संयुक्त राष्ट्र. चीन पर व्यंग्य करते हुए भारत ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि आतंकवादी घोषित करने के अनुरोधों के रास्ते में बिना किसी उचित कारण देशों को अवरोध उत्पन्न नहीं करना चाहिए. भारत ने चेताया कि कोई भी दोहरा मानदंड या आतंकवादियों के बीच भेदभाव सिर्फ हमें तकलीफ पहुंचाएगा. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय समुदाय समान विचार रखता है कि आतंकवाद के सभी स्वरूपों की निंदा होनी चाहिए. इसमें कोई अपवाद नहीं हो सकता है. ना ही किसी आतंकवादी गतिविधि को सही ठहराया जा सकता है, भले ही उसके पीछे कारण/मंशा कुछ भी हो.’’
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मौजूदा अध्यक्ष जयशंकर ‘आतंकवादी गतिविधियों के कारण अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को उत्पन्न खतरा’ विषय पर सुरक्षा परिषद में चर्चा की अध्यक्षता कर रहे थे. अपने देश की ओर से जयशंकर ने इस साल जनवरी में परिषद में की गई अपनी टिप्पणी को दोहराया, जिसमें उन्होंने आतंकवाद के खात्मे के लिए आठ सूत्री कार्य योजना का प्रस्ताव रखा थाl
उन्होंने कहा, ‘‘राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत करें : आतंकवाद को न्यायसंगत ना बताएं, आतंकवादियों का महिमामंडन ना करें, दोहरा मानदंड ना अपनाएं. आतंकवादी, आतंकवादी होते हैं, उनमें फर्क कर हम सिर्फ अपनी तकलीफें बढ़ाएंगे, बिना किसी कारण के अनुरोध (आतंकवादी घोषित करने) के रास्ते में बाधा उत्पन्न ना करें.’’
यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य चीन के संदर्भ में था, जो पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को आतंकवादी घोषित करने के लिए भारत के प्रयास के रास्ते में बार-बार रोड़ा अटकाता रहा है.
पाकिस्तान को भी लगाई फटकार
वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करते हुए कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान आधारित आतंकी समूह बेखौफ अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं और उन्हें इसके लिए प्रश्रय भी मिल रहा है. साथ ही आतंकवाद के अभिशाप पर ”चुनिंदा दृष्टिकोण” नहीं अपनाने और उन लोगों के ”दोहरे मापंदड” को उजागर करने का साहस दिखाने का आह्वान किया, जिन्होंने उन लोगों को सुविधाएं उपलब्ध कराईं जिनके हाथ निर्दोष लोगों के खून से सने हैं.
जयशंकर ने कहा प्रतिबंधित हक्कानी नेटवर्क की गतिविधियों में वृद्धि इस बढ़ती चिंता को सही ठहराती है.
जयशंकर ने कहा, ”हमारे पड़ोस में, आईएसआईएल-खोरासन (आईएसआईएल-के) अधिक ताकतवर हो गया है और लगातार अपने पांव पसारने की कोशिश कर रहा है. अफगानिस्तान में होने वाले घटनाक्रम ने स्वाभाविक रूप से क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर वैश्विक चिंताओं को बढ़ा दिया है.”विज्ञापन
उन्होंने कहा, ” चाहे वह अफगानिस्तान में हो या भारत के खिलाफ, लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूह को प्रश्रय प्राप्त है और वे बेखौफ होकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं.”
विदेश मंत्री ने कहा कि इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि सुरक्षा परिषद ”हमारे सामने आ रही समस्याओं को लेकर एक चयनात्मक, सामरिक या आत्मसंतुष्ट दृष्टिकोण नहीं अपनाए.”
उन्होंने कहा, ”हमें कभी भी आतंकवादियों के लिए पनाहगाह उपलब्ध नहीं करानी चाहिए या उनके संसाधनों में इजाफे की अनदेखी नहीं करनी चाहिए.”





