एक बार डाकुओं के एक दल ने कवि सम्मेलन से लौटते हुए कुछ कवियों का अपहरण कर लिया। डाकुओं के सामने कवि बेचारे गिड़गिड़ा कर दुहाई देने लगे कि कोई उनके लिए 100 रूपये की फिरौती भी देकर उन्हें नहीं छुड़ाएगा ! डाकूओं के सरदार ने कहा,कोई बात नहीं,हम अपनी मेहनत बेकार नहीं जाने देंगे और कवियों को हुक्म दिया कि कवि सम्मेलन का आनंद उन्हें भी दिया जाए। कवियों ने सहर्ष एक से बढ़कर एक कविताओं को डाकुओं के सामने प्रस्तुत किया । डाकुओं ने पहली बार जंगल में हुए इस कविसम्मेलन में प्रस्तुत कविताओं का भरपूर आनंद उठाया और अत्यंत खुश होकर उन सभी कवियों को सोने के बहुत से आभूषण प्रदान करके उन्हें आदर सहित विदा किए । सारे कविगण बहुत सारे आभूषण लेकर बहुत खुशी – खुशी अपने घरों की तरफ चल पड़े । यह क्या ? थोड़ी ही देर में डाकुओं का वही दल आकर उनसे अपने दिए गए सारे आभूषणों को लूट लिए । कवियों को आश्चर्य में देख डाकुओं के सरदार ने उनसे कहा कि आपको पुरस्कृत करना हमारा कर्तव्य था और आपको लूटना हमारा पेशा है।
-के एल गौतम,संपर्क – 9910602100
संकलन-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र,संपर्क-9910629632




