरीका और दूसरे मुल्कों की आबादी कितनी है। उनमें कितने लोगां को टीका लगा है और भारत की आबादी कितनी है उसमें कितने लोगों को टीका लगा है।
बस यह दावा कर दिया गया कि देश में अमरीका से ज्यादा टीके लग गए।मोदी सरकार ने दावा तो कर दिया कि हम अमरीका के मुकाबले ज्यादा लोगों को टीके लगाकर दुनिया के मुल्कों में दूसरे नम्बर पर आ गए हैं। पहले नम्बर पर कौन मुल्क है सरकार ने तो नहीं बताया लेकिन पता चला है कि पहले नम्बर पर चीन है। भारत जिन मुल्कों से अपना मवाजना (तुलना) कर रहा है उनमें इंग्लैण्ड है जहां की आबादी सात करोड़ सरसठ लाख है। उनमें से छः करोड़ अस्सी लाख को टीके की दोनों खुराके लग चुकी हैं। इटली की आबादी छः करोड़ है उसमें चार करोड़ छियान्नवे लाख (4.96 करोड़) को टीका लग चुका है। जर्मनी की आबादी आठ करोड़ है जिनमें सात करोड़ चौदह लाख को टीका लग चुका है। अमरीका की आबादी तैंतीस करोड़ है जिनमें बत्तीस करोड़ तैंतीस लाख लोगों को टीका लग चुका है। भारत की आबादी तकरीबन 140 करोड़ है उनमें अभी तक बत्तीस करोड़ छत्तीस लाख को ही टीका लगा है। इसके बावजूद आबादी की बात छुपाकर सरकार सिर्फ गिनती बताकर अपनी पीठ ठांक रही है। मोदी सरकार मुख्तलिफ रियासतों की रिपोर्ट की बुनियाद पर दावा कर रही है उन रिपोर्टों में ही बड़े पैमाने पर घपले हैं। मध्य प्रदेश समेत बीजेपी सरकारों वाली रियासतों में घपले ज्यादा किए गए हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने इक्कीस (21) जून को दावा किया कि प्रदेश में सोलह लाख लोगों को टीके लगाने का रिकार्ड कायम किया गया है। फिर अट्ठाइस जून को दावा कर दिया कि अब तक दो करोड़ बीस लाख पचास हजार लोगों को टीका लगा दिया गया है। यह भी एक रिकार्ड है।
बाद में पता चला कि इस तादाद में तो घपला ही घपला है। पांच सौ पचपन आद्दार कार्ड ऐसे मिले जिनके आद्दार कार्ड नम्बर पर दो-दो लोगों को टीका लगाया जाना दर्ज किया गया है। नव्वे आद्दार कार्डों के नम्बर पर तीन-तीन लोगों के नाम चढा दिए गए थे।मध्य प्रदेश में एक मजहकाखेज (हास्यास्पद) बात यह हुई कि टीका लगाए जाने वाले लोगों के नाम के साथ जो आद्दार कार्ड नम्बर लिखे गए वह आद्दार तमिलनाडु, महाराष्ट्र, झारखण्ड, छत्तीसगढ और उड़ीसा के लोगों के हैं। एक आद्दार कार्ड पर तो सोलह लोगों को वैक्सीन लगा दी गई। वह कार्ड होल्डर कोलार का रहने वाला है। तमिलनाडु के नागराज नाम के एक शख्स के आद्दार कार्ड के नम्बर के साथ टीका लगवाने वाले का नाम रेखा लिखा है। इसी तरह रायपुर के हर्ष नागदेव के कार्ड का नम्बर भोपाल के दो लोगों के नाम के साथ दर्ज है। भोपाल के सुलेमान के नाम के साथ जो कार्ड नम्बर लिखा है उसके आखिरी चार नम्बर 9999 है। यह कार्ड सतना के रहने वाले राज नाम के किसी शख्स का है जो कभी भोपाल आए ही नहीं। दैनिक भास्कर ने मध्य प्रदेश में सिर्फ दस हजार लोगों की जांच की उनमें इतने बड़े पैमाने पर घपले सामने आए हैं।
अगर सरकार के दावे के मुताबिक पूरे सवा दो करोड़ टीका कारी किए हुए लोगों की जांच की जाए तो शायद नव्वे फीसद मामले फर्जी पाए जाएंगे। अब ऐसी रिपोर्टों की बुनियाद पर मोदी सरकार दावा कर रही है कि टीका कारी के मामले में भारत अमरीका से आगे और दुनिया में नम्बर दो पर पहुंच गया है।वैक्सीन की हालत यह है कि कोवैक्सीन की अभी तक वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) ने तस्लीम नहीं किया है। लेकिन लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है।
भारत की दूसरी वैक्सीन है कोविशील्ड जो सीरम कारपोरेशन आफ इंडिया बना रहा है। यह वैक्सीन आक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनिक की रिसर्च की बुनियाद पर बनी है। इसके बावजूद यूरोपिय यूनियन ने कह दिया है कि कोविशील्ड की वैक्सीन लगवा कर अगर कोई शख्स यूरोपिय यूनियन मुल्कों का वीजा हासिल करने की कोशिश करेगा तो उसे वीजा नहीं दिया जाएगा। कोविशील्ड बनाने वाली कम्पनी सीरम इंस्टीट्यूट केेेे सीईओ अदार पूनावाला आजकल लंदन में है। उन्होने कहा है कि यूरोपिय यूनियन ने जो एतराज किया है वह मसला जल्द ही हल कर दिया जाएगा। अगर यह दोनों वैक्सीन ज्यादा से ज्यादा लोगों को लगा दी गईं तो आलमी सतह पर उनकी क्या हैसियत होगी?





