शशिकांत गुप्ते
आज फ्रेंडशिप डे है।बारह महीनों में किसी एक दिन माता,पिता,बच्चों और दोस्ती के लिए मनाना मतलब समझमें नही आता है? क्या यह औपचारिकता निभाना है?काश कभी हम कुपोषण मुक्त,बेरोजगरी मुक्त,गरीबी मुक्त,शोषण मुक्त दिन भी मना पाएंगे?वह दिन कब मनाएंगे जब हम यह कह सकें कि, आमजन की बुनियादी समस्याओं को हल करने के लिए,हम ईमानदारी से संकल्पित होकर कार्य करेंगे?वह दिन कब मनाएंगे जब हम हरएक समस्याओं के लिए पुरखों को कोसना छोड़ देंगे?देश को स्वतंत्र होकर पिचहत्तर वर्ष हो रहें है।इन पिचहत्तर वर्षो में ढाई वर्ष जनता पार्टी की सरकार थी,छः वर्ष अटलजी विराजमान थे।नवम्बर 2021 में साढ़े साती पूर्ण हो रही है? क्षमा करना,इसी वर्ष नवम्बर में Good Governance के साढ़े सात वर्ष पूर्ण हो रहें हैं।वह दिन कब आएगा जब हम जोड़ घटाव ठीक से कर पाएंगे?सामान्य तौर पर गणना करने पर यह ज्ञात होता है कि, दो वर्ष छः माह(जनता पार्टी) + छः वर्ष अटलजी के+ साढ़े सात वर्ष अच्छे दिनों की आस में व्यतीत हुए हैं।इस गणना का जोड़ सोलह वर्ष होता है। पिचहत्तर में से सोलह वर्ष घटा दिए जाएं तो उनसाठ वर्ष होते हैं। विश्वनाथ प्रताप सिंह और देवेगौड़ा के कार्यकाल की गणना भी की जा सकती है?उनसाठ में ग्यारह वर्ष मिलाएंगे तब सत्तर वर्ष होंगे?इस गणना से सत्तर वर्षों के लिए किसी एक ही दल को दोष देना समझ के बाहर हैं।समझमें नहीं आता है कि सत्तर वर्ष के शून्य की गणना कैसे की गई है?ऐसा दिन भी कोई मानाया जाएगा जब सत्तर वर्षों का राग अलापना बंद होगा?फ्रेंडशिप डे पर ऐसे अनेक जिज्ञासा पूर्ण प्रश्न जहन में पैदा होतें हैं?बहरहाल आज फ्रेंडशिप डे है।friendship day मनाने के लिए एक तरकीब समझ में आ रही है।किसी दोस्त के यहाँ बगैर Invitation के बिरयानी खाने चला जाए?*Happy friendship day.*
शशिकांत गुप्ते इंदौर





