अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

क्यों न सरकार सरकारी महकमे से उसकी संपत्ति का ब्यौरा मांगे

Share

अमित त्रिवेदी पत्रकार*
*इंदौर नगर निगम के जनकार्य विभाग अधीक्षक सक्सेना और महिला कर्मचारी की धरपकड़ के बाद यह तो सिद्ध हो गया है कि जनता के लिए,जनता का से सिर्फ अपना और सिर्फ अपना। यह फार्मूला लगभग सभी सरकारी विभागों में चलायमान है। कर्मचारी,अफसर सिर्फ स्वयं का स्वार्थ सिद्ध करने में मशगूल है। यकायक छापा और एक अदने से कर्मचारी के पास 10 लाख से ज्यादा केश, और विवेचना में करोड़ो की संपत्ति, यह एक बड़ा संकेत है कि इस अदने से कर्मचारी की बेतहाशा इतनी काली कमाई है। तो अन्य बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों के क्या हालात होंगे। कहीं वह बेहिसाब खजाना तो नही संभाल रहे है। आखिर क्यों  सरकार लोकायुक्त जैसी जांच एजेंसियों पर जबरिया बोझ डाल रही है। क्योंकि सरकार अपने सरकारी महकमे से उसकी संपत्ति का हिसाब क्यों नही मांगती। क्योंकि हिसाब मांगने पर दूध का दूध, और पानी का पानी, यानी सच का सच और भ्रष्ट का भ्रस्ट साबित हो जाएगा। सवाल यह भी सामने आ रहा है कि आखिर भ्रष्ट महकमें पर इतनी ज्यादा मेहरबानी किस बात की। जबकि कुछ तथाकथित विभाग और उसमें पदस्थ अफसर और कर्मचारी भ्रष्टाचार को खुले तौर पर अंजाम दे रहे है। लेकिन सबकुछ मालूम होने के बाद भी सरकार और जिम्मेदारों की इन पर इतनी रियायत आखिर किसलिए। क्यों न विभागवार इन अफसरों,कर्मचारियों की सम्पत्तियां सार्वजनिक की जाए। फिर देखिए होता है क्या,दरअसल वह इसलिए क्योंकि कई छुपे सफ़ेदपोश सामने होंगे और जनता को भी तो पता चले कि सिर्फ एक दो अदनो को दबोचने के बजाय सरकार की वक्रदृष्टि अब सभी भ्रष्टाचारियों पर पड़ गयी है।*

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें