(एक व्यंग्य )
◇◆◆◆◆◆◆◆◇
एक बहुत बड़े नेताजी यानी भाजपा के एक बहुत बड़े नेता जी मरने के बाद यमपुरी पहुंचे, वहां पर यमराज ने उनका भव्य स्वागत किया और उनसे विनम्र निवेदन करते हुए कहा कि 'इससे पहले कि मैं आपको स्वर्ग या नरक भेजूं पहले मैं चाहता हूँ कि आप दोनों जगहों का पहले मुआयना कर लें कि आपके लिए कौन सी जगह ज्यादा अनुकूल होगी ? '
यमराज ने यमदूत को बुलाकर कहा कि 'नेता जी को एक दिन के लिए नरक और फिर एक दिन स्वर्ग घुमा कर वापिस मेरे पास ले आना । '
यमदूत नेताजी को पहले नरक में ले गया। नेताजी नरक कि चकाचौंध देखकर हैरान रह गये वहाँ चारों तरफ हरी -भरी घास और बीच में गोल्फ खेलने का मैदान,नेता ने देखा उनके सभी दोस्त वहां घास के मैदान में शांति से बैठे हैं और कुछ गोल्फ खेलने का आनंद ले रहे हैं,उन्होंने जब उन्हें देखा तो वे बहुत खुश हुए और सब उनसे गले मिलने आ गए और बीते हुए दिनों कि बातें करने लगे पूरा दिन उन्होंने उनके साथ में गोल्फ खेला, और रात में शराब,मीट,मछली आदि का भरपूर आनंद लिया !
अगले दिन यमदूत नेताजी को स्वर्ग लेकर गया जैसे ही वे स्वर्ग के द्वार पर पहुंचे स्वर्ग का दरवाजा खुला,नेताजी ने देखा स्वर्ग में रोशनी से भरा दरबार था ! वहाँ सभी लोगों के चेहरे पर असीम शांति थी,लेकिन वहाँ कोई भी एक -दूसरे से बात नहीं कर रहा था,मधुर संगीत बज रही थी, कुछ लोग बादलों के ऊपर तैर रहे थे ! नेता ने देखा सभी लोग अपने -अपने कार्यों में व्यस्त थे,नेताजी उन सभी को बहुत गौर से देख रहे थे ,नेताजी वहाँ पर बड़ी मुश्किल से एक दिन काटे !
सुबह जब यमदूत उन्हें लेकर यमराज के पास पहुंचा तो यमराज ने नेताजी की तरफ देखकर बोले, 'हाँ तो नेताजी ! अब आप अपने लिए नरक और स्वर्ग दोनों में से एक स्थान चुन लीजिए, जहाँ आप को भेजा जाये ! '
नेताजी ने कहा 'वैसे तो स्वर्ग में बड़ा आनंद है,शांति है फिर भी वहां मेरे लिए समय काटना बहुत मुश्किल भरा काम है, इसलिए आप मुझे नरक ही भेज दीजिए, वहां मेरे सभी साथी भी हैं, मैं वहां आनंद से अपने साथियों के साथ रहूँगा। ' नेताजी की यह बात सुनकर यमराज ने उन्हें नरक में भेज दिया !
यमदूत उन्हें लेकर जैसे ही नरक पहुंचा तो नेताजी नरक के दरवाजे से ही वहां का दृश्य देखकर स्तब्ध रह गये ! आज वहाँ का नजारा बिल्कुल बदला-बदला सा और अलग था आज वहाँ की जमीन कल की तरह हरी-भरी नहीं थी वहाँ मखमली हरियाली की जगह बिल्कुल बंजर भूमि दिख रही थी,जहाँ चारों तरफ कूड़े - करकट का ढेर लगा हुआ था,उन्होंने देखा उसके सभी दोस्त फटे हुए गंदे कपड़ों में कबाड़ इकट्ठा कर रहे थे,वे थोड़ा परेशान हुए और यमदूत की तरफ बिस्मय से देखा और कहा मुझे यह बात समझ में नहीं आ रही है कि कल जब मैं यहाँ आया था तो यहाँ घास के हरे -भरे मैदान थे और मेरे सभी दोस्त वहाँ गोल्फ खेल रहे थे फिर हमने साथ बैठकर मछली खायी थी और खूब मस्तियाँ कीं थीं,लेकिन आज तो सबकुछ बिल्कुल उल्टा-पुल्टा दिख रहा है। यमदूत हल्की सी हंसी के साथ बोला
‘नेताजी ! ‘
‘कल हम चुनाव प्रचार पर थे,आप जिस तरह से धरती पर लोगों को सब्जबाग दिखाते थे,झूठी बातें बोलकर वोट लेते थे । अपने पुरखों को, विपक्षियों को गाली देकर,भ्रमित करके, जनता का ब्रेनवाश करके वोट लेकर सत्ता का सुख भोगते थे,आज ये सब उसी का प्रतिफल है । यह धोखा देने,झांसा देने वालों को मिलता है। उन्हीं के काम का प्रतिफल उन्हें यहाँ दिया जाता है । बेटा ! तुमको भी यहाँ झांसा दिया गया है, क्योंकि तुमने और तुम्हारी पार्टी ने अपने जीवन भर भारत की 135 करोड़ लोगों को केवल धोखा दिया,झांसा दिया,वादाखिलाफी किया,इसलिए तुम्हारे अलावे तुम्हारे पार्टी के सभी नेताओं की यही अधोगति होगी । बेटा तुम्हारे पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और सभी अंध भक्तों की भी यही दुर्गति होगी। यहां पर भी झांसा देकर,सब्जबाग दिखाकर,स्वर्ग के नाम पर फोटो दिखाकर,स्वर्ग का वीडियो दिखाकर इसी नरक में तुमको धकेल देंगे । अब जाओ इसी नरक में आनंद लेने की कोशिश करो,क्योंकि पूरा जीवन तुमने भारत की गरीब जनता को धोखा दिया है,झांसा दिया है,हर तरह की लूट -खसोट, बेईमानी की है,मिलावट किया है,मुनाफाखोरी किया है,निरीह जनता का खून चूसा है, इसलिए अब नर्क भोगो,आनंद से भोगो और आज अब हमारे पक्ष में मतदान भी कर चुके हो,अब तुम्हारे हाथ में कुछ भी नहीं है। ‘
अब नेताजी मुँह लटकाए उस नरक के दरवाजे से अंदर को धीरे-धीरे जा रहे थे,जहाँ हर तरफ गरीबी,भूखमरी,मुफलिसी,बेरोजगारी, निराशा,उदासीनता,अशिक्षा,बीमारियों,गंदगी और बदबू का साम्राज्य पसरा पड़ा था,वहाँ खुशहाली, आनन्द, प्रसन्नता, खिलखिलाहट,सुगंध,फूलों, तितलियों,भौंरों,बारिश की ठंडी-ठंडी,शीतल हवाओं का पूर्णतया अभाव दिख रहा था। नेताजी अब अपने विगत जीवन में किए गये अपने बुरे कामों के बारे में गंभीरतापूर्वक सोच रहे थे कि ‘किस तरह हमने भारत की गरीब और भोली जनता के साथ हर तरह का झूठ बोलकर, भ्रमित करने वाले सब्ज-बाग दिखाकर,वोट लेकर केवल चंद पूँजीपतियारों के हित में लगातार फैसले लिए जा रहा था ! आम जनता भूखमरी से,बेरोजगारी से,भ्रष्टाचार से बुरी तरह त्रस्त थी ! किसान अपनी फसलों की जायज कीमत नहीं मिलने से साल-दर-साल कर्ज में लगातार डूबते जा रहे थे और अन्त में निराश होकर सल्फास की गोली खाकर या अपने खेत में बबूल या कीकड़ के पेड़ पर लटककर खुदकुशी कर लेते थे,बेरोजगारी से त्रस्त नौजवान हर आधे घंटे में आत्महत्या कर रहे थे,इस प्रकार लाखों की संख्या में किसान और बेरोजगार युवा भारतभूमि पर अब तक आत्महत्या कर चुके थे,लेकिन हमने आज तक किसानों की आमदनी 2022 तक दुगुना कर देने की एक और जुमलेबाजी का जुमला उछाल दिया था,लेकिन मैंने शातिराना ढंग से किसानों को उनके द्वारा उत्पादित फसलों की लागत मूल्य भी न देने की जिद पर अपने जीवन के अन्त तक अड़ा रहा था,पूरे भारत में बेरोजगारी से,भूखमरी से,दवाइयों और ऑक्सीजन के अभाव में कोरोना नामक भयावह रोग से भयंकर हाहाकार मचा हुआ था,हमें यह बात भी ठीक से पता था कि भारत में करोड़ों की संख्या में गरीब लोग अब तक मौत के मुँह में जा चुके थे,परंतु हमने अपनी मिडिया से इस सच को, इस राज को कभी भी उद्घाटित न करने के लिए सख्त हिदायत दे रखा था ! मैं इस बात को खूब ठीक से जानता था कि मैंने भारत की जनता के साथ बहुत विश्वासघात किया है, झूठ बोला है,वादाखिलाफी किया है। मुझे नरक में भेजकर यमराज ने बहुत सही किया है। लेकिन इस नरक की सजा भी मेरे किए अपराधों की समुचित सजा नहीं है,नरक भोगने की सजा से भी मुझे बड़ी सजा मिलनी चाहिए थी ! ‘नेताजी अपने जीवन में किए गए अपने कुकृत्यों का पुनरावलोकन करते हुए,उक्त बातें सोच रहे थे।
-विवेकानंद त्रिपाठी , नोयडा,गौतमबुद्ध नगर,संपर्क-99688 89122
-निर्मल कुमार शर्मा, 'गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण ',प्रताप विहार,गाजियाबाद, 




