शशिकांत गुप्ते
विपक्ष सदन की कार्यवाही चलने नहीं दे रहा है?या चलने नहीं देता है?आश्चर्य होता है,विपक्ष तो है ही नहीं,ना ही कोई विकल्प है? तो यह कौन सा विपक्ष है, जो संसद की कार्यवाही नहीं चलने दे रहा है?हम तो है कमाल के।जब हम विपक्ष में थे,तब हमने भी कार्यवाही चलने नहीं दी थी। एक सुखराम नामक तात्कालिक सरकार के संचार मंत्री थे।हमें सुखरामजी से इतना अधिक दुख था कि, हमने निरंतर चौदह दिनों तक संसद चलने दी थी।हम किसी से कम नहीं है,हमने ही कुछ समयः पश्चात उन्ही सुखराम के गोद में बैठकर राजीखुशी हिलाचल प्रदेश में सरकार भी चलाई है।
यह हमारा पवित्र इतिहास है। हमारी बात और है हम Party with difference हैं।हमारे यहाँ एक से बढ़कर एक वक्तव्य देने वाले खोजी दिमाग वाले अधिकृत प्रवक्ता हैं।हाल ही में एक अदभूत वक्तव्य सुना और पढा होगा।स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के प्रथम प्रधानमंत्री के प्रथम भाषण के कारण ही देश में महंगाई हुई है।वही महंगाई आज सन 2021 में भी है?यह वक्तव्य पढ़,सुन कर एक औसत नागरिक की हैसियत से अंतर्मन में इतना संतोष तो हुआ। चलो पूर्व प्रधानमंत्री ने कुछ तो किया है?स्व.नेहरूजी कुछ तो काम आए हैं?महंगाई का विरोध करने वालों के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती है? सभी विपक्षियों को स्वर्ग में जाकर नेहरूजी का विरोध करना चाहिए?पूर्व की सरकारें गलतियां नहीं करती तो आज हम किस को कोसते?एक पिचहत्तर वर्षीय परिचित सज्जन से भेंट हुई सम्भवतः वे टाइम पास करने के मूड में थे।
नमस्ते की औपचारिकता के बाद वे अपनी वास्तविक मानसिकता में आगए।उनका सिर्फ इतना ही परिचय है कि, वे पूर्व में सुबह नेकर पहनते थे, इनदिनों पतलून पहनते हैं।उन्होंने चर्चा की शुरुआत ही कुछ इस तरह की।देश को पहली बार एक सक्षम व्यक्ति मिला है।सत्तर वर्षो तक देश में कुछ हुआ ही नहीं अब सब कुछ होगा?लेखक ने कौतूहलवश उन सज्जन से पूछा आप अभी क्या करतें हैं?प्रश्न सुनते ही उन्होंने वृद्धावस्था की मानसिकता में पहुँच कर लेखक के प्रश्न का जवाब दिया।प्राथमिक शिक्षा से लेकर माध्यमिक शिक्षा के दौरान कौन शिक्षक कैसे पढ़ाते थे।सज्जन के पिताश्री सरकारी महकमे में कार्यरत थे।अपने पिताश्री के तबादलों की दास्तान सुनाई।माध्यमिक शिक्षा के बाद वे महाविद्यालय में भी पढ़े।इंजीनियरिंग की पढ़ाई में उन्होंने पोस्टग्रेजुएशन किया।सरकारी महकमे में इंजीनियर के पद पर नोकरी की।योग्यता के आधार पर पदोन्नति भी होते गई।
विवाह हुआ।पत्नी भी विज्ञान में स्नातकोत्तर तक पढ़ी हुई मिली।पत्नी भी एक महाविद्यालय में प्राध्यापक रही है।तीन संताने हुई।दो सुपुत्र एक कन्या।एक सुपुत्र रिसर्च और डवलेपमेंट की पढ़ाई कर एक बहुत विशाल अनुसंधान केंद्र में नोकरी कर रहा है।एक सुपुत्र विदेश में उच्चशिक्षा प्राप्त कर वही नोकरी कर रहा है।बेटी भी चिकित्सविज्ञान में पोस्टग्रेजुएट की पढ़ाई कर किसी निजी अस्पताल में कार्यरत है।सज्जन ने स्वयं बैंक से लोन लेकर दुमंजिला मकान बनाया है।
पति,पत्नी दोनों ही सेवानिवृत्त हो गए हैं।दोनों को ही पेंशन मिलती है।समय समय पर पर्यटन के लिए निकल पडतें है।जो उन्होंने दांस्ता अपनी सुनाई, लेखक ने कहा दिया आप झूठ बोल रहें हैं?लेखक की टिप्पणी सुनकर वे नाराज होगए और क्रोध में आगए।क्या झूठ बोला है मैंने?जो भी मैने बोला वह शतप्रतिशत सच है।लेखक ने कहा आप जो कह रहें है, वह लेखक के गले नहीं उतर रहा है?लेखक ने साफ शब्दों में पूछा कि जो भी दांस्ता आपने सुनाई उसपर लेखक कैसे विश्वास करेगा?वे क्रोध से तमतमाते हुए चीख चीख के कहने लगे मैं जो बोलरहा हूँ वह सत्य है रामजी की कसम खा कर कहता हूँ।रामजी बीच में आने के बाद तो बहस के लिए कोई गुंजाइश बची ही नहीं।रामजी आस्था का प्रतीक जो हैं।फिर भी लेखक ने जिज्ञासा वश पूछ ही लिया।महाशय आश्चर्य होता है,आप ने कहा कि पिछले सत्तर वर्षो में देश में कुछ हुआ ही नहीं तो क्या आप जहाँ पढ़े लिखे हो वहाँ स्कूल कॉलेज थे?क्या अपने बैंक से ऋण लिया तो बैंक थी?और थी तो बैंकों से ऋण लेने की सुविधा भी थी?आप सिविल इंजीनियर थे।आपने ही बताया आप के कार्यकाल में आपने बहुत सी सड़के बनाई पुल निर्मित किए, क्या यह सच में हो पाया?लेखक की बातें सुनकर वे लेखक को कहने लगे आप निश्चित ही विपक्ष के समर्थक हो।ऐसे प्रश्न विपक्षी ही पूछतें हैं।लेखक ने पुनः उनकी दुःखती रग पर हाथ रख दिया और पुनः प्रश्न दोहराया विपक्ष कहाँ है?
शशिकांत गुप्ते इंदौर





