भोपाल। प्रदेश में चाहे भाजपा की सरकार हो या कांग्रेस की सभी सरकारों में काबिज हुए सत्ताधीशों के मुखाग्रबिन्द से अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ सख्ती से कदम उठाने के बयान इस प्रदेश की जनता सुनने की आदि हो गई है यही नहीं दिग्विजय सिंह व कमलनाथ के पुत्र मोह के चलते अपनी उपेक्षा से परेशान ज्योतिरादित्य सिंधिया के द्वारा कांग्रेस का दामन छोड़ भाजपा का दामन थामने के बाद जो उधार के सिंदूर से सुहागिन बनकर चौथी बार प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुखाग्रबिन्द से इस प्रदेश की जनता को एक बार नहीं अनेकों बार यह सुनने को मिला कि वह अब मामा अलग मूड में हैं…
उसके राज में भ्रष्ट अधिकारी व राजनेता नहीं चलेगा और माफियाओं को तो वह दस फुट जमीन के नीचे गाढ़ देने की चेतावनी दे चुके हैं लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज मामा के इन शब्दों को चरितार्थ करने में भले ही माफियाओं को जमीन में गाढऩे के लिये नहीं किया हो लेकिन उनके ही राज्य में नेमावर में आदिवासियों को दस फीट जमीन में गाढऩे का काम दबंगों ने कर दिखाया था? लेकिन मजे की बात तो यह है कि इस तरह की घटना घटित होने के बाद भी इस प्रदेश में खूब होहल्ला मचा तो वहीं जब इस प्रदेश की कांग्रेस की १५ महीनों की सत्ता के मुखिया जिन्होंने अपने शासनकाल में गरीब, दलित, आदिवासियों के हितों के लिये कुछ काम नहीं किया यही नहीं उस समय आदिवासी संगठन जयश के नेता विधायक हीरालाल अलावा जो कि कांग्रेस में शामिल हो गये थे उन्होंने भी संविधान की छठवीं अनुसूची को लेकर कमलनाथ व प्रदेश के राज्यपाल को खूब पत्र लिखे लेकिन वह पत्र भी कमलनाथ की शासन की कार्यशैली के चलते जिस प्रकार से वल्लभ भवन को पांचवीं मंजिल को दलाली में मसरूफ रहे कमलनाथ ने विधायक हीरालाल अलावा के उन पत्रों को गंभीरता से नहीं लिया
आज वही कमलनाथ आदिवासी व दलित वर्ग पर हो रहे अत्याचार को लेकर बयानबाजी करने से नहीं चूक रहे हैं बल्कि नेमावर जैसी घटना के बाद एसी से निक लकर पीडि़त परिवारों का हमदर्द बनने का दिखावा करने में लगे हैं यह सब इसलिये हो रहा है कि वह जानते हैं कि अब वह सड़क पर आकर सरकार के खिलाफ कोई प्रभावशाली प्रदर्शन करने की क्षमता उनमें व कांग्रेस पार्टी में नहीं है तभी तो वह यह सब ढोंग करने में लगे हुए हैं, तो वहीं यदा-कदा शराब माफियाओं के खिलाफ भी बयानबाजी करने में कमलनाथ दिखाई देते हैं, शायद उन्हें यह नहीं मालूम की दिग्विजय सिंह के कहने पर प्रदेश के युवा आदिवासियों के हक पर डाका डालकर आदिवासियों के स्वयंभू नेता कांतिलाल भूरिया के पुत्र डॉ. विक्रांत भूरिया को युवक कांग्रेस की कमान सौंपी है उन्हीं कांतिलाल भूरिया के इंदौर से लेकर झाबुआ व अलीराजपुर में खुलेआम अवैध शराब का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है इस कारोबार के खिलाफ वह कोई प्रभावी प्रदर्शन करने की जहमत तक नहीं उठा पा रहे हैं क्योंकि क्षेत्र के लोगों की बात पर भरोसा करें तो वह अपने पिताश्री की तरह अवैध शराब के कारोबारियों से अपने स्वार्थ की पूर्ति करने में लगे हुए हैं इसे शायद अपवाद ही समझें कि कांतिलाल भूरिया के ही परिजन स्वर्गीय कलावती भूरिया ने झाबुआ और अलीराजपुर में अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ जन आंदोलन करने की चेतावनी दी थी लेकिन वह भी कांतिलाल भूरिया व विक्रांत भूरिया की तरह वह उन अवैध शराब कारोकारियों के खिलाफ कुछ नहीं कर पाई, जहां तक अवैध शराब से जुड़े मामलों का सवाल है तो चाहे प्रदेश के उन नौनिहालों के मामा जो अपने शराब पिताओं से आयेदिन मार खाते रहते हैं उन मामा के ही शासनकाल में शराब को घर पहुंच सेवा बनाने का काम जोरों से चल रहा है क्योंकि यह सभी जानते हैं कि शराब से ही सरकार को भरपूर राजस्व मिलता है लेकिन अवैध शराब के कारोबार से तो सरकारी खजाने को चूना ही लगता है,
चाहे मामा की सरकार हो या कमलनाथ की कोई भी सरकार हो शराब के इन अवैध कारोबारियों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाने की जहमत नहीं उठा रही है। यही नहीं शराब के इस अवैध कारोबार को बढ़ावा देने में शराब के कारोबारी ही सक्रिय होने की मुख्य वजह यह भी है कि उनके इस कारोबार को संरक्षण सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा भरपूर मिलता है तो वहीं कुछ सत्ताधारी नेताओं के शराब के कारोबार में भागीदारी होने की खबरें भी सुर्खियों में बनी रहती हैं जहां तक शराब के अवैध कारोबार की करें तो इसके खिलाफ कदम उठाने की जुर्रत विभाग की प्रमुख सचिव दीपाली रस्तोगी द्वारा किये जाने के प्रयास किये जाते हैं लेकिन जब शराब कारोबारियों के चहेते अधिकारियों की नियुक्तियां भी उनके मनमाफिक किये जाने का उदाहरण धार जिले की केडिया डिस्टलरी के संचालकों के खिलाफ की गई कार्यवाही के बावजूद भी होती है तो यही समझ में आता है कि वह सरकार के मुखिया शिवराज सिंह चौहान भी जो माफियाओं को दस फिट जमीन में गाढऩे की चेतावनी देते हैं, इस तरह शराब कारोबारियों के मनपसंद अधिकारियों की नियुक्ति करने के पक्ष में क्यों रहते हैं यह सवाल भी आम जनता में लोग चटकारे लेकर करते नजर आते हैं खबर तो यह भी है कि शराब माफियाओं के खिलाफ जहां शिवराज दस फिट जमीन के अंदर गाडऩे की बात कहते हैं तो वहीं दूसरी ओर लोग इस तरह की खबरें चटकारे लेकर करते नजर आते हैं कि आबकारी विभाग के मंत्री जगदीश देवड़ा की आबकारी विभाग में कतई नहीं चलती यदि इस विभाग में किसी की चलती है तो जैसा कि सूत्रों का कहना है कि शिवराज सरकार के सत्ता पर काबिज पर्दे के पीछे सक्रिय रहने वाली अदृश्य सत्ता की देवी और उनके इशारे पर प्रशासन के मुखिया के दबाव में दीपाली रस्तोगी भी कुछ भी करने को मजबूर हैं यही वजह थी कि वह इन सबसे परेशान होकर कुछ दिनों छुट्टी पर चली गई थी और जब वह वापिस आई तो वही खेल इस प्रदेश के आबकारी विभाग में चल रहा है कि सत्ता की अदृश्य देवी के दबाव के चलते आबकारी विभाग के अधिकारियों के स्थानान्तरण शराब माफियाओं के चहेते अधिकारियों का चुन-चुनकर किया जा रहा है। इन सब स्थिति को देखते हुए तो आबकारी विभाग में यही चर्चा चल रही है कि अवैध शराब से कारोबार से प्रदेश के खजाने को चूना लग रहा है लेकिन शिवराज को चिंता नहीं क्योंकि वह विकास के नाम पर कर्ज लेकर इस प्रदेश की जनता को हजारों रुपये का शासन द्वारा लिये गये कर्ज से कर्जदार बनाकर ही छोड़ेंगे लेकिन वह अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ कोई कदम सत्ता की अदृश्य देवी के दबाव के चलते उठाने पर असहास होते नजर आ रहे हैं? देखना अब यह है कि अवैध शराब के यह कारोबारी शासन के खजाने को कितना चूना लगाते हैं और शिवराज विकास के नाम पर प्रदेश की बेशकमीती जमीनों को बेचने के साथ-साथ प्रदेश की परसंपत्ति को गिरवी रखकर कितना कर्ज लेकर प्रदेश को कर्जदार बनाने का यह सिलसिला कब तक चलता रहेगा?





