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खनिज ठेकेदारों द्वारा ओव्हरलोडिंग ….25 की जगह 40 फीट तक ढोई जा रही रेत व गिट्टी

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भोपाल। प्रदेश सरकार द्वारा अवैध रेत खनन के लिए जारी होने वाली टीपी को लेकर सख्ती शुरू कर दी गई है, लेकिन इसका तोड़ खनिज ठेकेदारों द्वारा ओव्हरलोडिंग के रुप में निकाल लिया गया है। यह बात अलग है कि ऐसे मामलों में भी कार्रवाई की जा रही है। यह खुलासा विभाग द्वारा की जा रही चैकिंग में हुआ है। इस तरह का खेल कई जिलों में चलना पाया गया है। अवैध परिवहन रोकने के लिए विभाग द्वारा ई-टीपी के वेरिफिकेशन का काम शुरू किया गया है, जिसके बाद ही ओव्हरलोडिंग के सर्वाधिक मामले सामने आना शुरू हो गए हैं। हालत यह हैं कि ठेकेदारों द्वारा  25 फीट भरकर परिवहन की अनुमति होने के बाद भी 30 से 40 फीट रेत और गिट्टी ट्रकों से भेजा जा रहा है।
खास बात यह है कि इसका खुलासा भी खनिज विभाग के मैदानी अमले द्वारा किया गया है। यह बात अलग है कि बारिश का मौसम होने की वजह से रेत का खनन कम हो गया है और पूर्व से भंडारित की गई रेत का ही परिवहन किया जा रहा है। खास बात यह है कि मप्र से सर्वाधिक खनिज का परिवहन पड़ोसी राज्य उप्र के लिए किया जा रहा है। इसके चलते प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में नाके लगाकर रॉयल्टी को लेकर चैकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसके बाद भी परिवहनकर्ताओं द्वारा उन रास्तों का उपयोग किया जा रहा है जहां पर खनिज और पुलिस का अमला नहीं रहता है। इसके अलावा ओव्हरलोडिंग के माध्यम से भी ठेकेदारों द्वारा सरकारी राजस्व को चूना लगाया जा रहा है। खनिज विभाग के अधिकारियों का दावा है कि सर्वाधिक चैकिंग यूपी के सीमावर्ती जिलों में की जा रही है। इनमें भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा के सीमावर्ती इलाके शामिल हैं। नियम के मुताबिक खनिज कारोबारी रॉयल्टी तो चुका रहे हैं, लेकिन वाहन की क्षमता से ज्यादा ओव्हरलोडिंग कर रहे हैं।
अब निजी कंपनी को सौंपा माइनिंग प्लान का काम
अवैध रेत उत्खनन और उससे नदियों, पर्यावरण, जैव विविधता एवं जलीय जीवों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए उत्खनन योजना बनाने का काम एक  निजी एजेंसी को देने की तैयारी कर ली गई है। यह एजेंसी केंद्र सरकार की देखरेख में काम करेगी और रेत भंडारण वाले प्रदेश के 40 जिलों में वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर सर्वे का काम करेगी। यह कंपनी ही तय करेगी की किस नदी के किस- किस घाट से कितनी मात्रा में रेत का उत्खनन किया जाएगा। यह प्लान कंपनी द्वारा पांच साल के लिए बनाया जाएगा। यही नहीं कंपनी ही खदानों से निकाली जाने वाली रेत की भी निगरानी भी एजेंसी करेगी।   

Ramswaroop Mantri

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