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छाेटी झील… पानी दूषित, लेकिन इसी झील ने 30 साल में 110 नेशनल खिलाड़ी दिए, जिन्होंने 2500 से ज्यादा पदक जीते हैं

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भोपाल

यह है छाेटी झील… इसका पानी भले ही दूषित हाे, लेकिन इसने पिछले 30 साल में देश काे 110 नेशनल कयाकिंग-केनाेइंग खिलाड़ी दिए हैं, जिन्हाेंने 2500 से ज्यादा पदक जीते हैं। इनमें 44 खिलाड़ी इंटरनेशनल लेवल पर खेले और पदक जीते, जिनमें से 28 खिलाड़ी वाे भी शामिल हैं, जिन्होंने 2018 एशियाड में हिस्सा लिया था। इन 110 में से 65 ऐसे भी हैं जाे स्पाेर्ट्स काेटे से मप्र पुलिस, रेलवे, सीआरपीएफ, बीएसएफ में जाॅब कर रहे हैं। इस झील में 1991 में बीएस कुशवाह ने इस खेल की शुरुआत की थी। यह झील एक बार फिर चर्चा में है। यहां की खिलाड़ी प्राची यादव ने टाेक्याे पैरालिंपिक के लिए क्वालिफाई किया है, जाे इन दिनाें सुबह और शाम और दोपहर अभ्यास में जुटी हैं।

नेशनल खिलाड़ी

संताेष, विमल कनाेजिया, सुरेश, रामबाबू, आलाेक, पारुल, प्रद्युम्न, गरिमा, बादल, किरणा बर्डे, अशाेक, अशाेक, सुनील, सुनील कीर, गनपत कीर, यासिर, गंगाराम, आकाश, जीवन , विक्रम, मुकेश, जीतेंद्र, पवन, सतेंद्र, नरेंद्र, शक्ति, रवींद्र, विजय, विजय, दीपक, अरुण, राहुल, ताैफिक, नितिन, उमेश, भारत, राजन, राहुल, सनी, वीरेंद्र बाथम, निर्भय, आशुताेष प्रताप, मनमाेहन, अनिल, पुष्कर, अजय, ननाओ, सनामतुम, भुवन, नेरशा, साैरभ, आदिल, स्टेनली, गाेलू, विद्या, ज्याेति, नाैवा, सतीश, जीशान, ज्ञानेश्वर, अभिषेक, रविकांत, आर्यन, सुमबित, अंजली, सुशीला।

इंटरनेशनल खिलाड़ी

नवीन साहू, अभिषेक भट्टाचार्य, महेश विश्वकर्मा, विनाेद मिश्रा, अंकित पचाैरी, अभय सिंह, आयुष राजावत, कुलदीप कीर, सत्यपाल, रामकृष्ण मिश्रा, महेंद्र बाथम, आकाश बाथम, वीरेंद्र बाथम, शुभम घाेष, दिलीप नेगी, रवींद्र कुमार, वीजेंद्र खासा, अतुल मिश्रा, कामिल कय्यूम, धीरज कीर, सुजीत बाथम, अंजली वशिष्ठ, नाजिस, हरीओम, विवेक, मीना देवी, आनंद विश्नाेई, अतुल विश्नाेई, अरुण नंदलाल, चिंगचिंग, ब्रजेंद्र सिंह, साइमन, अबुंग, इनाचाे, थाजा,साेनिया, ओमाेला, कीर्ति केवट, नीतू वर्मा, सरजू, किरन सिंह, नगाव सिंह, और दिमिता और प्राची यादव।

बांस बांधकर जुगाड़ की वॉ बनाई, उसी से पैरालिंपिक तक पहुंची हूं

प्राची यादव

प्राची यादव

मैं मूलत: स्वीमर हूं। मेरे हाथ थोड़े लंबे हैं। इसलिए मेरे सर ने मुझे स्वीमिंग के बजाय कयाकिंग में हाथ आजमाने के लिए कहा। मैं 2018 ग्वालियर से भोपाल आ गई। यहां पर छोटी झील पर डिसेबल खिलाड़ियों के लिए स्पेशल बोट वॉ नहीं थी। फिर मेरे कोच मयंक ठाकुर ने मुझे जुगाड़ की वॉ बनाकर दी। इसमें सपोर्ट के लिए दूसरी ओर बांस बंधा। उसी से मैंने पहले ही टूर्नामेंट गोल्ड जीता। उसी वर्ष मैं वर्ल्ड के लिए चुनी गई। वहां मुझे आठवां स्थान मिला और पैरालिंपिक का रास्ता मिला। टोक्यो में वीएल-2 200 मी में हिस्सा लूंगी। मेरी टाइमिंग 1.3 मिनट की है और इसका गोल्ड रिकॉर्ड 1 मिनट का है। 3 सेकंड का सुधार करना है। मुझे भरोसा है मैं खाली हाथ नहीं लौटूंगी। -प्राची यादव

Ramswaroop Mantri

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