आज सेंचुरी सत्याग्रह आंदोलन और श्रमिक जनता संघ बैनर के तले रोजगार के संघर्ष का 1377 वा दिन है।*
आज भी हमारे श्रमिक भाई और उनके ही परिवार की बहने ,बच्चे डटे हुए हैं, सत्याग्रह स्थल पर,रोजगार के लिए। एक एक पोल खोल होती जा रही है, सेंचुरी ने जो बिक्री की है उसकी सच्चाई की !!!
एक और बात आज सबके लिए धक्का दायक भी है और अपेक्षित भी थी। VRS की नोटिस जब 29 जून 2021 को सेंचुरीके गेट पर चस्पा की गई तब स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति अनैच्छिक रूप से थोपी गई । उसमें लिखा हुआ था, कि सेंचुरी कंपनी ने मनजीत ग्लोबल और मनजीत कॉटन को दोनों मिल्स का बेचना तय किया है। उस समय बेची तो नहीं गई थी। लेकिन मनजीत ग्लोबल की दोनों कंपनियों की शर्त उसमें उद्धरूत की गई थी। शर्त यही थी कि सेंचुरी के कोई भी श्रमिक और कर्मचारियों को काम पर नहीं रखा जाएगा। हमारा सवाल था ,क्या इन अनुभवी कर्मचारियों और श्रमिकों के बिना ये दोनों मिल्स चला पाएंगे ,मनजीत ग्लोबल और मनजीत कॉटन प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां????
आखिर उस सवाल का जवाब अब कुछ मिल रहा है !सेंचुरी में जो काम करते थे ऐसे ही स्टाफ के कर्मचारियों में से जिन जिन लोगों ने VRS स्वीकार किया यानी इस्तीफा दे दिया… उनके नौकरी के तमाम लाभ खत्म करते हुए उनको घर में कई समय तक रहने दिया !लेकिन अब जब हमने सवाल उठाया की VRS लेने वालोंको आप अंदर रहने दे रहे हो? VRS ना लेने वाले निस्वार्थी लोगों को आप निकालने की कोशिश कर रहे हो।?? तब उन्होंने अपना सामान इस तरह बांधकर स्टाफ के क्वार्टर छोड़ दिए !!!
अब खबर आई है कि उनके साथ आज मनजीत ग्लोबल के डायरेक्टर (जैसा अधिकृत कागजातों में कहा गया है.. लेकिन जो बार-बार कहते हैं, मैं तो कोई नहीं हूं ,मैं तो केवल मालिक का रिश्तेदार हूं …)उन्होंने वेही वीआरएस लेकर बाहर गए कर्मचारियों को फिर अंदर बुलाया है !!खास करके मेंटेनेंस विभागके जो अधिकारी रहे , सुपरवाइजर लेवल के भी,उनको यानी अजीत सिंह को सामान लेकर बाहर जाने के बाद फिर अंदर सामान लेकर ले लिया है!! चल क्या रहा है ??#क्या बारगेनिंग चल रहा है ?
क्या नए समझौते हो रहे हैं ?उन्हीं लोगों को मैं नहीं लूंगा यह कहकर VRS थोपा जाने की साजिश तो हो गई अब फिर उन्हीं को वापस बुलाकर मेंटेनेंस के सिवाय मशीन चलेगी नहीं।!!!! तो क्या काम पर रखा जा रहा है?? यह जो खेल है कंपनियों की मनमानी का !वही तो हम लोग देख रहे हैं और हम देखेंगे भी !
873 श्रमिक और कुछ कर्मचारी जो डटे हुए हैं, VRS के बदले रोजगार के अधिकार को लेकर ,उनकी अपेक्षा रही है की उच्च न्यायालय न्याय करें…. पर उच्च न्यायालय की सुनवाई के 10 दिन बाद आज तक कोई जवाब यानी फैसला नहीं मिला है। तो सत्याग्रह जारी है और झूठ की पोल खोल भी जारी है।असत्य की पोल खोल करनी है। देशभर के साथियों को पता चले कि आखिर जब तक की लंबा संघर्ष नहीं होता, तब तक कॉरपोरेट्स की मनमानी के बुनियादी मुद्दों पर समाज का जागरण नही होता। ना श्रमिकों की एकजुटता बढ़ती है, नहीं न्याय मिलता।
आज श्रमिकों के नारों के बीच मनजीत कंपनीयों के प्रतिनिधि और बाउंन्सर्स ने मिलकर गेट पर उनका बैनर चढाया और एक ट्रक भरके कपास के गठन मिल्स के अंदर ले गये।
श्रमिकों का संकल्प है….पहले भगाया वेयरिट को,अब भगायेंगे मनजीत को।।।।।




