टोक्यो ओलंपिक में जहां एक तरफ खिलाड़ी अपने हुनर के दम पर इतिहास बना रहे हैं. वहीं, रोज नए-नए विवाद भी खड़े हो रहे हैं. दो देशों के बीच बरसों पुरानी अदावत इसकी सबसे बड़ी वजह हैं. खासतौर पर ईरान-इजरायल के रिश्तों की तल्खी खेलों के महाकुंभ में भी नजर आ रही है. इजरायल विरोध के कारण दो खिलाड़ियों को टोक्यो ओलंपिक छोड़कर जाना पड़ा है. वहीं, उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तल्ख रिश्तों की आंच भी कई बार खेलों पर पड़ी है.

नई दिल्ली. टोक्यो ओलंपिक में जहां एक तरफ खिलाड़ी अपने हुनर के दम पर इतिहास बना रहे हैं. वहीं, रोज नए-नए विवाद भी खड़े हो रहे हैं. दो देशों के बीच बरसों पुरानी अदावत इसकी सबसे बड़ी वजह हैं. खासतौर पर ईरान-इजरायल के रिश्तों की तल्खी खेलों के महाकुंभ में भी नजर आ रही है. बीते दिनों इससे जुड़ी कई घटनाएं सामने आईं, जब इजरायल की मुखालफत करने वाले मिडिल ईस्ट और उत्तर अफ्रीकी देशों के खिलाड़ियों ने इजरायल के खिलाड़ी के खिलाफ खेलने से ही इनकार कर दिया. भले ही उन्हें इसके लिए सजा ही क्यों ने भुगतनी पड़ी.
इसकी शुरुआत बीते शनिवार को हुई. जब टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा ले रहे अल्जीरिया के एक जूडो खिलाड़ी फ़ेतही नूरीन को सस्पेंड कर दिया गया. दरअसल, अल्जीरियाई खिलाड़ी ने इजरायल के खिलाड़ी तोहार बुटबुल से लड़ने से मना कर दिया था. इसके बाद उन्हें और उनके कोच को सस्पेंड कर दिया गया और टोक्यो से लौटने का आदेश सुना दिया गया. नूरीन को 73 किलो भार वर्ग में इजरायली खिलाड़ी के खिलाफ उतरना था. लेकिन उन्होंने फिलिस्तीन के समर्थन में ऐसा करने से इनकार कर दिया.
फिलिस्तीन के समर्थन में अल्जीरिया का खिलाड़ी सस्पेंड
अल्जीरियाई मीडिया में उन्हें ये कहते बताया गया कि हमने ओलंपिक के लिए बहुत तैयारी की. मगर फिलस्तीनियों का मुद्दा इससे बड़ा है. इससे पहले नूरीन 2019 में जापान में वर्ल्ड चैंपियनशिप में खेलने पहुंचे थे. मगर वहां भी पहला राउंड जीतने के बाद भी उन्होंने इजराइली खिलाड़ी से लड़ने से इनकार कर दिया था और प्रतियोगिता छोड़ दी थी.
सूडान ने भी इजरायली खिलाड़ी का बहिष्कार किया
सूडान के एक जूडो खिलाड़ी ने भी यही रुख अपनाया और इजरायली खिलाड़ी से लड़ने से इनकार कर दिया और ओलंपिक से खुद ही बाहर हो गया. मोहम्मद अब्दुलरसूल (Mohamed Abdalrasool) को भी इजराइल के तोहार बुटबुल का ही सामना करना था. मगर उन्होंने भी इस मुकाबले में उतरने से इनकार कर दिया. इसके बाद अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने सूडान के जूडो खिलाड़ी को बैन कर वापस भेज दिया. सूडान के अब्दुलरसूल का ओलंपिक मैच छोड़ने का कारण भी राजनीतिक और मजहबी बताया जा रहा है.
ईरान के पूर्व खिलाड़ी ने इजरायल का धन्यवाद दिया
टोक्यो में ऐसा एक और मामला सामने आया है. जिसकी वजह से ईरान-इजरायल के खराब रिश्ते दुनिया के सामने आए. दरअसल, सईद मोलैई नाम के एक ईरानी मूल के जूडो खिलाड़ी ने टोक्यो में मंगोलिया की तरफ से 81 किलो वर्ग में सिल्वर मेडल जीता. इस जीत के बाद उन्होंने इजरायल का धन्यवाद जताया और अपना पदक भी इस देश के नाम किया. हालांकि, उनके देश ईरान को यह रास नहीं आया. 2019 में, ईरान के पूर्व जूडो विश्व चैंपियन मोलैई ने इजरायल विरोधी नीति के कारण अपना देश छोड़ दिया था और जर्मनी में शरण ली थी.
ईरान पर जूडो संघ ने चार साल का बैन लगाया है
बता दें कि साल 1979 में ईरान की क्रांति ने कट्टरपंथियों को सत्ता में आने का मौका दिया और तभी से ईरानी नेता इजरायल को मिटाने की बात करते रहे हैं. दोनों देशों के बीच1985 से ही छद्म युद्ध चल रहा है, जिसकी आंच अक्सर खेलों पर भी आई है. ईरान ने सभी बड़े स्पोर्ट्स इवेंट में इजरायली खिलाड़ियों का बहिष्कार करने की नीति बनाई हुई है. मगर ईरान को अपनी इस नीति का खामियाजा भी उठाना पड़ा है. अंतर्राष्ट्रीय जूडो महासंघ (IJF) ने इसी साल अप्रैल में, ईरान को चार साल के लिए निलंबित कर दिया था. क्योंकि उसने अपने खिलाड़ियों को इजरायल के खिलाफ खेलने की मंजूरी नहीं दी थी.
उत्तर और दक्षिण कोरिया के विवाद का भी खेलों पर असर पड़ा
ईरान और इजरायल की तरह ही उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच भी सालों पुराना विवाद है. इसका असर ओलंपिक औऱ दूसरे खेल आयोजनों पर भी पड़ता है. हालांकि, टोक्यो गेम्स में ऐसा नहीं हुआ. क्योंकि उत्तर कोरिया कोरोना महामारी के कारण इन खेलों में हिस्सा ही नहीं ले रहा. पहले कई मौकों पर इन दोनों देशों के बीच खराब रिश्तों की कीमत खेल को चुकानी पड़ी है.
उत्तर कोरिया में खिलाड़ी की हार को टीवी पर नहीं दिखाते
उत्तर कोरिया में आमतौर पर टीवी पर खेलों के आयोजन बाद में टेलिकास्ट किए जाते हैं. मतलब उनका लाइव टेलिकास्ट नहीं होता. यह बात तब और बढ़ जाती है जब उसे किसी खेल में हार का सामना करना पड़ जाए और वो भी दक्षिण कोरिया के खिलाफ. 2014 के एशियन गेम्स में पुरुषों की फुटबॉल टीम फ़ाइनल में जगह बना चुकी थी, जहां उसका सामना दक्षिण कोरिया से होना था. इस मैच से पहले उत्तर कोरिया में जीत की उम्मीदों से को लेकर गजब का माहौल बनाया था. लेकिन आखिर में नतीजा 1-0 से दक्षिण कोरिया के हक में रहा.
उत्तर कोरिया ने इस मैच के समाचार को कभी टेलिकास्ट ही नहीं किया और इतिहास से इस मैच को हमेशा के लिए मिटा दिया. उत्तर कोरिया की आम जनता से लेकर मीडिया तक को नहीं पता कि उस मैच में क्या हुआ था.
जब ओलंपिक मेजबानी को लेकर कोरियाई देश आमने-सामने हुए
उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच के रिश्तों में तल्खी जगजाहिर है. 1988 में भी ओलंपिक खेलों की मेजबानी को लेकर दोनों मुल्कों के बीच काफी खींचतान हुई थी. दरअसल, तब उत्तर कोरिया ओलंपिक खेलों की मेजबानी दक्षिण कोरिया को मिलने पर नाराज हो गया था. उस वक्त उत्तर कोरिया ने यह बात बहुत मजबूती से उठाई थी कि इन खेलों का आयोजन या तो किसी दूसरी जगह किया जाए या फ़िर उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया मिलकर इनकी मेजबानी करेंगे.
अपनी इस मुहिम को कामयाब बनाने के लिए उत्तर कोरिया ने दूसरे हथकंडे भी अपनाए थे. उसने 1987 में कोरियन एयरलाइन के हवाई जहाज़ में धमाका तक करवा दिया था, जिसमें 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी. हालांकि, फिर भी दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ आज तक पिघली नहीं है. खेल इसका बड़ा जरिया बन सकता है. लेकिन वो भी सियासत की भेंट चढ़ जाता है.





